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राजस्थान की नदियाँ व नदी घाटी परियोजनाएँ - सम्पूर्ण जानकारी

1 min read 168 views 03 Sep 2026 Rajasthan GK ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
राजस्थान की तीनों अपवाह प्रणाली की नदियाँ — बंगाल की खाड़ी, अरब सागर व आंतरिक प्रवाह — उद्गम स्थल, उपनाम, सहायक नदियाँ एवं प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं की सम्पूर्ण जानकारी RPSC, RAS, RSMSSB, Patwar, SI, REET 2026 हेतु।
Table of Contents
  1. राजस्थान की नदियाँ — परिचय
  2. बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ
  3. चम्बल नदी
  4. पार्वती नदी
  5. सोम नदी
  6. अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ
  7. माही नदी
  8. जाखम नदी
  9. लूनी नदी
  10. जवाई नदी
  11. सुकड़ी नदी
  12. पश्चिमी बनास
  13. साबरमती नदी
  14. आंतरिक प्रवाह की नदियाँ
  15. कांतली नदी
  16. काकनी/काकेनय नदी
  17. घग्घर नदी
  18. साबी नदी
  19. रूपनगढ़ नदी
  20. रूपारेल नदी
  21. मेण्या नदी
  22. प्रमुख जलप्रपात
  23. नदी घाटी परियोजनाएँ
  24. चम्बल परियोजना
  25. इंदिरा गांधी नहर परियोजना
  26. भाखड़ा नांगल परियोजना
  27. माही बजाज सागर परियोजना
  28. व्यास परियोजना
  29. नर्मदा परियोजना
  30. जवाई बांध परियोजना
  31. बीसलपुर परियोजना
  32. जाखम परियोजना
  33. सेई परियोजना
  34. पांचना परियोजना
  35. सोम-कमला-अंबा परियोजना
  36. मानसी बाकल परियोजना
  37. सिंचाई परियोजनाओं का संक्षिप्त परिचय
Key Points
  • चम्बल नदी उपनाम चर्मण्वती/कामधेनु — उद्गम जानापाव पहाड़ी मध्य प्रदेश — राजस्थान में 1051 किमी लम्बाई
  • माही नदी उपनाम कांठल की गंगा/आदिवासियों की गंगा — कर्क रेखा को दो बार काटती है — माही बजाज सागर बांध राजस्थान का सबसे लम्बा बांध (3109 मीटर)
  • इंदिरा गांधी नहर — हरिके बैराज से — 2 नवम्बर 1984 को नाम बदला — लम्बाई 649 किमी — राजस्थान की मरुगंगा
  • घग्घर नदी — मृत नदी — उद्गम शिमला — राजस्थान में हनुमानगढ़ से प्रवेश
  • कांतली नदी — आंतरिक प्रवाह की सबसे लम्बी नदी (100 किमी) — बहाव क्षेत्र तोरावाटी
  • राणा प्रताप सागर बांध (रावतभाटा) — राजस्थान का सबसे बड़ा बांध — कनाडा के सहयोग से परमाणु बिजली घर

राजस्थान की नदियाँ — परिचय

देश में आंतरिक प्रवाह की सर्वाधिक नदियाँ राजस्थान में बहती हैं। राजस्थान में सतही नदियों का जल देश के जल का मात्र 1.16% है। राजस्थान में भूमिगत जल के आधार पर देश का मात्र 1.67% उपलब्ध है।

प्रवाह के अनुसार राजस्थान की अपवाह प्रणाली को तीन भागों में विभाजित किया गया है:

  • बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ
  • अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ
  • आंतरिक प्रवाह की नदियाँ

बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ

चम्बल नदी

  • उपनाम: चर्मण्वती, कामधेनु — बारहमासी नदी है
  • उद्गम: महू के पास जानापाव की पहाड़ी, जिला इंदौर, मध्य प्रदेश
  • यह नदी चौरासीगढ़ के निकट राजस्थान में प्रवेश करती है
  • चम्बल नदी का संगम इटावा मुरादगंज जिले यूपी में यमुना नदी में होता है
  • राजस्थान में यह रावभाटा चित्तौड़गढ़, कोटा, बूँदी, सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर जिलों में बहती है
  • राजस्थान में चम्बल नदी की कुल लम्बाई 1051 किलोमीटर
  • सहायक नदियाँ: कालीसिंध नदी, आहू नदी, पार्वती नदी, परवन नदी, भरवन नदी, मांगली नदी, मेजा नदी, बामनी नदी, घोड़ा पछाड़ नदी व बनास नदी
  • राजस्थान में चम्बल नदी पर रावतभाटा में राणा प्रताप सागर बांध, बूँदी व कोटा जिले में जवाहर सागर बांध और कोटा जिले में कोटा बैराज बांध बनाया गया है
  • चम्बल नदी विश्व की एकमात्र ऐसी नदी है जिनके 100 किमी. लम्बाई के अंतर्गत तीन बांध बनाए गए हैं और तीनों बांधों से विद्युत उत्पादन किया जाता है

पार्वती नदी

  • उद्गम: मध्य प्रदेश में विंध्य श्रेणी में सीहोर क्षेत्र से निकलकर राजस्थान में बारां में करयाहाट के निकट प्रवेश करती है
  • यह नदी बारां व कोटा में बहती हुई सवाई माधोपुर व कोटा सीमा पर पालिया गाँव के निकट चम्बल में मिल जाती है

सोम नदी

  • उद्गम: बीछामेड़ा की पहाड़ियों से होता है
  • सहायक नदियाँ: जाखम, टिड़ी व गोमती
  • सोम नदी का संगम वेणेश्वर धाम माही नदी में होता है
  • सोम नदी पर दो परियोजनाएँ बनाई गई हैं: 1. सौभाग्य योजना तथा 2. सोम कमला अंबा परियोजना — दोनों परियोजनाएँ उदयपुर में हैं

अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ

माही नदी

  • उद्गम: महेंद झील अमरोरू की पहाड़ी धार जिला, मध्य प्रदेश
  • उपनाम: कांठल की गंगा, आदिवासियों की गंगा, दक्षिण राजस्थान की गंगा
  • माही नदी का संगम खम्भात की खाड़ी में होता है
  • राजस्थान में माही नदी का प्रवेश खांदू गाँव बाँसवाड़ा से होता है
  • माही नदी का बहाव बाँसवाड़ा व डूंगरपुर जिलों में है
  • माही नदी की कुल लम्बाई 576 किमी. तथा राजस्थान में इसकी कुल लम्बाई 173 किमी. है
  • सहायक नदियाँ: ऐराव नदी, अन्नास नदी, चाप नदी, सोम नदी, जाखम नदी, मोरेन नदी
  • माही नदी उल्टे U की आकृति व A की आकृति बनाती है — माही नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है
  • माही नदी तथा जाखम नदी, सोम नदी से मिलकर वेणेश्वर धाम त्रिवेणी संगम का निर्माण करती है — वेणेश्वर धाम पर माघ पूर्णिमा को प्रत्येक वर्ष मेला लगता है जिसे आदिवासियों का कुंभ कहा जाता है
  • माही नदी के प्रवाह के स्थान को माही का मैदान, छप्पन का मैदान या भाटी का मैदान कहते हैं
  • माही नदी पर 3 बांध: 1. माही बजाज सागर बांध, बाँसवाड़ा (राजस्थान का सबसे लम्बा बांध — लम्बाई 3109 मीटर); 2. कागदी पिकअप बांध, बाँसवाड़ा; 3. कडाना बांध, गुजरात

जाखम नदी

  • उद्गम: छोटी सादड़ी प्रतापगढ़
  • यह नदी अंत में बिलाड़ा गाँव के निकट सोम नदी में मिल जाती है
  • जाखम नदी पर जाखम बांध बनाया गया है — यह प्रतापगढ़ जिले में है
  • यह राजस्थान का सबसे ऊँचा बांध है जिसकी ऊँचाई 81 मीटर है

लूनी नदी

  • उद्गम: नाग पहाड़ी अनासागर, अजमेर
  • उपनाम: सरगावती या सागरमती, लवणवती
  • इस नदी का जल बालोतरा तक मीठा है, लेकिन इसके पश्चात् इसका जल खारा हो जाता है
  • लूनी नदी का संगम कच्छ के रन में होता है
  • लूनी नदी का बहाव क्षेत्र: अजमेर, नागौर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर व जालौर जिलों में
  • लूनी नदी की कुल लम्बाई 495 किमी. तथा राजस्थान में कुल लम्बाई 330 किमी.
  • सहायक नदियाँ: वाण्डी नदी, गुहिया नदी, लीलण्ी नदी, मीठड़ी नदी, सुकड़ी नदी, जवाई नदी, खारी नदी, जोड़ड़ी नदी, सांगी नदी
  • जोधपुर के जसवंत सागर बांध (पिचियाक बांध) में पानी की आपूर्ति लूनी नदी से होती है
  • लूनी नदी को लवण्ती भी कहते हैं — जालौर में इसके बहाव को रेल/नेडा कहा जाता है
  • बालोतरा लूनी नदी के तट पर स्थित प्रमुख नगर है

जवाई नदी

  • उद्गम: गौरईया गाँव पाली से होता है
  • इस नदी का संगम बाड़मेर में होता है
  • जवाई नदी पर जवाई बाँध पाली में बनाया गया है — इसे मारवाड़ का अमृत सरोवर भी कहा जाता है
  • जवाई नदी से सेई जल सुरंग बनाई गई है जो उदयपुर-पाली को जोड़ती है — सेई जल सुरंग राजस्थान की प्रथम जल सुरंग है

सुकड़ी नदी

  • उद्गम: अरावली पर्वत शृंखला के पश्चिमी ढाल के देसूरी गाँव से होता है
  • यह नदी पाली और जालौर में प्रवाहित होती हुई बाड़मेर जिले में बेकर समदड़ी के निकट लूनी नदी में मिल जाती है
  • इस पर बागली बांध जालौर में बनाया गया है

पश्चिमी बनास

  • उद्गम: न्यासांवरा गाँव सिरोही से होता है
  • सहायक नदी: सुकली नदी, सीपू नदी, कुकड़ी नदी
  • यह नदी सिरोही में बहती हुई बनाकांठा जिले (गुजरात) में प्रवेश करती है और फिर लिटिल रन (कच्छ की खाड़ी) में विलुप्त हो जाती है
  • सिरोही की आबू नगर व गुजरात का डीसा नगर इस नदी के किनारे पर बसे हुए हैं

साबरमती नदी

  • उद्गम: पदराला की पहाड़ी, उदयपुर
  • उदयपुर जिले में कुछ दूरी तय करने के बाद यह नदी गुजरात में समग खम्भात की खाड़ी में होता है
  • सहायक नदियाँ: बेतरक नदी, सेई नदी, हथमित नदी, मेश्वा नदी मानसी/माजम नदी व वाकल नदी
  • साबरमती नदी की कुल लम्बाई 416 किमी. तथा राजस्थान में 45 किमी.
  • अहमदाबाद शहर इसी नदी के किनारे स्थित है — महात्मा गांधी का साबरमती आश्रम इसी नदी के किनारे स्थित है

आंतरिक प्रवाह की नदियाँ

कांतली नदी

  • उद्गम: सीकर जिले की खण्डेला की पहाड़ियों से निकलती है
  • इस नदी का अंतिम बिंदु झुंझुनूं की अंतिम सीमा है
  • कुल लम्बाई 100 किमी. — कांतली नदी आंतरिक पूर्ण प्रवाह की दृष्टि से सबसे लम्बी नदी है
  • कांतली नदी का बहाव क्षेत्र सीकर व झुंझुनूं जिलों के बहाव क्षेत्र को तोरावाटी कहा जाता है
  • कांतली के किनारे राजस्थान की प्राचीन गणेश्वर सभ्यता विकसित हुई थी

काकनी/काकेनय नदी

  • काकनी नदी जैसलमेर से लगभग 27 किमी. दूर दक्षिण में स्थित कोटरी की पहाड़ियों से निकलती है
  • उपनाम: मसूरड़ी नदी
  • काकनी नदी का अंतिम बिंदु मीठा खाड़ी है — काकनी नदी पर बुझ झील बनी हुई है
  • आंतरिक प्रवाह की दृष्टि से काकनी नदी सबसे छोटी नदी है

घग्घर नदी

  • उद्गम: कालका माता के मंदिर के पास, शिमला (हिमाचल प्रदेश)
  • इस नदी को मृत नदी भी कहते हैं
  • उपनाम: राजस्थान का शोक, सरस्वती नदी, नट नदी
  • राजस्थान में घग्घर नदी के बहाव को नाली/पाट व पाकिस्तान में हाकरा कहते हैं
  • राजस्थान में घग्घर नदी का प्रवेश टिब्बी नामक स्थान हनुमानगढ़ से होता है
  • यह नदी हनुमानगढ़ में बहती हुई भटनेर के पास विलुप्त हो जाती है
  • घग्घर नदी पर तलवाड़ा झील है
  • इसके मुहाने पर कालीबंगा सभ्यता (हनुमानगढ़) का विकास हुआ था

साबी नदी

  • उद्गम: सेवर की पहाड़ी
  • यह नदी बानसूर, बहरोड़, मण्डावर, किशनगढ़, तिजारा में बहने के बाद हरियाणा के पटौदी के निकट नजफगढ़ झील में मिल जाती है
  • अलवर जिले की सबसे लम्बी नदी है
  • साबी नदी के किनारे जोधपुर सभ्यता (जयपुर) विकसित हुई थी

रूपनगढ़ नदी

  • उद्गम: सलेमाबाद किशनगढ़
  • इस नदी का अंतिम बिंदु सांभर झील है

रूपारेल नदी

  • उद्गम: उदय नाथ की पहाड़ी, अलवर
  • इसे लसवारी नदी भी कहते हैं तथा स्थानीय क्षेत्र में इसे 'वराह नदी' भी कहा जाता है

मेण्या नदी

  • यह नदी जयपुर जिले के मनोहरपुर के समीप अरावली पर्वत श्रेणी के पश्चिमी ढाल से निकलती है तथा सांभर झील में गिरती है

प्रमुख जलप्रपात

  • राजस्थान में चम्बल नदी पर स्थित चूलिया जलप्रपात तथा मांगली नदी पर स्थित भीमताल जलप्रपात दो सबसे प्रमुख जलप्रपात हैं
  • चम्बल नदी पर अनेक छोटे-छोटे जलप्रपात मिलते हैं — चूलिया जलप्रपात 18 मीटर ऊँचा है
  • इसी प्रपात के सहारे चम्बल योजना के अन्तर्गत विद्युत पैदा की जाती है
  • चम्बल नदी पर स्थित चूलिया जलप्रपात पर राणा प्रताप सागर जलाशय बनाया गया है

नदी घाटी परियोजनाएँ

चम्बल परियोजना

  • चम्बल परियोजना राजस्थान तथा मध्य प्रदेश की संयुक्त परियोजना है — राजस्थान की बारहमासी तथा सबसे बड़ी नदी चम्बल पर यह परियोजना 1953-54 में शुरू की गई
  • इस परियोजना में राजस्थान तथा मध्य प्रदेश की साझेदारी 50-50 प्रतिशत है
  • केंद्रीय जल शक्ति बोर्ड ने 1950 में इस योजना को स्वीकृत किया था
  • मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील में चम्बल नदी पर 1960 में गांधी सागर बांध बनाया गया — इस बांध ने एक कृत्रिम झील का निर्माण किया है जो 600 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैली हुई है
  • तीन चरणों में पूरी हुई इस परियोजना के प्रथम चरण में गांधी सागर बांध, गांधी सागर विद्युतगृह, कोटा सिंचाई बांध (कोटा बैराज) का निर्माण तथा कोटा बैराज के दाईं तरफ नहर का निर्माण किया गया
  • द्वितीय चरण में राणा प्रताप सागर बांध, राणा प्रताप सागर विद्युतगृह का निर्माण तथा बांध की भूमिगत टनल का निर्माण किया गया
  • तृतीय चरण में जवाहर सागर बांध का निर्माण तथा जवाहर सागर विद्युतगृह का निर्माण किया गया — इस परियोजना के तीनों चरणों का निर्माण पूरा हो जाने के बाद जहाँ 386 मेगावाट विद्युत का उत्पादन हो रहा है वहीं 5.51 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई भी हो रही है

चम्बल परियोजना के प्रमुख बांध

  • गांधी सागर बांध: निर्माण मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुरा तहसील में स्थित चौरासीगढ़ दुर्ग से 8 किमी. दूर किया गया
  • राणा प्रताप सागर बांध: निर्माण चम्बल नदी पर चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा नामक स्थान पर — भराव क्षमता के अनुसार राजस्थान का सबसे बड़ा बांध है — निर्माण 1970 में पूरा — कनाडा के सहयोग से परमाणु बिजली घर की स्थापना की गई है — वर्तमान में इसकी चार इकाइयाँ कार्यरत हैं
  • जवाहर सागर बांध: निर्माण 1972 में — यह एक पिकअप बांध है — कोटा बैराज से 16 किमी. दूर — बोरावास गाँव के निकट तथा राणा प्रताप सागर बांध से 33 किमी. दूर
  • कोटा बैराज: कोटा सिंचाई बांध का निर्माण कोटा नगर के निकट चम्बल नदी पर 1954 में किया गया — इसे 'कोटा बैराज' के नाम से जाना जाता है — इस बांध से दोनों ओर सिंचाई हेतु नहरें निकाली गई हैं

इंदिरा गांधी नहर परियोजना

  • इंदिरा गांधी नहर परियोजना राजस्थान की ही नहीं बल्कि भारत की प्रमुख सिंचाई परियोजना है
  • प्रारम्भ में राजस्थान नहर परियोजना के नाम से जाना जाता था — 2 नवम्बर, 1984 को इसका नाम इंदिरा गांधी नहर परियोजना रखा गया
  • इस परियोजना को राज्य की मरुगंगा, मरुस्थल की जीवनरेखा तथा प्रदेश की जीवनरेखा भी कहा जाता है
  • इस परियोजना से मुख्य रूप से श्रीगंगानगर, चुरू, हनुमानगढ़, नागौर, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर और बाड़मेर जिले लाभान्वित हो रहे हैं
  • हरिके बांध से रामगढ़ तक इस नहर की लम्बाई 649 किमी. है

इंदिरा गांधी नहर परियोजना — एक दृष्टि में

विवरणजानकारी
उद्गमहरिके बैराज (सतलुज-व्यास संगम), पंजाब
जलापूर्तिरावी, व्यास नदी जल समझौता, 1955
पुराना नामराजस्थान नहर परियोजना
नहर का श्रीगणेश31 मार्च, 1958
उद्घाटनकर्तागोविन्द वल्लभ पंत (तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री)
योजना के चरणदो
प्रथम चरण की लम्बाई204 किलोमीटर
प्रथम चरण की हरियाणा, पंजाब में लम्बाई169 किलोमीटर
प्रथम चरण की राजस्थान में लम्बाई35 किलोमीटर
प्रथम चरण की समाप्तिमसीतांवाली (हनुमानगढ़)
प्रथम चरण में लिफ्ट नहरेंएक
प्रथम चरण का निर्माण पूर्ण1964
प्रथम चरण में वितरिकाओं की लम्बाई3075 किमी
प्रथम चरण में सिंचाई क्षमता का सृजन5.7 लाख हेक्टेयर
प्रथम चरण में व्यय राशि343 करोड़ रुपये
मुख्य नहर की शुरुआती व अंतिम बिन्दुमसीतांवाली व छतरगढ़ (बीकानेर)
मुख्य नहर की प्रथम चरण की लम्बाई189 किमी
द्वितीय चरण की लम्बाई256 किमी
द्वितीय चरण की शुरुआती व अंतिम बिन्दुछतरगढ़ व मोहनगढ़ (जैसलमेर)
द्वितीय चरण में वितरिकाओं की लम्बाई5,756 किमी
द्वितीय चरण में सिंचाई क्षमता का सृजन8.77 लाख हेक्टेयर
परियोजना की लम्बाई649 किमी (मोहनगढ़ तक)
इंदिरा गांधी नहर की गहराई6.4 मीटर
इंदिरा गांधी नहर के ऊपरी भाग की चौड़ाई67 मीटर
इंदिरा गांधी नहर के पेंदे की चौड़ाई38 मीटर
लिफ्ट नहरों की संख्या6
नहर में पानी भरने की क्षमता523 क्यूबिक मीटर
इंदिरा गांधी नहर की कुल सिंचाई संभाव्यता15.79 लाख हे.
इंदिरा गांधी नहर का 'जीरो पॉइंट'गडरा रोड (बाड़मेर)
नहर पर ऊर्जा उत्पादन केन्द्रपूगल, बरसलपुर व चारणवाला
इंदिरा गांधी नहर का उपनामभरुगंगा
सबसे लम्बी लिफ्ट नहरगंधेली साहवा लिफ्ट कैनाल

भाखड़ा नांगल परियोजना

  • यह पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान की संयुक्त परियोजना है
  • इसमें राजस्थान का हिस्सा 15.22% है
  • यह भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजना है — इसे जवाहर लाल नेहरू ने 'चमत्कारी विराट वस्तु' कहा था
  • भाखड़ा मुख्य नहर की कुल सिंचाई क्षमता 14.6 लाख हेक्टेयर है — इसमें पंजाब का हिस्सा 6.8 लाख हेक्टेयर, हरियाणा का हिस्सा 5.5 लाख हेक्टेयर तथा राजस्थान का हिस्सा 2.3 लाख हेक्टेयर है

माही बजाज सागर परियोजना

  • यह परियोजना राजस्थान तथा गुजरात की संयुक्त परियोजना है — दोनों का हिस्सा क्रमशः 45 प्रतिशत और 55 प्रतिशत है
  • यह परियोजना मध्य प्रदेश और गुजरात की सीमा से लगे राजस्थान के दक्षिणी भाग में बाँसवाड़ा जिले में माही नदी पर स्थित है
  • इस बहुउद्देशीय परियोजना को 1 जनवरी, 1986 को राष्ट्र को समर्पित किया गया था
  • इस परियोजना के द्वितीय चरण में बाँसवाड़ा जिले में बोरखेड़ा गाँव के निकट 3,109 मीटर लम्बा बांध बनाया गया है — पहला चरण सिंचाई के लिए है
  • परियोजना का दूसरा चरण सिंचाई व ऊर्जा दोनों के लिए है — इससे बाँसवाड़ा जिले के आदिवासी क्षेत्रों को बहुत लाभ हुआ है

व्यास परियोजना

  • यह राजस्थान, पंजाब तथा हरियाणा की संयुक्त परियोजना है
  • इस परियोजना में सतलुज, रावी और व्यास नदियों के जल का उपयोग होता है
  • यह परियोजना तीन चरणों में विभाजित है — प्रथम चरण में व्यास-सतलुज लिंक नहर का निर्माण किया गया था
  • द्वितीय चरण में पोंग नामक स्थान पर एक बांध और एक विद्युतगृह की स्थापना की गई है जिससे राजस्थान को सिंचाई हेतु जल एवं 150 मेगावाट विद्युत उपलब्ध कराई जा रही है
  • इस परियोजना से इंदिरा गांधी नहर परियोजना को स्थाई रूप से जल की आपूर्ति हो रही है

नर्मदा परियोजना

  • यह गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान की संयुक्त परियोजना है
  • नर्मदा के जल के उपयोग हेतु सरदार सरोवर बांध (गुजरात) से नर्मदा नहर निकाली गई है
  • इस परियोजना से जालौर तथा बाड़मेर जिले में सिंचाई होती है

जवाई बांध परियोजना

  • यह परियोजना पाली जिले में जवाई नदी पर स्थित है
  • इस परियोजना के तहत 1956 में एक बांध का निर्माण किया गया
  • इस बांध से 22 किमी. लम्बी नहर निकाली गई है जो शाखाओं तथा उपशाखाओं समेत 126 किमी. लम्बी है
  • जवाई बांध को 'मारवाड़ का अमृत सरोवर' कहा जाता है
  • इससे जालौर व पाली जिलों में सिंचाई की जाती है तथा जोधपुर व पाली जिलों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई जाती है

बीसलपुर परियोजना

  • बीसलपुर बांध बनास नदी पर टोंक जिले के टोडा रायसिंह कस्बे से 6 किमी. दूर बीसलपुर गाँव के निकट बनाया गया है
  • बीसलपुर परियोजना एक बहुउद्देशीय परियोजना है जिसका उद्देश्य टोंक, जयपुर, अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़, केकड़ी, सरवाड़ को पेयजल की आपूर्ति कराना है

जाखम परियोजना

  • इस परियोजना के अन्तर्गत एक बांध प्रतापगढ़ जिले में अनूपुरा गाँव के पास जाखम नदी पर बनाया गया है
  • जाखम परियोजना से उदयपुर और प्रतापगढ़ जिलों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो रही है
  • इस बांध पर 4.5 मेगावाट के एक विद्युतगृह का निर्माण भी कराया गया है

सेई परियोजना

  • जवाई बांध में पानी की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने 'सेई परियोजना' का निर्माण उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील में करवाया है
  • इसके अन्तर्गत सेई नदी को एक सुरंग के माध्यम से जवाई नदी में मिलाने का प्रावधान है

पांचना परियोजना

  • पांचना परियोजना करौली जिले में स्थित है
  • करौली जिले के गुढ़ला गाँव के निकट पाँच छोटी नदियों भद्रावती, बरखेड़ा, अटा, भैंसावट तथा माची के संगम पर मिट्टी का बांध बनाया गया है
  • यह मध्यम सिंचाई परियोजना है

सोम-कमला-अंबा परियोजना

  • इस परियोजना का निर्माण डूंगरपुर जिले में किया गया है
  • इसका उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना है

मानसी बाकल परियोजना

  • इस परियोजना के अन्तर्गत उदयपुर के निकट मानसी बाकल नदी पर झाड़ोल तहसील के पास गोराजा गाँव में एक बांध बनाया गया है
  • इस परियोजना की 4.6 किमी. लम्बी सुरंग से पानी अलसीगढ़ बांध से पिछोला झील तक लाया जाता है
  • मानसी बाकल जल सुरंग देश की सबसे बड़ी जल सुरंग है

सिंचाई परियोजनाओं का संक्षिप्त परिचय

परियोजना का नामबांध निर्माण स्थलनदी
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ
चम्बल नदी घाटी परियोजना — गांधी सागरमंदसौर (मध्यप्रदेश)चम्बल नदी
चम्बल — राणा प्रताप सागरचित्तौड़गढ़ (राजस्थान)चम्बल नदी
चम्बल — जवाहर सागरकोटा (राजस्थान)चम्बल नदी
भाखड़ा नांगल परियोजनाभाखड़ा एवं नांगल (पंजाब)सतलुज नदी
व्यास परियोजनापंडोह (हिमाचल प्रदेश) / पोंग बांधसतलुज, रावी, व्यास
माही बजाज सागर परियोजनाबोटखेड़ा गाँव, बाँसवाड़ा (राजस्थान)माही नदी
वृहद् सिंचाई परियोजनाएँ
जवाई बांध योजनापालीजवाई नदी
जाखम परियोजनाप्रतापगढ़ (चित्तौड़गढ़)जाखम
ओराई सिंचाई योजनाभोपालपुराओराई
जवाई बांध परियोजनासुमेरपुरजवाई
मेजा बांध परियोजनाभीलवाड़ाकोठारी
बीसलपुर परियोजनाटोंकबनास
अन्य सिंचाई परियोजनाएँ
विलास सिंचाई योजनाबारांविलास
पार्वती सिंचाई परियोजनाधौलपुरपार्वती
सोम-कमला-अंबा सिंचाई परियोजनाडूंगरपुरसोम
मोरेल बांधसवाई माधोपुरमोरेल
बांकली बांधपालीसुकड़ी
खारी बांधअसींदा तहसीलखारी
अड़वान बांधशाहपुरामन्सी
पश्चिम बनास योजनापिड़वाड़ा तहसीलबनास
गम्भीरी योजनानिम्बाहेड़ागम्भीरी
पीपलवा लिफ्ट सिंचाई योजनागण्डवर गाँव (सवाई माधोपुर)चम्बल
सोम कागदर सिंचाई योजनाउदयपुरसोम
पांचना परियोजनाकरौलीगम्भीरी
चाकण सिंचाई परियोजनाकेशवरायपाटणचाकण
छापी सिंचाई परियोजनाअकलेरा (मनालावाड़)छापी
गुढ़ा योजनाबूँदी
जगर सिंचाई परियोजनासवाई माधोपुर
भीमसागरझालावाड़उजाड़
हरिश्चन्द्र सागरझालावाड़/कोटाकाली सिन्ध
चंवलीझालावाड़चंवली
चौलीझालावाड़चौली
बैंथलीबारांबैंथली
सावन-भादोंकोटाअरु
परवन लिफ्टबारांपरवन
नन्दसमन्दराजसमंदबनास
राजसमंदराजसमंद
जयसमंदउदयपुरगोमती
बाड़ी मान सरोवरचित्तौड़गढ़काददम्बरी
सूकली-सेलवाड़ासिरोहीसूकली
बांडी सेडड़ाजालौरबाण्डी
अजानभरतपुरगम्भीरी
ईसरदासवाई माधोपुरबनास
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