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उत्तरकालीन मुगल, यूरोपीय आगमन व ब्रिटिश विस्तार

1 min read 128 views 02 Sep 2026 Indian GK ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
कक्षा VI-XII NCERT सार संकलन पर आधारित उत्तरकालीन मुगल शासक, भारत में यूरोपीय कम्पनियों का आगमन, कर्नाटक युद्ध, प्लासी-बक्सर युद्ध, आंग्ल-मैसूर व आंग्ल-सिख संघर्ष के विस्तृत नोट्स।
Key Points
  • ईरान के नेपोलियन कहे जाने वाले नादिरशाह ने 1739 ई. में करनाल के युद्ध में मुगल सेना को हराकर दिल्ली और मूर सिंहासन (तख्ते ताउस) पर कब्जा किया था.
  • भारत में यूरोपीय कम्पनियों के आगमन के क्रम में पुर्तगाली सबसे पहले (1498 ई.) आए तथा उन्होंने अपनी पहली व्यापारिक कोठी 1502 ई. में कोचीन में स्थापित की थी.
  • अंग्रेजों ने 1760 ई. के वांडिवाश के युद्ध में फ्रांसीसियों को निर्णायक रूप से हराकर भारत में उनके प्रभुत्व को पूरी तरह समाप्त कर दिया था
  • अंग्रेजों ने 1760 ई. के वांडिवाश के युद्ध में फ्रांसीसियों को निर्णायक रूप से हराकर भारत में उनके प्रभुत्व को पूरी तरह समाप्त कर दिया था.
  • 23 जून, 1757 ई. को हुआ प्लासी का युद्ध रॉबर्ट क्लाइव और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच लड़ा गया, जिसमें मीर जाफर के विश्वासघात के कारण नवाब की हार हुई.
  • बक्सर के युद्ध (1764 ई.) में अंग्रेजों की विजय के बाद क्लाइव ने मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय के साथ 1765 में इलाहाबाद की ऐतिहासिक सन्धि की थी.
  • मैसूर के प्रतापी शासक टीपू सुल्तान ने श्रीरंगपट्टनम को अपनी राजधानी बनाया, स्वतन्त्रता का वृक्ष लगवाया तथा वह फ्रांसीसी जैकोबिन क्लब का सदस्य बना.
  • महाराजा रणजीत सिंह सुकरचकिया मिसल से सम्बन्धित थे तथा उनके और अंग्रेजों के बीच 1809 ई. में ऐतिहासिक अमृतसर की सन्धि हुई थी.
  • सिख धर्म में गुरु अंगद देव को गुरुमुखी लिपि का जनक, गुरु अर्जुन देव को आदिग्रंथ का संकलनकर्ता तथा गुरु गोविन्द सिंह को खालसा पंथ का संस्थापक माना जाता है.

भाग 1: उत्तरकालीन मुगल साम्राज्य (पतन का कालक्रम)

औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद भारतीय इतिहास में 'उत्तरतर मुगलकाल' का प्रारम्भ हुआ, जिसमें अयोग्य शासकों के कारण मुगल साम्राज्य का तेजी से विघटन हुआ.

  • बहादुर शाह प्रथम (मुअज्जम — 1707-12 ई.) — उत्तराधिकार युद्ध में गुरु गोविन्द सिंह ने इनका साथ दिया था. इन्हें 'शाहआलम-I' भी कहा जाता था.
  • जहाँदार शाह (1712-13 ई.) — इन्होंने जयसिंह को 'मिर्ज़ा राजा सवाई' की तथा अजीत सिंह को 'महाराज' की पदवी दी. ये लाल कुँवर नामक वेश्या के प्रभाव में थे.
  • फर्रुखसियर (1713-19 ई.) — यह सैयद बन्धुओं की सहायता से गद्दी पर बैठा. अक्टूबर 1720 में तुरानी सैनिक हैदर बेग ने सैयद बन्धु हुसैन अली खाँ की हत्या कर दी.
  • मुहम्मदशाह (1719-48 ई.) — इन्हें 'रंगीला' भी कहा जाता था. इनके समय 24 फरवरी, 1739 ई. को नादिरशाह (ईरानी) तथा मुगल सेना के मध्य करनाल का युद्ध हुआ. नादिरशाह ने दिल्ली को लूटकर तख्ते ताउस (मयूर सिंहासन) पर अधिकार किया; वह इस सिंहासन पर बैठने वाला अंतिम मुगल शासक था. नादिरशाह को 'ईरान का नेपोलियन' कहा जाता है. अहमदशाह अब्दाली ने भी इसी काल में (1748-62 ई.) भारत पर आक्रमण शुरू किए.
  • शाहआलम-II (1759-1806 ई.) — इनके समय प्लासी का युद्ध (1757 ई.) तथा बक्सर का युद्ध (1764 ई.) हुआ. इनके शासनकाल में 1803 ई. में अंग्रेजों ने दिल्ली पर कब्जा कर लिया.
  • अकबर द्वितीय व बहादुरशाह द्वितीय 'जफर' — अंग्रेजों के संरक्षण में बनने वाला प्रथम मुगल बादशाह अकबर II था. बहादुरशाह II (1837-57 ई.) अन्तिम मुगल शासक था, जो 'जफर' उपनाम से शायरी लिखता था. 1857 ई. की क्रान्ति में भाग लेने के कारण अंग्रेजों ने इन्हें बंदी बनाकर रंगून भेज दिया, जहाँ मुगल साम्राज्य का औपचारिक अंत हो गया.

भाग 2: भारत में यूरोपीय कम्पनियों का आगमन एवं संघर्ष

भारत में यूरोपीय कम्पनियों के आगमन का सही क्रम इस प्रकार है: पुर्तगाली → डच → अंग्रेज → डेनिश → फ्रांसीसी → स्वीडिश.

1. यूरोपीय कम्पनियों का आगमन एवं प्रथम फैक्ट्रियां

यूरोपीय कम्पनी आगमन वर्ष प्रथम व्यापारिक कोठी / फैक्ट्री का स्थान व वर्ष
पुर्तगाली 1498 ई. कोचीन (केरल) — 1502 ई.
डच 1602 ई. मसूलीपत्तनम (आंध्र प्रदेश) — 1605 ई.
अंग्रेज 1600 ई. सूरत (गुजरात) — 1608 ई.
डेनीश 1616 ई. त्रावनकोर (तंजौर) — 1620 ई.
फ्रांसीसी 1664 ई. सूरत (गुजरात) — 1668 ई.
  • पुर्तगाली — वास्कोडिगामा ने 17 मई, 1498 ई. को कालीकट बंदरगाह पहुंचकर नए समुद्री मार्ग की खोज की. फ्रांसिस्को द अल्मेडा 1505 ई. में प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनकर आया. अल्फांसो द अल्बुकर्क ने 1510 ई. में बीजापुर के यूसुफ आदिल शाह से गोवा को जीता.
  • डच व अंग्रेज — डच ईस्ट इण्डिया कम्पनी का मुख्य प्रशासनिक केन्द्र 'बटाविया' में था. बेदरा का युद्ध (1759 ई.) में अंग्रेजों ने डचों को पराजित कर भारत से बाहर कर दिया. अंग्रेजों की ओर से 1608 ई. में राजा जेम्स प्रथम के दूत के रूप में कैप्टन हॉकिन्स जहाँगीर के दरबार में आया था. बम्बई का वास्तविक संस्थापक गेराल्ड औंगियार था. जॉब चारनॉक ने सुतानुती, कालीकाता और गोविन्दपुर की जमींदारी लेकर कोलकाता नगर की नींव रखी.
  • ब्रिटिश-फ्रांसीसी संघर्ष (कर्नाटक युद्ध)
    • प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746-48 ई.) — यह ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार से प्रभावित था, जो 'एक्स-ला-शैपल' की सन्धि से समाप्त हुआ.
    • दूसरा कर्नाटक युद्ध (1749-54 ई.) — इसमें फ्रांसीसी गवर्नर डूप्ले की हार हुई और यह 'पांडिचेरी की सन्धि' (1755 ई.) से समाप्त हुआ.
    • तीसरा कर्नाटक युद्ध (1756-63 ई.) — यह 'पेरिस की सन्धि' से समाप्त हुआ. इसी के दौरान 1760 ई. में सर आयरकूट के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने वांडिवाश की लड़ाई में फ्रांसीसियों (लाली के नेतृत्व में) को बुरी तरह हराया.

भाग 3: बंगाल पर अंग्रेजों का अधिकार एवं मैसूर संघर्ष

1. प्लासी एवं बक्सर का युद्ध

  • सिराजुद्दौला व ब्लैक होल — 10 अप्रैल, 1756 को सिराजुद्दौला बंगाल का नवाब बना. इसके समय 'ब्लैक होल की घटना' (20 जून, 1756 ई.) हुई, जिसमें हॉलेवेल के अनुसार 146 अंग्रेजों को एक छोटे कमरे में बंद करने पर मात्र 23 व्यक्ति ही जीवित बचे थे.
  • प्लासी का युद्ध (23 जून, 1757 ई.) — यह युद्ध अंग्रेजी सेनापति रॉबर्ट क्लाइव एवं नवाब सिराजुद्दौला के बीच हुआ, जिसमें नवाब के सेनापति मीर जाफर की दगाबाजी के कारण नवाब की हार हुई. क्लाइव ने मीर जाफर को 'क्लाइव का गीदड़' कहा था. युद्ध के बाद कंपनी को 24 परगने की जमींदारी मिली.
  • बक्सर का युद्ध (1764 ई.) — मीर कासिम ने अपनी राजधानी मुर्शिदाबाद से मुंगेर स्थानान्तरित कर दी थी. बक्सर का युद्ध अंग्रेजों (नेतृत्व: हेक्टर मुनरो) और मीर कासिम, शुजाउद्दौला व मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय की संयुक्त सेना के बीच हुआ. अंग्रेजों की विजय के बाद क्लाइव ने मुगल बादशाह के साथ 12 अगस्त, 1765 ई. को इलाहाबाद की प्रथम सन्धि की. इसके तहत नवाब को द्वैध शासन की व्यवस्था दी गई और शाहआलम को 26 लाख रुपये वार्षिक पेंशन तय हुई.

2. आंग्ल-मैसूर संघर्ष एवं टीपू सुल्तान

मैसूर में 1761 ई. में हैदर अली वास्तविक शासक बना, जिसने फ्रांसीसियों की सहायता से डिंडीगुल में एक शस्त्रागार स्थापित किया था.

युद्ध वर्ष / काल गवर्नर जनरल महत्वपूर्ण सन्धि / परिणाम
प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध 1767-69 ई. - हैदर अली ने अंग्रेजों को हराया; 'मद्रास की सन्धि' हुई.
द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध 1780-84 ई. वारेन हेस्टिंग्स 7 दिसम्बर, 1782 को हैदर अली की मृत्यु हुई; 'मंगलोर की सन्धि' से समाप्त.
तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध 1790-92 ई. कॉर्नवालिस टीपू सुल्तान पराजित हुआ; 'श्रीरंगपट्टनम की सन्धि' हुई.
चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध 1799 ई. लॉर्ड वेलेजली टीपू सुल्तान श्रीरंगपट्टनम दुर्ग के पास लड़ते हुए शहीद हो गया.
  • टीपू सुल्तान के कार्य — इसने 'पादशाह' की उपाधि धारण की, श्रीरंगपट्टनम में स्वतन्त्रता का वृक्ष लगवाया तथा वह फ्रांसीसी क्रान्ति के 'जैकोबिन क्लब' का सदस्य बना. इसने 1796 में आधुनिक नौसेना खड़ी करने का प्रयास किया. इसके राज्य के प्रमुख विभाग थे: राजस्व तथा वित्त, सेना, जुमला (अन्य मामले) और तोपखाना विभाग.

भाग 4: आंग्ल-सिख संघर्ष एवं ब्रिटिश आर्थिक नीतियां

1. रणजीत सिंह एवं सिख गुरु परम्परा

  • महाराजा रणजीत सिंह — इनका जन्म 2 नवम्बर, 1780 ई. को सुकरचकिया मिसल के मुखिया महासिंह के यहाँ हुआ था. इनका राज्य 4 सूबों (पेशावर, कश्मीर, मुल्तान व लाहौर) में बंटा था. इनकी सरकार को 'खालसा' कहा जाता था. 25 अप्रैल, 1809 ई. को चार्ल्स मैटकाफ और रणजीत सिंह के बीच प्रसिद्ध अमृतसर की सन्धि हुई.
  • आंग्ल-सिख युद्ध
    • प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845-46 ई.) — लॉर्ड हार्डिंग के समय हुआ, जिसमें लाल सिंह के विश्वासघात के कारण सिख सेना हारी और 8 मार्च, 1846 को 'लाहौर की सन्धि' हुई. इसके बाद 22 दिसम्बर, 1846 को 'भैरौवाल की सन्धि' हुई.
    • द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध (1848-49 ई.) — लॉर्ड डलहौजी के समय चिलियनवाला व गुजरात के युद्ध हुए, जिसमें सिखों की हार के बाद 29 मार्च, 1849 को डलहौजी ने सम्पूर्ण पंजाब का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया. प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा महारानी विक्टोरिया को भेज दिया गया.
  • सिख गुरुओं का संक्षिप्त विवरण
    • गुरु नानक देव — सिख धर्म के संस्थापक (जन्म 1469 ई., तलवंडी). इन्होंने 'संगत' (धर्मशाला) और 'पंगत' (लंगर) व्यवस्था शुरू की.
    • गुरु अंगद देव व अमरदास — गुरु अंगद 'गुरुमुखी लिपि' के जनक थे. गुरु अमरदास ने 'लवन' पद्धति (सिख विवाह पद्धति) और 22 गद्दियों की स्थापना की.
    • गुरु रामदास व अर्जुन देव — गुरु रामदास ने अमृतसर जलाशय खुदवाया. गुरु अर्जुन देव ने 'आदिग्रंथ' का संकलन किया तथा हरमन्दर साहब का निर्माण करवाया; जहाँगीर ने इन्हें राजकुमार खुसरो की सहायता के कारण 1606 में फाँसी दे दी.
    • गुरु हरगोविन्द व अन्य — इन्होंने अकाल-तख्त का निर्माण करवाया तथा अमृतसर की किलेबंदी की. गुरु तेगबहादुर की हत्या औरंगज़ेब ने शीशगंज गुरुद्वारा के निकट करवा दी थी. गुरु गोविन्द सिंह (जन्म 1666, पटना) ने 1699 में 'खालसा पंथ' तथा पाँच 'ककार' (केश, कंघा, कृपाण, कच्छा, कड़ा) की शुरुआत की. इनके बाद बन्दा बहादुर ने लौहगढ़ को राजधानी बनाकर सिख राज्य की स्थापना की, जिसे 1716 में फर्रुखसियर के आदेश पर मार दिया गया.

2. भारतीय अर्थव्यवस्था पर ब्रिटिश प्रभाव (भू-राजस्व व्यवस्थाएं)

अंग्रेजों ने भारत से धन के निष्कासन (Drain of Wealth) की नीति अपनाई, जिसे सर्वप्रथम दादाभाई नौरोजी ने उजागर किया था. भारत में लागू प्रमुख भू-राजस्व नीतियां इस प्रकार थीं:

भू-राजस्व व्यवस्था शुरुआत वर्ष व जन्मदाता ब्रिटिश भारत का क्षेत्रफल % प्रभावित मुख्य क्षेत्र / प्रांत
स्थायी बन्दोबस्त (इस्तमरारी) 1793 ई. — लॉर्ड कॉर्नवालिस लगभग 19% हिस्सा बंगाल, बिहार, उड़ीसा, वाराणसी तथा उत्तरी कर्नाटक. इसमें जमींदार वसूलते थे तथा सरकार का हिस्सा 10/11 होता था.
रैयतवाड़ी व्यवस्था 1792 ई. — थॉमस मुनरो एवं कैप्टन रीड लगभग 51% हिस्सा तमिलनाडु (बाराामहल), मद्रास, बम्बई, असम तथा कुर्ग. यह सीधे किसानों (रैयत) के साथ बंदोबस्त था.
महालवाड़ी व्यवस्था 1819 ई. — हॉल्ट मैकेंजी लगभग 30% हिस्सा उत्तर भारत (संयुक्त प्रांत), आगरा, अवध, मध्य प्रांत तथा पंजाब. इसमें पूरे गाँव (महाल) पर कर लगाया जाता था.
  • अन्य आर्थिक बिंदु — 1854 ई. में कावासजी नाना भाई ने बम्बई में प्रथम सूती मिल की स्थापना की. 1855 ई. में जॉर्ज ऑकलैंड द्वारा बंगाल के रिशरा में प्रथम जूट मिल स्थापित की गई. 1907 में जमशेदजी टाटा ने टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी (TISCO) की स्थापना की. 1925 में रेल बजट को आम बजट से अलग किया गया.
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