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मेवाड़ का गुहिल/सिसोदिया वंश - सम्पूर्ण इतिहास

1 min read 157 views 03 Sep 2026 Rajasthan GK ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
मेवाड़ के गुहिल वंश का सम्पूर्ण इतिहास — गुहिल से लेकर महाराणा अमरसिंह द्वितीय तक। राजपूतों की उत्पत्ति के सिद्धांत, बप्पा रावल, राणा हम्मीर, राणा कुम्भा, राणा सांगा, राणा प्रताप एवं अन्य प्रमुख शासकों की जानकारी RPSC/RAS परीक्षा हेतु।
Key Points
  • राजपूतों की उत्पत्ति के चार प्रमुख सिद्धांत — अग्निकुंड, विदेशी, क्षत्रिय और मिश्रित उत्पत्ति
  • गुहिल वंश के संस्थापक गुहिल ने 565 ई. में नागदा को राजधानी बनाकर मेवाड़ राज्य की स्थापना की
  • बप्पा रावल (कालभोज) ने 734 ई. में मेवाड़ राज्य की नींव डाली — इतिहासकार वैद्य ने इन्हें 'चार्ल्स मार्टेल' कहा
  • राणा कुम्भा (1433-68 ई.) ने चित्तौड़ में 122 फुट ऊँचे विजय स्तम्भ का निर्माण करवाया — इसे भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष कहते हैं
  • खानवा का युद्ध (1527 ई.) में राणा सांगा और बाबर के बीच हुआ — तुलुगमा युद्ध पद्धति से राजपूत पराजित हुए
  • राणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को कुम्भलगढ़ में हुआ — हल्दीघाटी युद्ध 18 जून 1576 को लड़ा गया
  • मेवाड़-मुगल संधि 5 फरवरी 1615 ई. को अमर सिंह प्रथम और जहाँगीर के बीच हुई

राजपूत राज्य — परिचय

हर्ष की मृत्यु (647 ई.) के पश्चात् राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में राजपूतों की सत्ता स्थापित हुई। सातवीं सदी से बारहवीं सदी तक के इतिहास को राजपूत काल के नाम से जाना जाता है।

राजपूतों की उत्पत्ति — प्रमुख सिद्धांत

सिद्धांतप्रमुख समर्थकमत
अग्निकुंड सिद्धांतचंदरबरदाई (पृथ्वीराज रासो)आबू पर्वत के यज्ञ से परमार, चौहान, चालुक्य, प्रतिहार वंश उत्पन्न हुए
विदेशी उत्पत्तिकर्नल जेम्स टॉड, वी.ए. स्मिथराजपूत शकों, पह्लवों व हूणों के वंशज हैं
प्राचीन क्षत्रिय उत्पत्तिडॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझाराजपूत सूर्य व चंद्र वंशीय प्राचीन क्षत्रियों की संतान हैं
मिश्रित उत्पत्तिडी.पी. चट्टोपाध्यायराजपूत विदेशी एवं प्राचीन क्षत्रियों दोनों की संतान हैं

मेवाड़ का गुहिल/सिसोदिया वंश

राजस्थान में सर्वप्रथम स्थापित होने वाला राजवंश गुहिल वंश है। इसे गुहिलोत, गोहिल्स, गोहिल, गोमिल भी कहा जाता है। उदयपुर के महाराणा आज भी 'हिन्दुआ सूरज' कहलाते हैं।

गुहिल (संस्थापक)

  • गुहादित्य/गुहिल वंश का संस्थापक
  • भगवान राम के पुत्र कुश का वंशज माना जाता है
  • आनंदपुर (गुजरात) का निवासी
  • 565 ई. में नागदा (उदयपुर) को अपनी राजधानी बनाकर स्वतंत्र राज्य की स्थापना की
  • पिता: शिलादित्य | माता: पुष्पावती

बप्पा रावल (काल भोज)

  • मूल नाम: कालभोज | उपाधि: बप्पा
  • हारित ऋषि के शिष्य | 734 ई. में मेवाड़ राज्य की नींव डाली
  • कैलाशपुरी में एकलिंग मंदिर का निर्माण करवाया
  • एकलिंगजी के पास इनकी समाधि 'बप्पा रावल' नाम से प्रसिद्ध है
  • इतिहासकार सी.वी. वैद्य ने बप्पा को 'चार्ल्स मार्टेल' कहा है

अल्लट (आलूराव)

  • बप्पा रावल के वंशज
  • आहड़ को दूसरी राजधानी बनाया
  • मेवाड़ में सर्वप्रथम नौकरशाही का गठन किया
  • हूण राजकुमारी हरियादेवी से विवाह किया
  • आहड़ में वाराह मंदिर का निर्माण करवाया

क्षेमसिंह

गुहिल शासक क्षेमसिंह (रणसिंह) ने मेवाड़ की रावल शाखा को जन्म दिया।

जैत्रसिंह (1213-53 ई.)

  • तुर्क शासक इल्तुतमिश के नागदा आक्रमण (1222-29 ई.) का सफल प्रतिरोध किया
  • सन् 1248 ई. में सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद को हराया
  • इनके वंशज कुम्भकरण ने नेपाल में इस वंश की नींव डाली
  • जैत्र सिंह के समय को 'मध्यकालीन मेवाड़ के इतिहास का स्वर्णकाल' कहा जाता है

तेजसिंह (1253-67 ई.)

  • महाराजाधिराज, परमेश्वर व परमभट्टारक उपाधियाँ धारण कीं
  • इनके शासनकाल में 'श्रावक प्रतिक्रमण सुत्रचूर्णि' पुस्तक की रचना हुई
  • इनकी रानी जयवल्ली देवी ने चित्तौड़ में श्याम पार्श्वनाथ के मंदिर का निर्माण करवाया

राणा हम्मीर (1326-64 ई.)

  • सिसोदा गाँव के जागीरदार राणा अरिसिंह का पुत्र
  • मालदेव सोनगरा एवं उसके पुत्र जैसा (जालौर) को हराकर चित्तौड़ को पुनः जीता
  • हम्मीर सिसोदिया वंश का संस्थापक तथा मेवाड़ का उद्धारक माना जाता है
  • हम्मीर को कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति में वीर राजा व विषमघाटी पंचानन कहा गया है

क्षेत्रसिंह (1364-82 ई.)

  • हम्मीर के पश्चात् उसका पुत्र खेता उर्फ क्षेत्रसिंह मेवाड़ का शासक बना
  • अजमेर, जहाजपुर, माण्डल और छपन को अपने साम्राज्य में मिलाया

राणा लाखा (राणा लक्ष्मीसिंह, 1382-1421 ई.)

  • जावर में चाँदी की खानों का पता लगाया
  • एक बंजारे पिच्छू ने पिछोला झील का निर्माण करवाया
  • मारवाड़ के शासक राव चूड़ा की पुत्री हंसाबाई से विवाह किया

कुम्भा (कुम्भकर्ण, 1433-68 ई.)

  • मेवाड़ के महानतम शासक | मोकल के ज्येष्ठ पुत्र | माता: सौभाग्यदेवी
  • कुम्भा की उपाधियाँ: अभिनव भरताचार्य, हिन्दू सुरताण, छापगुरु, दानगुरु, शैलगुरु, राजगुरु, टोडरमल, हाल गुरु (गिरि, दुर्ग का स्वामी), राणों रासों (विद्वानों का आश्रय दाता)
  • गुजरात के पाँच शासकों को हराया
  • माण्डू युद्ध (1437 ई.) में मालवा के महमूद खिलजी प्रथम को हराया
  • विजय स्तम्भ (चित्तौड़, 122 फुट, 9 मंजिला) का निर्माण करवाया — 'भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष' एवं 'हिन्दू-देवताओं का अजायबघर' कहा जाता है
  • विजय स्तम्भ की प्रशस्ति का लेखक: कवि अत्रि भट्ट और उसके पुत्र महेश भट्ट
  • रणकपुर मंदिर का प्रधान शिल्पी: दैपाक
  • मेवाड़ की रक्षा पंक्ति के 84 दुर्गों में से 32 दुर्गों का निर्माण करवाया
  • कुम्भा की हत्या 1468 ई. में उसके पुत्र उदा (दत्तकरण) ने की

राणा रतनसिंह (1302 ई.)

  • समरसिंह का पुत्र
  • 1303 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया
  • रतन सिंह की पत्नी पद्मिनी के नेतृत्व में राजपूत महिलाओं ने जौहर किया — यह चित्तौड़ का प्रथम साका था
  • अलाउद्दीन ने चित्तौड़ का नाम खिज्राबाद रखा
  • मलिक मुहम्मद जायसी ने पद्मावत ग्रंथ में पद्मिनी व रतनसिंह की प्रेमकथा का वर्णन किया है

मोकल (1421-33 ई.)

  • बारह वर्ष की आयु में मेवाड़ का शासक बना
  • सिमिद्धेश्वर मंदिर की जीर्णोद्धार करवाया (निर्माण: परमार शासक राजा भोज ने)
  • मोकल की हत्या उसके भाई छाहड़ा और मेड़ा नामक सामंतों ने 1433 ई. में की

रायमल

  • उदा की मृत्यु के बाद रायमल मेवाड़ का शासक बना
  • एकलिंग मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया
  • 1509 में स्वास्थ्य खराब होने के कारण मृत्यु हुई

राणा सांगा / संग्राम सिंह

राणा सांगा रायमल के सबसे छोटे पुत्र थे। 1508 ई. में रायमल के मरने के बाद मेवाड़ी सामंतों ने सांगा को मेवाड़ की गद्दी पर बिठाया।

प्रमुख युद्ध

  • मालवा व गुजरात से युद्ध: सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय को 1518 में गागरोन के युद्ध में पराजित कर बंदी बनाया
  • इब्राहिम लोदी से युद्ध: खातोली/बटोली (1517 ई.) एवं बाड़ी (1519 ई.) के युद्धों में इब्राहिम लोदी पराजित हुआ
  • खानवा का युद्ध (1527 ई.): बाबर और राणा सांगा के बीच — धर्म युद्ध (जिहाद) का नाम दिया गया। 17 मार्च, 1527 को लड़ा गया। तुलुगमा पद्धति के कारण राजपूत सेना की हार हुई। राणा सांगा को युद्ध से बाहर निकालकर बसवा ले जाया गया। 30 जनवरी, 1528 को कालपी में सरदारों द्वारा विष दिए जाने के कारण बसवा (दीसा) में राणा सांगा की मृत्यु हो गई

राणा सांगा के उत्तराधिकारी

  • रतन सिंह (1528-32), विक्रमादित्य (1532-36), बनवीर (1536-37) मेवाड़ के शासक बने
  • बनवीर ने 1536 में मेवाड़ की गद्दी पर कब्जा किया

उदय सिंह

  • स्वामिभक्त पन्ना धाय ने अपने पुत्र चंदन की बलिदान देकर उदय सिंह की जीवन रक्षा की
  • सन् 1544 ई. में शेरशाह के चित्तौड़ आक्रमण के समय अधीनता स्वीकार कर संधि कर ली
  • 1567-68 में अकबर द्वारा चित्तौड़ पर आक्रमण के समय जयमल राठौड़ (मेड़ता) व फत्तासिंह सिसोदिया को सौंपकर चला गया
  • 1568 में अकबर ने चित्तौड़ पर कब्जा किया — तीसरा साका — जयमल व फत्ता शहीद हुए, फूलकंवर के नेतृत्व में जौहर हुआ
  • अकबर ने जयमल व फत्ता की वीरता से प्रभावित होकर आगरे के किले के दरवाजे पर इनकी पाषाण मूर्तियाँ स्थापित करवाईं

राणा प्रताप

  • जन्म: 9 मई, 1540 ई. | कुम्भलगढ़ दुर्ग
  • उपनाम: मेवाड़ केसरी, हल्दीघाटी का शेर, राणा कीका (छोटा बच्चा)
  • सिंहासन पर: 28 फरवरी, 1572 ई. | राज्याभिषेक: कुम्भलगढ़
  • अकबर ने 1572-76 ई. के बीच चार दूतमंडल भेजे — जलाल खाँ, मानसिंह, भगवानदास, टोडरमल
  • हल्दीघाटी युद्ध (18 जून, 1576 ई.): अकबर की सेना का नेतृत्व मानसिंह व आसफ खाँ ने किया। युद्ध में वफादार घोड़े चेतक का पैर टूटा जिससे मृत्यु हुई। चेतक की समाधि बनाई गई है
  • कर्नल टॉड ने हल्दीघाटी को 'मेवाड़ के इतिहास की थर्मोपल्ली' कहा है
  • भामाशाह ने महाराणा प्रताप को 'मेवाड़ का उद्धारक' तथा 'दानवीर' कहा जाता है
  • मृत्यु: 19 जनवरी, 1597 ई. | आयु: 57 वर्ष | धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते समय आंतरिक चोट से

राणा अमर सिंह प्रथम

  • राणा प्रताप के पुत्र
  • बादशाह जहाँगीर ने 8 नवम्बर, 1613 ई. को अमेजर पहुँचकर आक्रमण किया
  • 5 फरवरी, 1615 ई. को मुगलों से संधि — मेवाड़-मुगल संधि के नाम से जाना जाता है
  • कला व साहित्य में प्रगति के कारण अमर सिंह के काल को 'राजपूत काल का अभ्युदय' कहा जाता है
  • मृत्यु: 26 जनवरी, 1620 ई. | उदयपुर में

महाराणा कर्ण सिंह

  • अमर सिंह के पुत्र
  • जहाँगीर के विरुद्ध विद्रोह करने वाले खुर्रम (शाहजहाँ) को इनके पास 1622 ई. में छिपाया
  • पिछोला झील में जगमंदिर महल का निर्माण शुरू किया (1628 ई.), जिसे पुत्र जगत सिंह प्रथम ने पूरा करवाया

महाराणा जगतसिंह प्रथम

  • जगन्नाथ राय (जगदीश) मंदिर का निर्माण करवाया — 13 मई, 1652 ई. को प्रतिष्ठा
  • लेखक: अर्जुन की निगरानी में | शिल्पी: भाणा व उसके पुत्र मुकुन्द
  • पिछोला में मोहनमंदिर और रंगसागर तालाब का निर्माण करवाया

महाराणा राजसिंह

  • राजसमंद झील का निर्माण (गोमती नदी पर)
  • किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमती (रूपसिंह की बहन) से विवाह किया — औरंगजेब स्वयं विवाह करना चाहता था
  • औरंगजेब के जजिया कर लगाने के निर्णय को नहीं माना
  • श्रीनाथजी की मूर्ति को सिंहाड़ में प्रतिष्ठित करवाया
  • उदयपुर में अम्बामाता और काँकरोली धारकाढ़ी के मंदिर बनवाए
  • राजसमंद के पास राजनगर कस्बा बसाया

महाराणा जयसिंह प्रथम

  • 1687 ई. में गोमती, झामरी, रूपारेल एवं बागार नदियों के पानी को रोककर देवर नाके पर जयसमंद झील का निर्माण शुरू, 1691 ई. में तैयार हुई
  • इसे देबर झील भी कहते हैं

महाराणा अमरसिंह द्वितीय

  • बाड़ व प्रतापगढ़ को पुनः अपने अधीन किया
  • जोधपुर तथा आमेर के मुगलों से मुक्त कराकर क्रमशः अजीत सिंह और सवाई जयसिंह को वापस शासक बनने में मदद की
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