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केंद्र-राज्य संबंध: विधायी शक्तियाँ व अनुसूचियाँ

1 min read 119 views 02 Sep 2026 Indian GK ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
भारतीय संविधान के भाग 11 में वर्णित केंद्र-राज्य संबंधों के तहत महत्वपूर्ण अनुच्छेद और सातवीं अनुसूची की तीनों सूचियों (संघ, राज्य, समवर्ती सूची) के विषयों का संपूर्ण प्रामाणिक विवरण।
Key Points
  • संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन सातवीं अनुसूची के माध्यम से किया गया है.
  • संघ सूची के विषयों पर कानून बनाने की अनन्य शक्ति देश की संसद के पास है, जिसमें वर्तमान में 100 विषय हैं.
  • राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार राज्य विधानमंडल को है, जिसमें वर्तमान में 61 विषय शामिल हैं.
  • समवर्ती सूची में शिक्षा, वन, विवाह और जनसंख्या नियंत्रण जैसे कुल महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं, जिन पर केंद्र व राज्य दोनों कानून बना सकते हैं.
  • यदि समवर्ती सूची के किसी विषय पर केंद्र और राज्य के कानूनों में टकराव होता है, तो संसद का कानून प्रभावी माना जाता है.
  • अनुच्छेद 248 के अनुसार अवशिष्ट शक्तियां (जो तीनों सूचियों में शामिल नहीं हैं) पूरी तरह से केंद्र सरकार (संसद) के पास सुरक्षित हैं.
  • अनुच्छेद 263 के तहत राज्यों के आपसी और केंद्र-राज्य विवादों के समाधान के लिए अंतर्राज्यीय परिषद का प्रावधान है.

केंद्र-राज्य संबंध: संवैधानिक प्रावधान (Center-State Relations)

भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों में केंद्र और राज्यों के बीच विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय संबंधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है ताकि देश के संघीय ढांचे (Federal Structure) को सुदृढ़ रखा जा सके.

विधायी संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण अनुच्छेद (Quick Table)

अनुच्छेद संवैधानिक प्रावधान / विधायी शक्ति का विवरण
अनुच्छेद 246 संसद को सातवीं अनुसूची की सूची-1 (संघ सूची) में प्रगणित विषयों पर विधि (कानून) बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है.
अनुच्छेद 248 अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers) पूरी तरह से संसद के पास निहित हैं.
अनुच्छेद 249 राज्य सूची के किसी विषय के सम्बन्ध में राष्ट्रीय हित (National Interest) में विधि बनाने की संसद की विशेष शक्ति.
अनुच्छेद 250 यदि देश में आपातकाल (Emergency) की उद्घोषणा प्रवर्तन में हो, तो राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने की संसद की शक्ति.
अनुच्छेद 252 दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर उनकी सहमति से उन राज्यों के लिए विधि बनाने की संसद की शक्ति.
अनुच्छेद 257 संघ की कार्यपालिका कतिपय मामलों में किसी राज्य सरकार को आवश्यक निर्देश दे सकती है.
अनुच्छेद 257 क केंद्र सरकार द्वारा राज्यों की सहायता के लिए संघ के सशस्त्र बलों या अन्य बलों का अभिनियोजन (तैनाती) करना.
अनुच्छेद 263 राज्यों व केंद्र के मध्य बेहतर समन्वय के लिए 'अंतर्राज्यीय परिषद्' (Inter-State Council) के गठन का प्रावधान.

सातवीं अनुसूची के अंतर्गत शक्तियों का विभाजन

संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत केंद्र और राज्यों के बीच विषयों को तीन अलग-अलग सूचियों में विभाजित किया गया है:

1. संघ सूची (Union List — सूची-I)

  • यह सातवीं अनुसूची की सूची-1 है, जिसमें सामान्यतः राष्ट्रीय महत्व के विषयों को रखा गया है. इन विषयों पर कानून बनाने का अनन्य अधिकार केवल देश की संसद को प्राप्त है.
  • विषयों की संख्या: इस सूची में मूल रूप से कुल 97 विषय थे, परंतु वर्तमान में गणना की दृष्टि से इसमें कुल 100 विषय शामिल हैं.
  • 88वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2003: इस संशोधन द्वारा संघ सूची में तीन नए विषयों को सम्मिलित किया गया था:
    1. अंतर्राज्यीय व्यापार के दौरान समाचार पत्रों से भिन्न माल के क्रय या विक्रय पर कर (प्रविष्टि क्रमांक-92क).
    2. अंतर्राज्यीय व्यापार के दौरान माल के पारेषण (Transportation) पर कर (प्रविष्टि क्रमांक-92ख).
    3. सेवाओं पर कर (प्रविष्टि क्रमांक-92ग).
  • संघ सूची के प्रमुख विषय: प्रतिरक्षा (Defence), विदेशी मामले, नागरिकता, संचार (डाक व तार), परमाणु ऊर्जा, युद्ध और शांति, खनिज, बीमा, प्रत्यर्पण, शेयर बाजार, संधि और करार, रेलवे, समुद्री व हवाई मार्ग, बंदरगाह, बैंक, विदेशी व्यापार, जनगणना, डाकघर बचत बैंक, स्टॉक एक्सचेंज, मुद्रा (Currency), विदेशी ऋण, रिजर्व बैंक, आयकर (कृषि से भिन्न), सीमा शुल्क व निर्यात शुल्क, निगम कर, सेवा कर, लॉटरी आदि.

2. राज्य सूची (State List — सूची-II)

  • यह सातवीं अनुसूची की सूची-2 है, जिसके अंतर्गत स्थानीय महत्व या प्रादेशिक महत्व के विषयों को रखा गया है. इन विषयों पर विधि बनाने का सामान्य अधिकार राज्य विधानमण्डल को प्राप्त है, परंतु कुछ विशेष परिस्थितियों में संसद भी इस पर कानून बना सकती है.
  • विषयों की संख्या: इस सूची में मूल रूप से कुल 66 प्रविष्टियाँ थीं, किंतु 7वें संविधान संशोधन द्वारा प्रविष्टि 36 तथा 42वें संविधान संशोधन द्वारा प्रविष्टि-11, 19, 20 तथा 29 को हटा दिया गया. वर्तमान में गणना की दृष्टि से इसमें कुल 61 विषय हैं (यद्यपि अंतिम प्रविष्टि का संख्यांक 66 ही है).
  • राज्य सूची के प्रमुख विषय: लोक व्यवस्था (Public Order), पुलिस (रेल व ग्राम पुलिस सहित), कारागार, भूमि, स्थानीय स्वशासन, प्रादेशिक लोक सेवा, लोक स्वास्थ्य, बाजार एवं मेले, सट्टा व जुआ, पशुपालन, सिंचाई, गैस, शराब, मनोरंजन, भू-राजस्व या लगान, विद्युत पर कर, पथकर (Toll Tax), प्रति व्यक्ति कर, कृषि आय पर कर, कृषि भूमि पर सम्पदा शुल्क, कृषि भूमि के उत्तराधिकार पर कर, विलासिता की वस्तुओं पर कर आदि.

3. समवर्ती सूची (Concurrent List — सूची-III)

  • यह सातवीं अनुसूची की सूची-3 है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय एवं स्थानीय दोनों प्रकार के महत्व वाले विषयों को रखा गया है.
  • विधायी अधिकार: इन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार संसद और राज्य विधानमण्डल दोनों को प्राप्त है, किंतु यदि दोनों द्वारा बनाए गए कानूनों में कोई अंतर्विरोध (Contradiction) या गतिरोध उत्पन्न होता है, तो संसद द्वारा बनाई गई विधि ही मान्य होगी.
  • समवर्ती सूची के प्रमुख विषय: दण्ड विधि (Criminal Law), प्रक्रिया विधि, शिक्षा, वन, विवाह व विवाह-विच्छेद (Talaq), कारखाने, मजदूर संघ, जनसंख्या नियंत्रण व परिवार नियोजन, न्याय प्रशासन, वृत्तियाँ (Professions), बाट-माप (मानकों को नियत करने के अलावा), स्वच्छता व औषधालय, औद्योगिक विवाद, उत्तराधिकार, विद्युत, कीमत नियंत्रण, खाद्य पदार्थों और अन्य पदार्थों का अपमिश्रण (Adulteration), वन्य जीव-जन्तुओं का संरक्षण, विधि वृत्ति, चिकित्सा वृत्तियाँ, समाचार पत्र, पुस्तकें और मुद्रणालय, सम्पत्ति का अर्जन व अधिग्रहण, आर्थिक व सामाजिक योजनाएं, जन्म-मरण पंजीकरण आदि.
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