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1857 की क्रांति, ब्रिटिश गवर्नर जनरल व वायसराय

1 min read 124 views 02 Sep 2026 Indian GK ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
कक्षा VI-XII NCERT सार संकलन पर आधारित 1857 की महान क्रांति के प्रमुख केंद्र व नायक तथा बंगाल के गवर्नरों, भारत के गवर्नर जनरलों व वायसरायों के प्रमुख सुधारों के विस्तृत नोट्स।
Table of Contents
  1. भाग 1: 1857 ई. की महान क्रांति — स्वरूप, केंद्र एवं नायक
  2. 1. क्रांति का प्रारम्भ एवं स्वरूप सम्बन्धी मत
  3. 2. 1857 की क्रांति के महत्वपूर्ण केंद्र
  4. भाग 2: प्रमुख ब्रिटिश गवर्नर जनरल — सुधार एवं नीतियां
  5. 1. रॉबर्ट क्लाइव एवं वारेन हेस्टिंग्स
  6. 2. लॉर्ड कॉर्नवालिस, सर जॉन शोर एवं लॉर्ड वेलेजली
  7. 3. लॉर्ड हेस्टिंग्स, लॉर्ड एमहर्स्ट एवं लॉर्ड विलियम बैंटिक
  8. 4. लॉर्ड ऑकलैंड, लॉर्ड एलनबरो, लॉर्ड हार्डिंग एवं लॉर्ड डलहौजी
  9. भाग 3: प्रमुख ब्रिटिश वायसराय — नीतियां एवं अधिनियम
  10. 1. लॉर्ड कैनिंग, सर जॉन लारेंस एवं लॉर्ड मेयो
  11. 2. लॉर्ड लिटन एवं लॉर्ड रिपन
  12. 3. लॉर्ड कर्जन, लॉर्ड मिन्टो-II एवं लॉर्ड हार्डिंग-II
  13. 4. लॉर्ड चेम्सफोर्ड, लॉर्ड रीडिंग, लॉर्ड इरविन व लॉर्ड लिनलितगो
  14. भाग 4: ब्रिटिश कालीन महत्वपूर्ण सामाजिक अधिनियम
Key Points
  • 1857 ई. के विद्रोह का तात्कालिक कारण चर्बी लगे कारतूसों का प्रयोग था तथा बैरकपुर छावनी के सैनिक मंगल पांडे को 8 अप्रैल, 1857 को फाँसी दी गई थी।
  • झाँसी में 1857 की क्रांति का नेतृत्व रानी लक्ष्मीबाई ने किया था, जो ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज से वीरतापूर्वक लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुई थीं।
  • बंगाल में द्वैध शासन की स्थापना 1765 में रॉबर्ट क्लाइव ने की थी, जबकि रेगुलेटिंग एक्ट 1773 के तहत वारेन हेस्टिंग्स बंगाल के प्रथम गवर्नर जनरल बने।
  • भारतीय नागरिक सेवा (Civil Services) का जनक लॉर्ड कॉर्नवालिस को माना जाता है, जिन्होंने कॉर्नवालिस कोड (1793) के तहत शक्तियों का पृथक्कीकरण किया।
  • लॉर्ड विलियम बैंटिक ने राजा राममोहन राय के सहयोग से 1829 में सती प्रथा का पूर्णतः उन्मूलन कर प्रतिबंध लगा दिया था।
  • भारत में रेलवे तथा डाक टिकट का जनक लॉर्ड डलहौजी को माना जाता है, जिनके काल में 16 अप्रैल, 1853 को बम्बई से ठाणे के बीच पहली रेल चली थी।
  • लॉर्ड इरविन के समय 1930 में प्रसिद्ध शारदा एक्ट पारित हुआ, जिसके तहत लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु 14 वर्ष तथा लड़कों की 18 वर्ष तय की गई थी।
  • लॉर्ड कर्जन ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया था, जिसे बाद में लॉर्ड हार्डिंग के समय 1911 में दिल्ली दरबार के दौरान निरस्त करने की घोषणा हुई।

भाग 1: 1857 ई. की महान क्रांति — स्वरूप, केंद्र एवं नायक

1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण चर्बी लगे कारतूसों का प्रयोग था, यद्यपि इस विद्रोह के अन्य मुख्य कारण आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं धार्मिक थे।

1. क्रांति का प्रारम्भ एवं स्वरूप सम्बन्धी मत

  • मंगल पांडे व प्रथम घटना — 29 मार्च, 1857 ई. को बैरकपुर में 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के एक सैनिक मंगल पांडे ने गाय एवं सूअर की चर्बी मिले कारतूसों को मुँह से काटने से स्पष्ट मना कर दिया था, फलस्वरूप उसे गिरफ्तार कर 8 अप्रैल, 1857 ई. को फाँसी दे दी गई।
  • विद्रोह की शुरुआत — 10 मई, 1857 ई. के दिन मेरठ की पैदल टुकड़ी 20 N.I. ने क्रांति की शुरुआत की। 11 मई, 1857 को प्रातः ही दिल्ली पहुँचकर दिल्ली पर अधिकार कर लिया गया। दिल्ली में विद्रोहियों को मुगल शासक बहादुरशाह ने बख्त खाँ के सहयोग से नेतृत्व प्रदान किया। क्रांति के समय ब्रिटिश प्रधानमंत्री पामर्स्टन था।
  • तात्या टोपे व लक्ष्मीबाई — तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचन्द्र पांडुरंग था। वे एक जमींदार मित्र के विश्वासघात के कारण पकड़े गए और 18 अप्रैल, 1859 को फाँसी दे दी गई। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेज जनरल ह्यूरोज से लड़ते हुए 17 जून, 1858 को वीरगति को प्राप्त हुईं। मौलवी अहमदउल्लाह ने अंग्रेजों के विरुद्ध 'जिहाद' का नारा दिया था। जॉन लारेंस ने कहा था कि "यदि विद्रोहियों में एक भी योग्य नेता होता तो हम सदा के लिए हार जाते।"

2. 1857 की क्रांति के महत्वपूर्ण केंद्र

विद्रोह का केंद्र विद्रोह तिथि भारतीय नायक (नेतृत्वकर्ता) दमन तिथि ब्रिटिश नायक (दमनकर्ता)
दिल्ली 11–12 मई, 1857 ई. बहादुरशाह जफर, बख्त खाँ (सैन्य नेतृत्व) 21 सितम्बर, 1857 ई. निकल्सन एवं हडसन
कानपुर 5 जून, 1857 ई. नाना साहब, तात्या टोपे (सैन्य नेतृत्व) 6 सितम्बर, 1857 ई. कॅम्पबेल
लखनऊ 4 जून, 1857 ई. बेगम हजरत महल, बिरजिस कादिर मार्च, 1858 ई. कॅम्पबेल
झाँसी जून, 1857 ई. रानी लक्ष्मीबाई मार्च, 1858 ई. जनरल ह्यूरोज
इलाहाबाद 1857 ई. लियाकत अली 1858 ई. कर्नल नील
जगदीशपुर अगस्त, 1857 ई. कुँवर सिंह, अमर सिंह 1858 ई. विलियम टेलर एवं विंसेट आयर
बरेली 1857 ई. खान बहादुर खाँ 1858 ई. कर्नल नील
फैजाबाद 1857 ई. मौलवी अहमदउल्लाह 1858 ई. जनरल रेनर्ड
फतेहपुर 1857 ई. अजीमुल्ला 1858 ई. जनरल रेनर्ड

भाग 2: प्रमुख ब्रिटिश गवर्नर जनरल — सुधार एवं नीतियां

1. रॉबर्ट क्लाइव एवं वारेन हेस्टिंग्स

  • रॉबर्ट क्लाइव (1757–60, 1765–67 ई.) — इन्होंने अवध के नवाब शुजाउद्दोला तथा मुगल सम्राट शाहआलम के साथ 1765 ई. में 'इलाहाबाद की संधि' तथा बंगाल में 'द्वैध शासन' की स्थापना की। बंगाल के समस्त क्षेत्र के लिए दो उपदीवान मुहम्मद रज़ा खाँ (बंगाल) तथा राजा शिताब राय (बिहार) को नियुक्त किया।
  • वारेन हेस्टिंग्स (1772–85 ई.) — रेगुलेटिंग एक्ट 1773 ई. के अनुसार बंगाल के गवर्नर को अब अंग्रेजी क्षेत्रों का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा। इन्होंने राजकीय कोषागार को मुर्शिदाबाद से हटाकर कलकत्ता लाया। 1772 ई. में प्रत्येक जिले में एक-एक फौजदारी तथा दीवानी अदालतों की स्थापना की। 1781 ई. में कलकत्ता में मुस्लिम शिक्षा के विकास के लिए प्रथम मदरसा स्थापित किया। सर विलियम जोंस ने 1784 ई. में 'द एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल' की स्थापना इन्हीं के समय की। भारत के पहले समाचार पत्र 'द बंगाल गजट' (1780 ई.) का प्रकाशन जेम्स ऑगस्ट हिक्की द्वारा इन्हीं के काल में किया गया।

2. लॉर्ड कॉर्नवालिस, सर जॉन शोर एवं लॉर्ड वेलेजली

  • लॉर्ड कॉर्नवालिस (1786–93 ई.) — इनके समय समस्त जिले के अधिकार कलेक्टर के हाथों में दे दिए गए。 कलकत्ता, मुर्शिदाबाद, ढाका तथा पटना में 4 प्रान्तीय न्यायालयों की स्थापना की। भारतीय नागरिक सेवा (Civil Services) का जनक कॉर्नवालिस को माना जाता है। न्यायिक क्षेत्र में 'शक्ति के पृथक्कीकरण' के सिद्धांत पर आधारित कॉर्नवालिस कोड (1793) एवं रेवेन्यू बोर्ड की स्थापना की। प्रत्येक जिले में पुलिस थाने की स्थापना कर एक दरोगा को इसका इंचार्ज बनाया।
  • सर जॉन शोर (1793–98 ई.) — इन्होंने 'अहस्तक्षेप की नीति' अपनाई। स्थायी भूमि बंदोबस्त (1793 ई.) की योजना 'जॉन शोर' ने ही बनाई थी।
  • Lard वेलेजली (1798–1805 ई.) — भारत में 'सहायक संधि' का जनक वेलेजली को माना जाता है। सहायक संधि करने वाले प्रमुख राज्य थे— हैदराबाद (1798 ई.), मैसूर (1799 ई.), तंजौर (अक्टूबर, 1799 ई.), अवध (1801 ई.), पेशवा (दिसम्बर, 1801 ई.), भोंसले (दिसम्बर, 1803 ई.), सिंधिया (1804 ई.) एवं जयपुर, जोधपुर, बूंदी, मच्छेद्री तथा भरतपुर। वेलेजली स्वयं को 'बंगाल का शेर' कहा करता था। इसके समय कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की गई।

3. लॉर्ड हेस्टिंग्स, लॉर्ड एमहर्स्ट एवं लॉर्ड विलियम बैंटिक

  • लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813–23 ई.) — मार्च, 1816 ई. में अंग्रेजों एवं गोरखों के बीच 'संगौली की संधि' के द्वारा आंग्ल-नेपाल युद्ध का अंत हुआ। इन्होंने पिंडारियों का दमन किया तथा मराठों की शक्ति को अंतिम रूप से नष्ट कर दिया। इनके समय 1822 ई. में बंगाल में काश्तकारी अधिनियम (Tenancy Act) लागू किया गया।
  • लॉर्ड विलियम बैंटिक (1828–35 ई.) — 1833 ई. के 'चार्टर एक्ट' द्वारा बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया, इस प्रकार भारत का पहला गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक हुआ। राजा राममोहन राय के सहयोग से बैंटिक ने 1829 ई. में सती प्रथा को समाप्त कर दिया। बैंटिक ने कर्नल स्लीमन की सहायता से 1830 ई. में 'ठगी प्रथा' को समाप्त किया। सन् 1835 ई. में बैंटिक ने कलकत्ता में 'कलकत्ता मेडिकल कॉलेज' की स्थापना की। मैकाले की अनुशंसा पर अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम बनाया गया। बैंटिक ने 1831 ई. में मैसूर तथा 1834 ई. में कुर्ग को हड़प लिया। इन्होंने शिशु बालिका की हत्या पर भी प्रतिबंध लगाया।

4. लॉर्ड ऑकलैंड, लॉर्ड एलनबरो, लॉर्ड हार्डिंग एवं लॉर्ड डलहौजी

  • लॉर्ड ऑकलैंड (1836–42 ई.) — इन्होंने दिल्ली से कलकत्ता तक ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road) की मरम्मत करवाई। प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध (1838–42) इन्हीं के समय समाप्त हुआ।
  • लॉर्ड एलनबरो (1842–44 ई.) — 1843 के एक्ट-V के द्वारा दास-प्रथा का उन्मूलन इन्हीं के समय में हुआ। लॉर्ड एलनबरो के समय 1843 ई. में चार्ल्स नेपियर के नेतृत्व में सिंध का ब्रिटिश राज्य में विलय किया गया।
  • लॉर्ड डलहौजी (1848–56 ई.) — इन्होंने प्रसिद्ध 'व्यपगत के सिद्धांत' (Doctrine of Lapse / हड़प नीति) की शुरुआत की, जिसके तहत ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाए गए राज्य हैं— सतारा (1848), सम्भलपुर (1849), बघाट (1850), उदयपुर (1852), झाँसी (1853), नागपुर (1854) तथा करौली (1855)। सन् 1856 ई. में अवध पर कुशासन का आरोप लगाकर ब्रिटिश राज्य में मिला लिया गया, उस समय अवध का नवाब वाजिद अली शाह था। डलहौजी को भारत में 'रेलवे का जनक' माना जाता है; इन्हीं के समय भारत में पहली बार 16 अप्रैल, 1853 ई. में बम्बई से ठाणे के बीच (34 किमी) प्रथम रेल चलाई गई। शिक्षा सम्बन्धी सुधारों में डलहौजी ने सन् 1854 ई. के 'वुड डिस्पैच' को लागू किया। सन् 1854 ई. में नया पोस्ट ऑफिस एक्ट पारित हुआ और भारत में पहली बार डाक टिकट का प्रचलन प्रारंभ हुआ। इन्होंने शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया।

भाग 3: प्रमुख ब्रिटिश वायसराय — नीतियां एवं अधिनियम

1. लॉर्ड कैनिंग, सर जॉन लारेंस एवं लॉर्ड मेयो

  • लॉर्ड कैनिंग (1856–64 ई.) — यह भारत में कंपनी द्वारा नियुक्त अंतिम गवर्नर जनरल तथा ब्रिटिश सम्राट के अधीन नियुक्त भारत का प्रथम वायसराय था। इन्हीं के समय 1857 ई. का विद्रोह हुआ। 1856 का विधवा पुनर्विवाह अधिनियम इन्हीं के समय पारित हुआ। मैकाले द्वारा प्रारूपित दण्ड संहिता को 1858 ई. में कानून बना दिया गया तथा 1860 में भारतीय दण्ड संहिता (IPC) तथा 1861 में फौजदारी विधि संहिता का निर्माण हुआ।
  • लॉर्ड मेयो (1689–72 ई.) — भारत में 'वित्तीय विकेंद्रीकरण' का जनक लॉर्ड मेयो को माना जाता है। इन्होंने अजमेर में 'मेयो कॉलेज' की स्थापना की थी। 1871 ई. में भारत में **प्रथम जनगणना** इन्हीं के समय हुई। सन् 1872 ई. में एक कृषि विभाग की स्थापना की। मेयो की हत्या उनके कार्यकाल के दौरान ही अंडमान-निकोबार में एक अफगान द्वारा कर दी गई थी।

2. लॉर्ड लिटन एवं लॉर्ड रिपन

  • लॉर्ड लिटन (1876–80 ई.) — यह एक प्रसिद्ध उपन्यासकार, निबंध-लेखक एवं साहित्यकार था, जिसे साहित्य जगत में 'ओवन मैरिडिथ' के नाम से जाना जाता था। लिटन ने 1877 ई. में दिल्ली में एक भव्य दरबार का आयोजन किया, जिसमें महारानी विक्टोरिया को 'कैसर-ए-हिन्द' की उपाधि दी गई। इन्होंने सिविल सेवा में प्रवेश की आयु को 21 वर्ष से घटाकर 19 वर्ष कर दिया। लिटन ने प्रेस पर प्रतिबंध लगाने हेतु 1878 ई. में वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट लागू किया तथा 1878 में ही भारतीय शस्त्र अधिनियम पारित कर बिना लाइसेंस शस्त्र रखने पर प्रतिबंध लगाया।
  • लॉर्ड रिपन (1880–84 ई.) — इनके समय सन् 1881 ई. में सर्वप्रथम **नियमित (दस वर्षीय) जनगणना** करवाई गई। रिपन द्वारा 1881 ई. में प्रथम कारखाना अधिनियम लाया गया। इन्होंने 1882 ई. में वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट को समाप्त कर समाचार पत्रों की स्वतंत्रता बहाल की। भारत में 'स्थानीय स्वशासन' की शुरुआत रिपन के कार्यकाल में 1882 ई. में हुई। रिपन ने शैक्षिक सुधारों के अंतर्गत 1882 ई. में विलियम हंटर की अध्यक्षता में एक शिक्षा आयोग गठित किया। यूरोपीय न्यायाधीशों द्वारा मुकदमों की सुनवाई के लिए इनके काल में 'इल्बर्ट विधेयक' प्रस्तुत किया गया, जिसका अंग्रेजों द्वारा विरोध किए जाने के कारण इसे 'श्वेत विद्रोह' कहा जाता है। फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने रिपन को 'भारत के उद्धारक' की संज्ञा दी।

3. लॉर्ड कर्जन, लॉर्ड मिन्टो-II एवं लॉर्ड हार्डिंग-II

  • लॉर्ड कर्जन (1899–1905 ई.) — कर्जन द्वारा 1901 में सिंचाई आयोग, 1902 में पुलिस आयोग तथा 1902 में ही विश्वविद्यालय आयोग की स्थापना की गई。 सन् 1904 में भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पास किया गया। कर्जन के समय ही 16 अक्टूबर, 1905 को **बंगाल का विभाजन** किया गया, जिसे बंगाल में शोक दिवस के रूप में मनाया गया। गोपालकृष्ण गोखले ने कर्जन की तुलना मुगल सम्राट औरंगज़ेब से की थी।
  • लॉर्ड मिन्टो-II (1905–10 ई.) — इनके समय 1907 ई. में सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन हुआ। सन् 1909 ई. में 'मिन्टो-मार्ले सुधार' अधिनियम पारित किया गया, जिसके माध्यम से मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था की गई।
  • लॉर्ड हार्डिंग-II (1910–16 ई.) — लॉर्ड हार्डिंग के समय 12 दिसम्बर, 1911 को ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम का भारत आगमन हुआ। सन् 1911 ई. में भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की गई एवं 1912 में दिल्ली को राजधानी बनाया गया। 4 अगस्त, 1914 को प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत इन्हीं के काल में हुई। सन् 1916 ई. में हार्डिंग को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) का कुलाधिपति नियुक्त किया गया।

4. लॉर्ड चेम्सफोर्ड, लॉर्ड रीडिंग, लॉर्ड इरविन व लॉर्ड लिनलितगो

  • लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916–21 ई.) — सन् 1916 ई. में पूना में प्रथम महिला विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। इनके काल में अप्रैल, 1919 में रॉलेट एक्ट का गठन किया गया तथा जलियावाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल, 1919) इसी के समय में हुआ। इन्हीं के समय मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड अधिनियम (1919) पारित हुआ।
  • लॉर्ड रीडिंग (1921–26 ई.) — 17 नवम्बर, 1921 को प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन के दौरान समूचे भारत में हड़ताल हुई। 1923 ई. से आई.सी.एस. (ICS) की परीक्षा दिल्ली एवं लंदन दोनों जगह एक साथ कराने का निर्णय लिया गया।
  • लॉर्ड इरविन (1926–31 ई.) — इनके समय ही प्रसिद्ध 'साइमन कमीशन' का भारत आगमन हुआ। इनके काल में देशी रियासतों के संबंध में 1927 ई. में हरकोर्ट बटलर की अध्यक्षता में बटलर समिति का गठन हुआ।
  • लॉर्ड लिनलितगो (1936–43 ई.) — इनके समय **द्वितीय विश्वयुद्ध (1939–45 ई.)** की शुरुआत हुई। ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों से पूछे बिना भारत को युद्ध में शामिल कर लिया, जिसके कारण कांग्रेस मन्त्रिमण्डल ने इस्तीफा दे दिया, जिसे मुस्लिम लीग ने 'मुक्ति दिवस' के रूप में मनाया। 1942 ई. का 'अगस्त प्रस्ताव' (भारत छोड़ो आन्दोलन की पृष्ठभूमि) इसी के समय पारित किया गया।
  • लॉर्ड वेवेल व लॉर्ड माउन्टबेटन (1943–48 ई.) — वेवेल के समय राजनीतिक समाधान के लिए 'शिमला सम्मेलन' का आयोजन किया गया तथा कैबिनेट मिशन का भारत आगमन हुआ। लॉर्ड माउन्टबेटन ब्रिटिश भारत के अन्तिम एवं स्वतन्त्र भारत के **प्रथम गवर्नर जनरल व वायसराय** थे, जिनके शासनकाल में ही भारत स्वतन्त्र हुआ और भारत-पाकिस्तान विभाजन की घोषणा की गई। स्वतन्त्र भारत के प्रथम एवं अन्तिम भारतीय वायसराय चक्रवर्ती राजगोपालाचारी थे।

भाग 4: ब्रिटिश कालीन महत्वपूर्ण सामाजिक अधिनियम

ब्रिटिश शासनकाल में भारतीय समाज सुधारकों के प्रयासों और सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए पारित किए गए प्रमुख अधिनियमों की संशिप्त सूची नीचे दी गई है:

अधिनियम का नाम पारित होने का वर्ष समकालीन गवर्नर जनरल अधिनियम का मुख्य विषय / उद्देश्य
शिशुवध प्रतिबंध 1798–1805 ई. लॉर्ड वेलेजली शिशु हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध (1785 के नियम XXI के तहत)।
सती प्रथा प्रतिबंध 1829 ई. लॉर्ड विलियम बैंटिक सती प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध (1829 के नियम XVII के तहत)।
दास प्रथा पर प्रतिबंध 1843 ई. लॉर्ड एलनबरो 1833 के चार्टर अधिनियम द्वारा 1843 में दासता को पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया।
हिन्दू विधवा पुनर्विवाह 1856 ई. लॉर्ड कैनिंग विधवा विवाह को कानूनी मान्यता और अनुमति प्रदान की गई।
नेटिव मैरिज एक्ट 1872 ई. लॉर्ड नार्थ ब्रुक अंतर्जातीय विवाह को कानूनी वैधता प्रदान करना।
एज ऑफ कंसेंट एक्ट 1891 ई. लॉर्ड लैंसडाउन लड़की के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 12 वर्ष निर्धारित की गई।
शारदा एक्ट 1930 ई. लॉर्ड इरविन विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 14 वर्ष एवं लड़कों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित।
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