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राजस्थान महत्वपूर्ण तथ्य - परीक्षा उपयोगी

1 min read 181 views 03 Sep 2026 Rajasthan GK ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
राजस्थान के इतिहास, भूगोल, कला, संस्कृति, रियासतों एवं प्रमुख व्यक्तित्वों से संबंधित परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्यों का संकलन। RPSC, RAS, RSMSSB, Patwar, SI, REET एवं अन्य राजस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु।
Key Points
  • जयपुर में हवा महल (1799 ई.) में 953 खिड़कियाँ हैं — जंतर-मंतर देश की 5 वेधशालाओं में सबसे बड़ी है
  • पंचायती राज की शुरुआत 2 अक्टूबर 1959 को बगदरी (नागौर) से हुई — राजस्थान प्रथम राज्य था
  • खानवा का युद्ध (17 मार्च 1527) राजस्थान के इतिहास का निर्णायक युद्ध माना जाता है
  • रणथम्भौर दुर्ग यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक धरोहर में शामिल — अबुल फजल ने इसे 'बख्तरबंद दुर्ग' कहा
  • गणेश्वर सभ्यता को ताम्रयुगीन सभ्यता की जननी कहा जाता है
  • 1857 की क्रांति राजस्थान में सर्वप्रथम नसीराबाद छावनी (अजमेर) से 28 मई 1857 को शुरू हुई
  • महाराजा गंगासिंह (बीकानेर) एकमात्र राजस्थानी राजा थे जिन्होंने तीनों गोलमेज सम्मेलन (1930-32) में भाग लिया

जयपुर से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • सवाई रामसिंह द्वितीय ने 1878 में प्रिंस ऑफ वेल्स के जयपुर शहर के आगमन पर जयपुर की सभी इमारतों पर गुलाबी रंग करवाया था
  • आमेर के किले का निर्माण मानसिंह प्रथम ने करवाया था
  • नाहरगढ़ के किले का निर्माण 1734 में सवाई जयसिंह ने करवाया था — इसे सुदर्शनगढ़ भी कहते हैं
  • जयपुर में हवा महल का निर्माण सवाई प्रतापसिंह द्वारा 1799 ई. में करवाया गया था — इसमें कुल पाँच मंजिल हैं जिन्हें नीचे से ऊपर के क्रम में शरद मंदिर (प्रताप मंदिर), रत्न मंदिर, विचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर, हवा मंदिर के नाम से जाना जाता है — इसमें 953 खिड़कियाँ हैं
  • जयपुर में जंतर-मंतर का निर्माण सवाई जयसिंह द्वारा करवाया गया था — यह उनके द्वारा देश भर में निर्मित पाँच वेधशालाओं में सबसे बड़ी है — अन्य वेधशालाएँ दिल्ली, उज्जैन, वाराणसी एवं मथुरा में स्थित हैं
  • विश्व का सबसे बड़ा चाँदी का पात्र सिटी पैलेस, जयपुर में रखा हुआ है
  • जयगढ़ दुर्ग भारत का एकमात्र दुर्ग है जहाँ तोप ढालने का संयंत्र लगा हुआ है
  • जयपुर प्रजामंडल की स्थापना कपूरचन्द पाटनी ने वर्ष 1931 में की तथा वर्ष 1937 में जमनालाल बजाज एवं हीरालाल शास्त्री के प्रयासों से इस प्रजामंडल का पुनर्गठन किया गया

अजमेर से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • सर टॉमस रो 22 दिसम्बर 1615 ई. को अजमेर आए थे
  • मुगल बादशाह अकबर ने अजमेर की पाँच बार पैदल यात्रा की थी
  • भारत सरकार के द्वारा अजमेर के मैगजीन किले/अकबर के किला को 19 अक्टूबर 1908 को राजकीय संग्रहालय की स्थापना राजपूताना म्यूजियम के नाम से की गई थी
  • राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल, अजमेर की स्थापना वर्ष 1930 में किंग जॉर्ज रॉयल इंडियन मिलिट्री स्कूल के रूप में की गई थी — वर्ष 1966 में इसे मिलिट्री स्कूल और वर्ष 2007 में राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल का नाम दिया गया
  • किशनगढ़ प्रजामंडल की स्थापना वर्ष 1939 में कांतिलाल चौथानी व जमालशाह द्वारा की गई थी

राजस्थान — नीमूचणा व डाबड़ा हत्याकांड

  • राजस्थान में नीमूचणा हत्याकांड 14 मई 1935 ई. को हुआ था — महात्मा गांधी ने इसकी तुलना जलियाँवाला बाग हत्याकांड से की थी
  • डाबड़ा हत्याकांड 13 मार्च, 1947 ई. को डीडवाना (पूर्व में नागौर जिला) में घटित हुआ था — मथुरादास माथुर के नेतृत्व में सम्मेलन चल रहा था — गोलीबारी में कई किसान शहीद हो गए थे

शाहपुरा से संबंधित तथ्य

  • शाहपुरा रामस्नेही समुदाय के लोगों का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है
  • शाहपुरा में प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी केसरी सिंह बारहठ, प्रताप सिंह बारहठ की प्रसिद्ध हवेली एक स्मारक के रूप में स्थित है
  • शाहपुरा रियासत में वीर भारत सभा नामक गुप्त क्रांतिकारी सभा की स्थापना वर्ष 1910 में की गई थी

राजस्थान — प्रथम एवं विशेष तथ्य

  • राजस्थान में सर्वप्रथम रेलगाड़ी का संचालन अप्रैल 1974 ई. में बांदीकुई (दौसा) से आगरा फोर्ट (उत्तर प्रदेश) तक किया गया था
  • राजस्थान में सबसे पहले राजकीय बस सेवा की शुरुआत टोंक से हुई थी
  • टोंक रियासत राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासत थी
  • 1857 की क्रांति राजस्थान में सर्वप्रथम अजमेर जिले की नसीराबाद छावनी से 28 मई 1857 को शुरू हुई — क्रांति के समय यह राजस्थान की सबसे बड़ी सैनिक छावनी थी
  • जमनालाल बजाज की पत्नी जानकी देवी पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित होने वाली राजस्थान की प्रथम महिला हैं
  • भारत में सर्वप्रथम बगदरी (नागौर) में पं. जवाहर लाल नेहरू द्वारा 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज की शुरुआत की गई — पंचायती राज की शुरुआत करने वाला राजस्थान प्रथम राज्य है
  • भारत का सबसे सम्पन्न पाषाणीय सभ्यता स्थल बागोर भीलवाड़ा जिले में स्थित है

अलवर से संबंधित तथ्य

  • अलवर की स्थापना 1775 ई. में रावराजा प्रतापसिंह द्वारा की गई थी — यहाँ की पहली राजधानी 'रायगढ़' को बनाया गया था और दूसरी राजधानी अलवर बनाई गई थी
  • आर्य समाज के प्रमुख श्रद्धानन्द ने वर्ष 1918 में धौलपुर की निरंकुश शासन व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाई थी
  • धौलपुर के मचकुंड में गुरु हरगोविंद ने 1662 ई. में तलवार के एक ही वार से शेर का शिकार किया था — उनकी स्मृति में यहाँ 'शेर शिकार गुरुद्वारा' बना हुआ है
  • धौलपुर जिले में स्थित शेरगढ़ के किले का निर्माण जोधपुर के राजा भालदेव ने करवाया था — शेरशाह सूरी ने 1540 ई. में इसका पुनर्निर्माण किया — उन्हीं के नाम के आधार पर इसका नाम शेरगढ़ पड़ गया
  • धौलपुर जिले में स्थित घंटाघर को निहाल टॉवर (N.T.) भी कहा जाता है — इसका निर्माण कार्य राजा निहाल सिंह के समय 1880 से शुरू हुआ तथा 1910 ई. में राजा मानसिंह के जमाने में पूरा हुआ

मीरा बाई से संबंधित तथ्य

  • मीरा बाई का जन्म 1498 ई. में वैशाख शुक्ल तृतीया (आखातीज) को कुड़की गाँव, व्यावर में हुआ था
  • वर्ष 2023 में हुए जिलों के पुनर्गठन से पहले यह स्थान पाली जिले में था
  • संत पीपाजी महाराज की तपोस्थली टोडा है

नागौर से संबंधित तथ्य

  • नागौर रियासत में अमरशाही सिक्के प्रचलित थे
  • राव अमरसिंह राठौड़ की छतरी (नागौर) 16 कलात्मक खम्भों की छतरी है
  • 1544 ई. में हुए जैतारण के युद्ध में मालदेव यद्यपि शेरशाह के हाथों पराजित हुए, तथापि युद्ध की समाप्ति पर शेरशाह को कहना पड़ा — "एक मुट्ठीभर बाजरे के लिए मैं हिन्दुस्तान की बादशाहत खो देता"

भरतपुर से संबंधित तथ्य

  • भरतपुर को 'राजस्थान का पूर्वी प्रवेश द्वार' कहा जाता है
  • महाराजा सूरजमल को 'जाटों का प्लेटो' तथा 'अफलातून' कहा जाता है — वह एकमात्र ऐसे राजा थे जो दोनों हाथों से तलवार और तीर चलाना जानते थे — इन्होंने डीग में कृष्णविलास महल का निर्माण करवाया
  • भरतपुर के बयाना में गुप्तकालीन सिक्कों का सबसे बड़ा भंडार मिला है
  • बयाना का युद्ध 16 फरवरी 1527 को राणा सांगा और बाबर के मध्य लड़ा गया — इसमें राणा सांगा विजयी हुए
  • खानवा का युद्ध 17 मार्च, 1527 को राणा सांगा व बाबर के मध्य लड़ा गया — बाबर की विजय हुई — इस युद्ध को राजस्थान के इतिहास का निर्णायक युद्ध माना जाता है
  • बयाना दुर्ग (भरतपुर) का निर्माण यादव राजवंश के महाराजा विजयपाल द्वारा दमदमा पहाड़ी पर लगभग 1040 ई. में कराया गया
  • कंवर मदन सिंह को करौली का भीष्म पितामह कहा जाता है — इन्होंने 1915 में बेगारी विलाप नामक पुस्तक लिखी थी
  • करौली शहर की स्थापना अर्जुनपाल द्वारा की गई थी

रणथम्भौर से संबंधित तथ्य

  • रणथम्भौर का युद्ध 11 जुलाई 1301 को हम्मीरदेव और अलाउद्दीन खिलजी के मध्य लड़ा गया — अलाउद्दीन खिलजी विजयी हुआ — रंगदेवी के नेतृत्व में जौहर हुआ
  • अलाउद्दीन खिलजी का इतिहासकार अमीर खुसरो रणथम्भौर युद्ध में उपस्थित था
  • अकबर ने रणथम्भौर दुर्ग में टकसाल स्थापित करवाई
  • रणथम्भौर का दुर्ग यूनेस्को की विश्व सांस्कृतिक धरोहर में शामिल है
  • रणथम्भौर का दुर्ग एरण श्रेणी का है — अबुल फजल ने इस दुर्ग के बारे में कहा था कि "बाकी सभी दुर्ग नंगे हैं, जबकि यह एकमात्र बख्तरबंद दुर्ग है"

कोटा एवं झालावाड़ से संबंधित तथ्य

  • माधोसिंह प्रथम कोटा राज्य के संस्थापक थे
  • भील शासक 'कोटिया' के नाम पर कोटा का नाम कोटाह (कोटा) रखा गया
  • उम्मेदसिंह द्वितीय को 'कोटा का शाहजहाँ' तथा 'आधुनिक कोटा का निर्माता' कहा जाता है
  • कोटा प्रजामंडल की स्थापना 1939 में हुई थी — इसके संस्थापक पंडित नयनूराम शर्मा थे
  • कोटा रियासत ने सर्वप्रथम दास प्रथा पर 1832 ई. में रोक लगाई थी
  • वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी (कोटा) की स्थापना वर्ष 1975 में की गई थी — यह राजस्थान की पहली ओपन यूनिवर्सिटी है
  • कोटा दुर्ग चम्बल नदी के किनारे स्थित है — 1857 ई. के विद्रोह के समय यह दुर्ग क्रांतिकारियों का प्रमुख केन्द्र रहा था — झाला हवेली इस दुर्ग में स्थित है
  • झालावाड़ नगर की स्थापना 1791 ई. में कोटा महाराजा के सेनापति जालिमसिंह झाला द्वारा की गई
  • झालावाड़ राज्य प्रजामंडल के संस्थापक कन्हैयालाल मित्तल थे
  • कोलवी की गुफाएँ झालावाड़ में स्थित हैं — यह बौद्ध धर्म से संबंधित हैं — इनको राजस्थान की अजन्ता-एलोरा गुफाएँ भी कहा जाता है
  • कोणार्क के सूर्य मंदिर की तर्ज पर राजस्थान में झालरापाटन, झालावाड़ में सूर्य मंदिर का निर्माण किया गया
  • बारां में स्थित काकुनी का मंदिर 108 मंदिरों का समूह है
  • बारां जिले में स्थित सीताबाड़ी में सहरिया जनजाति का कुंभ लगता है
  • बारां जिले के भंडदेवरा में पंचायतन शैली एवं खजुराहो शैली में मंदिर बनाए गए हैं — इनका निर्माण चौहान राजा मलयवर्मा ने 10वीं शताब्दी में करवाया गया

बीकानेर से संबंधित तथ्य

  • राव बीका को बीकानेर का संस्थापक माना जाता है
  • राव बीका के पुत्र राव लूणकरण जो दानी शासक के रूप में प्रसिद्ध हैं को 'कलयुग का कर्ण' कहा गया है
  • महाराजा गंगासिंह एकमात्र राजस्थानी राजा थे जिन्होंने तीनों गोलमेज सम्मेलन (1930-32) में भाग लिया था
  • बीकानेर के कतरियासर जसनाथी सम्प्रदाय का उत्पत्ति स्थल है — यहाँ जसनाथी सम्प्रदाय के अनुयायियों द्वारा 'अग्नि नृत्य' किया जाता है
  • 1927 ई. में महाराजा गंगासिंह द्वारा गंगनहर का निर्माण करवाया गया
  • बीकानेर के शासक महाराजा गंगासिंह द्वारा गंगानगर बसाया गया था
  • हनुमानगढ़ जिला प्राचीन यौद्धेय प्रदेश का हिस्सा था
  • 1805 में बीकानेर के राजा सूरतसिंह ने भटनेर पर आक्रमण कर जीतने के बाद इसका नाम हनुमानगढ़ रखा था
  • भटनेर के दुर्ग का निर्माण भाटी राजा भूपत ने 285 ई. में कराया था — इसका वास्तुकार ककैया था
  • भटनेर के किले के संबंध में तैमूर लंग ने 'तुजुक-ए-तैमूरी' में लिखा है कि "सामरिक दृष्टि से इतना मजबूत और सुरक्षित किला मैंने भारत में कहीं नहीं देखा"

जैसलमेर से संबंधित तथ्य

  • जैसलमेर नगर के संस्थापक राव जैसलदेव भाटी थे
  • जवाहर सिंह को आधुनिक जैसलमेर का निर्माता कहा जाता है
  • सागरमल गोपा जैसलमेर के प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे — उन्होंने जैसलमेर का गुंडाराज, आजादी के दीवाने, रघुनाथ सिंह का मुकदमा नामक ग्रंथ लिखे — इनकी हत्याकांड की जाँच के लिए गोपालस्वरूप पाठक समिति का गठन किया गया था
  • जैसलमेर प्रजामंडल की स्थापना 1945 में जोधपुर में मीठालाल व्यास ने की
  • जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा जल संग्रहण हेतु अपनाई गई तकनीक खड़ीन कहलाती है
  • प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता के क्षेत्र रहे वर्तमान जैसलमेर जिले का भू-भाग प्राचीन काल में भाड़घरो/वल्लमंडल नाम से जाना जाता था
  • राजस्थान में प्रसिद्ध लैला-मजनूँ की मजार भारत-पाकिस्तान सीमा पर बिंजोर गाँव (अनूपगढ़) में स्थित है — इस मजार पर प्रतिवर्ष 15 जून को मेला लगता है, जिसे 'मोहब्बत का मेला' कहा जाता है

पाली से संबंधित तथ्य

  • पाली का प्राचीन नाम पालिका था — पाली पालीवाल ब्राह्मणों का निवास स्थान था
  • पाली बांडी नदी के किनारे स्थित है
  • हवेनसांग द्वारा पाली और जालौर क्षेत्र को 'गुर्जर प्रदेश' कहा गया है
  • पाली जिले के पादरला गाँव का तेरहताली लोकनृत्य देश-विदेश में प्रसिद्ध है

जालौर से संबंधित तथ्य

  • जालौर के चौहान वंश की स्थापना कीर्तिपाल द्वारा की गई
  • जालौर का युद्ध 1311 ई. में कान्हड़देव और अलाउद्दीन खिलजी के मध्य लड़ा गया — अलाउद्दीन विजयी रहा और उसने जालौर का नाम बदलकर जललाबाद रखा
  • जहाजपुर एक 'महाभारत कालीन' स्थल है — यहाँ से 'महाभारत कालीन शिलालेख' मिला है

सिरोही से संबंधित तथ्य

  • सिरोही का प्राचीन नाम शिवपुरी था — सिरोही पर सर्वप्रथम परमार शासकों का शासन था — परमारों की राजधानी चंद्रावती थी
  • सिरोही में समप सभा की स्थापना 1883 में गोविंद गुरु के नेतृत्व में हुई थी
  • सिरोही प्रजामंडल की स्थापना गोकुलभाई भट्ट द्वारा 1939 में की गई थी
  • दिलवाड़ा जैन मंदिर का निर्माण 1031 ई. में बिमलशाह द्वारा करवाया गया था — यह आदिनाथ जैन का मंदिर है — इसका शिल्पी कीर्तिधर था
  • माउंट आबू को राजस्थान का शिमला कहा जाता है
  • सांचोर राजस्थान का पंजाब कहलाता है
  • राजस्थान के सिरोही के हाथल गाँव में जन्मे गोकुल भाई भट्ट को राजस्थान का गांधी कहा जाता है

उदयपुर (मेवाड़) से संबंधित तथ्य

  • महाराणा उदयसिंह ने उदयपुर की स्थापना की थी
  • एकलिंग जी का मंदिर कैलाशपुरी (उदयपुर) में स्थित है — इसका निर्माण 1734 ई. में बप्पा रावल ने करवाया था — एकलिंगजी को 'मेवाड़ के राजा' कहते हैं
  • चित्तौड़गढ़ पर गुहिल एवं सिसोदिया वंश का अधिकार रहा — गुहिल राजवंश को विश्व का सबसे प्राचीन राजवंश माना जाता है
  • मेवाड़ी राजाओं को 'हिन्दुआ सूरज' कहते थे
  • कीर्ति स्तम्भ व विजय स्तम्भ चित्तौड़गढ़ में स्थित हैं — कीर्ति स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुम्भा ने सारंगपुर विजय की स्मृति में 1440-1448 ई. में करवाया था — यह स्तम्भ विजय स्तम्भ के नाम से भी जाना जाता है — इसकी ऊँचाई 122 फुट है और यह 9 मंजिला है
  • मलिक मोहम्मद जायसी के महाकाव्य 'पद्मावत' में चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का चित्रण किया गया है
  • रानी पद्मिनी चित्तौड़ के शासक रावल रतनसिंह की पत्नी थीं
  • 26 अगस्त, 1303 को अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण किया था — रावल रतनसिंह युद्ध में लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए व रानी पद्मिनी ने जौहर किया था
  • मेवाड़ के राणा राजसिंह ने राजनगर कस्बे की स्थापना की थी जिसको वर्तमान समय में राजसमंद कहते हैं
  • राजसमंद जिले का नाम महाराणा राजसिंह द्वारा निर्मित प्रसिद्ध झील राजसमंद के नाम पर रखा गया था
  • वर्ष 1938 में माणिक्यलाल वर्मा द्वारा उदयपुर प्रजामंडल की स्थापना की गई थी — बलवंत राय मेहता इसके अध्यक्ष थे
  • महाराणा प्रताप हवाई अड्डा डबोक, उदयपुर में स्थित है
  • बिजौलिया किसान आंदोलन मेवाड़ राज्य में किसानों द्वारा सन् 1897 ई. में किया गया था — वर्तमान समय में बिजौलिया राजस्थान के 'भीलवाड़ा जिले' में स्थित है
  • प्रतापगढ़ पर लगभग आठ सौ सालों तक सिसोदिया वंश के शासकों का शासन रहा
  • प्रतापगढ़ प्रजामंडल की स्थापना अमृतलाल पाठक व चुन्नीलाल द्वारा 1945 में की गई
  • प्रतापगढ़ का प्राचीन नाम कांठल — माही नदी के काँठे (किनारे) स्थित होने के कारण प्रसिद्ध हुआ — प्रतापगढ़ बाँसवाड़ा के मध्य के भू-भाग को छप्पन का मैदान कहते हैं

जोधपुर से संबंधित तथ्य

  • राजस्थान में जोधपुर शहर को 'नीला शहर' कहा जाता है
  • रावण मंदिर मंडोर, जोधपुर में स्थित है — यह उत्तर भारत का एकमात्र रावण मंदिर है
  • अमृता देवी के नेतृत्व में वृक्षों की रक्षा के लिए इनकी 3 पुत्रियों सहित 363 लोगों ने महाराजा अभयसिंह के शासन काल में बलिदान दिया था
  • आई माता सिरवी जाति की कुलदेवी हैं — इनका प्रसिद्ध मंदिर बिलाड़ा, जोधपुर में स्थित है
  • सिवाणा दुर्ग दो साकों के लिए प्रसिद्ध है — सिवाणा में पहला साका 1308 ई. में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय हुआ था — दूसरा साका कल्लाजी राठौड़ के समय अकबर के आक्रमण के समय हुआ था
  • प्रख्यात परमार राजा धरणीधर के पुत्र, बाघभट्ट/बाहड़राव को बाड़मेर नगर बसाने का श्रेय जाता है
  • बाड़मेर जिले में स्थित किराडू राजस्थान का खजुराहो के नाम से प्रसिद्ध है

ओझियाना व अन्य सभ्यताओं से संबंधित तथ्य

  • ओझियाना सभ्यता भीलवाड़ा जिले के बदनौर के पास खारी नदी के तट पर स्थित है — यह स्थल 'ताम्रयुगीन आहड़ संस्कृति' से संबंधित है — इस सभ्यता का काल 2500 ईसा पूर्व से 1500 ईसा पूर्व तक माना जाता है
  • गणेश्वर सभ्यता को ताम्रयुगीन सभ्यता की जननी कहा जाता है
  • राजस्थान में अशोक का अभिलेख बैराठ से प्राप्त हुआ था

राजस्थान — विविध महत्वपूर्ण तथ्य

  • 33 करोड़ देवी-देवताओं का गद्दी मंडोर में स्थित है
  • उमदे जैसलमेर के भाटी राजा लूणकरण की पुत्री तथा मालदेव की पत्नी थीं जो नाराज होकर तारागढ़ (अजमेर) चली गईं और इतिहास में 'रूठी रानी' के रूप में प्रसिद्ध हुईं
  • डीग के जल महलों की नगरी रोमांचक है — यह महाराजा सूरजमल द्वारा बनवाए गए जल महलों के लिए विख्यात है
  • मोहनलाल सुखाड़िया को आधुनिक राजस्थान का निर्माणकर्ता कहा जाता है
  • दामोदर लाल व्यास 'राजस्थान के लौह पुरुष' माने जाते हैं
  • खयाल परमार राजा धरणीधर के पुत्र, प्रसिद्ध परमार राजा धरणीधर के पुत्र बाघभट्ट/बाहड़राव को बाड़मेर नगर बसाने का श्रेय जाता है
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