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न्यूटन के गति के नियम (Newton's Laws of Motion) एवं बल सम्पूर्ण सार नोट्स

2 min read 158 views 02 Sep 2026 General Science ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
न्यूटन के तीनों गति नियमों की विस्तृत व्याख्या, गणितीय सूत्र और दैनिक जीवन में व्यावहारिक उदाहरण।
Table of Contents
  1. न्यूटन के गति के नियम - परिचय
  2. न्यूटन का प्रथम नियम (जड़त्व का नियम - Law of Inertia)
  3. नियम की प्रामाणिक परिभाषा:
  4. जड़त्व (Inertia) एवं उसके प्रकार:
  5. न्यूटन का द्वितीय नियम (संवेग परिवर्तन का नियम - Law of Momentum)
  6. नियम की प्रामाणिक परिभाषा:
  7. संवेग (Momentum):
  8. गणितीय व्युत्पत्ति (Mathematical Derivation):
  9. द्रव्यमान (Mass) और भार (Weight) में मौलिक अंतर:
  10. द्वितीय नियम के व्यावहारिक उदाहरण:
  11. न्यूटन का तृतीय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम - Action-Reaction Law)
  12. नियम की प्रामाणिक परिभाषा:
  13. नियम की मुख्य वैज्ञानिक विशेषताएं:
  14. तृतीय नियम के दैनिक जीवन के प्रमुख उदाहरण:
  15. बल के प्रकार (Types of Forces)
  16. 1. संपर्क बल (Contact Forces):
  17. 2. असंपर्क बल (Non-Contact / Field Forces):
  18. गति नियमों के व्यावहारिक एवं सुरक्षा अनुप्रयोग
  19. भौतिकी समस्याओं के समाधान की प्रामाणिक रणनीति
Key Points
  • न्यूटन के गति के प्रथम नियम को 'जड़त्व का नियम' या 'गैलीलियो का नियम' भी कहते हैं, यह बल की गुणात्मक परिभाषा देता है।
  • द्रव्यमान किसी वस्तु के जड़त्व की वास्तविक माप है; द्रव्यमान सदैव स्थिर रहता है जबकि भार ($W=mg$) गुरुत्वाकर्षण के कारण स्थान बदलने पर बदल जाता है।
  • गति का द्वितीय नियम बल की परिमाणात्मक परिभाषा व गणितीय सूत्र $F=ma$ प्रदान करता है। संवेग ($p=mv$) परिवर्तन की दर आरोपित बल के समानुपाती होती है।
  • क्रिकेट खिलाड़ी द्वारा कैच पकड़ते समय हाथों को पीछे खींचना और गाड़ियों में एयरबैग का खुलना संवेग परिवर्तन का समय बढ़ाकर चोट के बल को कम करने के उदाहरण हैं।
  • तृतीय नियम 'क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम' कहलाता है, जिसके अनुसार बल हमेशा परिमाण में समान और विपरीत दिशा में जोड़ों के रूप में भिन्न वस्तुओं पर लगते हैं।
  • रॉकेट का प्रक्षेपण, बंदूक से गोली चलाने पर पीछे धक्का लगना और नाव से कूदने पर नाव का पीछे हटना न्यूटन के तृतीय नियम (संवेग संरक्षण) के प्रमुख उदाहरण हैं।

न्यूटन के गति के नियम - परिचय

सर आइजक न्यूटन द्वारा वर्ष 1687 में उनकी सुप्रसिद्ध पुस्तक 'प्रिंसिपिया' (Philosophiae Naturalis Principia Mathematica) में प्रतिपादित गति के तीन नियम क्लासिकल मैकेनिक्स (Classical Mechanics) या चिरसम्मत भौतिकी की आधारशिला हैं। ये नियम किसी वस्तु पर लगने वाले बाह्य बलों तथा उस बल के कारण वस्तु की गति में होने वाले परिवर्तनों के मध्य एक स्पष्ट, परिमाणात्मक और प्रामाणिक संबंध स्थापित करते हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड में आकाशीय पिंडों से लेकर दैनिक जीवन की सूक्ष्म गतिविधियों तक, गति के ये नियम सार्वभौमिक रूप से लागू होते हैं।

न्यूटन का प्रथम नियम (जड़त्व का नियम - Law of Inertia)

नियम की प्रामाणिक परिभाषा:

इस नियम के अनुसार, यदि कोई वस्तु विरामावस्था (Rest) में है, तो वह तब तक विरामावस्था में ही रहेगी; और यदि वह एक सरल रेखा में एकसमान वेग (Uniform Velocity) से गतिमान है, तो वह उसी वेग से गतिमान रहेगी, जब तक कि उस पर उसकी वर्तमान अवस्था में परिवर्तन करने के लिए कोई बाह्य असंतुलित बल (External Unbalanced Force) न लगाया जाए। इसे 'गैलीलियो का नियम' भी कहा जाता है, क्योंकि जड़त्व की प्रारंभिक संकल्पना गैलीलियो गैलीली द्वारा दी गई थी।

जड़त्व (Inertia) एवं उसके प्रकार:

जड़त्व किसी वस्तु का वह अंतर्निहित और प्राकृतिक गुण है, जिसके कारण वह अपनी विराम या गति की अवस्था में होने वाले किसी भी परिवर्तन का स्वतः विरोध करती है। किसी वस्तु का द्रव्यमान (Mass) उसके जड़त्व का एकमात्र परिमाणात्मक माप है; अर्थात् भारी वस्तु का जड़त्व अधिक और हल्की वस्तु का जड़त्व कम होता है। जड़त्व को मुख्यतः दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:

  • विरामावस्था का जड़त्व (Inertia of Rest): विराम में स्थित वस्तु की वह प्रवृत्ति जिसके कारण वह विराम में ही बने रहना चाहती है।
    दैनिक उदाहरण: जब एक खड़ी बस अचानक चल पड़ती है, तो उसमें बैठे यात्री पीछे की ओर गिर जाते हैं, क्योंकि यात्रियों के पैर बस के साथ गति में आ जाते हैं परंतु ऊपरी शरीर जड़त्व के कारण विराम में ही रहना चाहता है।
    दैनिक उदाहरण: दरी या कारपेट को डंडे से पीटने या अचानक झटका देने पर धूल के कण विरामावस्था के जड़त्व के कारण अपने स्थान पर रह जाते हैं और नीचे गिर जाते हैं।
    दैनिक उदाहरण: पेड़ की शाखा को तेजी से हिलाने पर उसमें लगे फल और सूखी पत्तियां टूटकर नीचे गिर जाती हैं।
  • गतिशील जड़त्व (Inertia of Motion): गतिमान वस्तु की वह प्रवृत्ति जिसके कारण वह एकसमान वेग से अपनी गति की अवस्था को बनाए रखना चाहती है।
    दैनिक उदाहरण: तेज गति से चलती हुई कार या बस में अचानक ब्रेक लगाने पर उसमें बैठे यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं। इसका कारण यह है कि ब्रेक लगाने पर गाड़ी और यात्री का निचला हिस्सा तुरंत विराम में आ जाता है, जबकि शरीर का ऊपरी भाग गतिशील जड़त्व के कारण गति की अवस्था में ही बना रहता है।
    दैनिक उदाहरण: चलती हुई ट्रेन या बस से अचानक बाहर कूदने वाले व्यक्ति को गाड़ी की गति की दिशा में कुछ दूर तक दौड़ना पड़ता है, अन्यथा वह आगे के बल के कारण मुँह के बल गिर जाएगा।
    दैनिक उदाहरण: पंखे का स्विच बंद कर देने के बाद भी वह जड़त्व के कारण कुछ समय तक घूमता रहता है।

न्यूटन का द्वितीय नियम (संवेग परिवर्तन का नियम - Law of Momentum)

नियम की प्रामाणिक परिभाषा:

न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी वस्तु के संवेग परिवर्तन की दर (Rate of Change of Momentum) उस वस्तु पर आरोपित बाह्य असंतुलित बल के सीधे समानुपाती (Directly Proportional) होती है, तथा यह परिवर्तन हमेशा आरोपित बल की ही दिशा में होता है। यह नियम हमें बल का परिमाण मापने का गणितीय सूत्र प्रदान करता है।

संवेग (Momentum):

किसी गतिशील वस्तु के द्रव्यमान ($m$) और उसके वेग ($v$) के गुणनफल को उस वस्तु का संवेग ($p$) कहते हैं।
$$\mathbf{p = m \cdot v}$$ यह एक सदिश राशि (Vector Quantity) है, जिसका एसआई (SI) मात्रक किग्रा$\cdot$मीटर/सेकंड ($\text{kg}\cdot\text{m/s}$) होता है।

गणितीय व्युत्पत्ति (Mathematical Derivation):

मान लीजिए $m$ द्रव्यमान की एक वस्तु प्रारंभिक वेग $u$ से गतिमान है। एक निश्चित बल $F$, समय $t$ तक लगाने पर उसका अंतिम वेग $v$ हो जाता है।
• प्रारंभिक संवेग $p_1 = mu$, अंतिम संवेग $p_2 = mv$
• संवेग में परिवर्तन $\Delta p = p_2 - p_1 = m(v - u)$
• संवेग परिवर्तन की दर = $\frac{m(v - u)}{t}$
न्यूटन के नियम से: $F \propto \frac{m(v - u)}{t}$
चूंकि त्वरण (Acceleration) $a = \frac{v - u}{t}$ होता है, अतः:
$$\mathbf{F = k \cdot m \cdot a}$$ (जहाँ $k$ एक आनुपातिक नियतांक है, जिसका मान SI पद्धति में 1 होता है।)
$$\mathbf{F = m \cdot a}$$ अर्थात्, बल = द्रव्यमान $\times$ त्वरण। बल का SI मात्रक न्यूटन (Newton - N) या किग्रा$\cdot$मीटर/सेकंड$^2$ होता है।

द्रव्यमान (Mass) और भार (Weight) में मौलिक अंतर:

प्रतियोगी परीक्षाओं में द्रव्यमान और भार के अंतर से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न बहुधा पूछे जाते हैं, जिन्हें इस सारणी से समझा जा सकता है:

विशिष्ट विशेषता द्रव्यमान (Mass) भार (Weight)
मूल परिभाषा यह वस्तु में उपस्थित पदार्थ की कुल मात्रा (Quantity of Matter) को दर्शाता है। यह वह आकर्षण बल है जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचती है ($W = mg$)।
राशि का प्रकार यह एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है। यह एक सदिश राशि (Vector Quantity) है, इसकी दिशा केंद्र की ओर होती है।
स्थान परिवर्तन का प्रभाव यह सदैव अपरिवर्तनीय व स्थिर रहता है (चाहे वस्तु चंद्रमा पर हो या अंतरिक्ष में)। यह स्थान बदलने पर परिवर्तनशील होता है, क्योंकि गुरुत्वीय त्वरण ($g$) का मान बदलता है।
मान शून्य होना किसी भी वस्तु का द्रव्यमान कभी भी शून्य नहीं हो सकता। अंतरिक्ष या पृथ्वी के केंद्र पर गुरुत्वाकर्षण अनुपस्थित होने से भार शून्य ($0$) हो सकता है।
मापन मात्रक इसे किलोग्राम ($\text{kg}$) में मापा जाता है। चूंकि यह एक बल है, इसे न्यूटन ($\text{N}$) या किग्रा-भार में मापते हैं।

द्वितीय नियम के व्यावहारिक उदाहरण:

  • क्रिकेटर द्वारा कैच पकड़ना: क्रिकेट मैच के दौरान फील्डर तेज गति से आती गेंद को कैच करते समय अपने हाथों को पीछे की ओर खींचता है। ऐसा करने से संवेग परिवर्तन का समय ($t$) बढ़ जाता है, जिससे हाथों पर लगने वाला आघात बल ($F$) कम हो जाता है और चोट नहीं लगती।
  • कराटे खिलाड़ी द्वारा बर्फ की सिल्ली तोड़ना: कराटे का खिलाड़ी अपने हाथ के एक ही तीव्र प्रहार से बर्फ की भारी सिल्ली या ईंटों की ढेरी को तोड़ देता है। प्रहार का समय अत्यंत सूक्ष्म होने के कारण संवेग परिवर्तन की दर बहुत उच्च हो जाती है, जिससे अत्यधिक बल उत्पन्न होता है।
  • ऊंची कूद के मैदान में गद्दे या रेत का होना: एथलेटिक्स में ऊंची कूद के खिलाड़ियों के लिए नीचे रेत या स्पंज के गद्दे बिछाए जाते हैं ताकि फर्श पर गिरते समय शरीर के स्थिर होने का समय बढ़ सके और चोट लगने का प्रभाव न्यूनतम हो।

न्यूटन का तृतीय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम - Action-Reaction Law)

नियम की प्रामाणिक परिभाषा:

इस नियम के अनुसार, "प्रत्येक क्रिया के समान परिमाण में तथा विपरीत दिशा में एक प्रतिक्रिया होती है।" अर्थात्, जब कोई एक वस्तु किसी दूसरी वस्तु पर कोई बल (क्रिया) आरोपित करती है, तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर तुरंत उतना ही बल (प्रतिक्रिया) विपरीत दिशा में आरोपित करती है। प्रकृति में बल कभी भी एकल (Isolated) रूप में नहीं पाए जाते, वे हमेशा युग्मों (Pairs) में क्रियाशील होते हैं।

नियम की मुख्य वैज्ञानिक विशेषताएं:

  • क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा दो अलग-अलग वस्तुओं पर एक साथ (Simultaneously) कार्य करते हैं, एक ही वस्तु पर नहीं।
  • ये बल परिमाण में पूर्णतः समान परंतु दिशा में परस्पर विपरीत ($180^\circ$) होते हैं।
  • चूंकि ये अलग-अलग पिंडों पर लगते हैं, इसलिए ये एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त (Cancel) नहीं कर सकते।

तृतीय नियम के दैनिक जीवन के प्रमुख उदाहरण:

  • रॉकेट का प्रक्षेपण (Rocket Propulsion): रॉकेट के इंजन में तीव्र दहन से अत्यधिक गर्म गैसें अत्यधिक उच्च वेग से नीचे के नोजल से बाहर (क्रिया) निकलती हैं। ये निष्कासित गैसें रॉकेट पर ऊपर की दिशा में एक समान बल की प्रतिक्रिया लगाती हैं, जिससे रॉकेट गुरुत्वाकर्षण को पार करते हुए ऊपर उड़ जाता है। यह 'रेखीय संवेग संरक्षण के सिद्धांत' (Conservation of Linear Momentum) पर भी आधारित है।
  • बंदूक से गोली दागने पर झटका लगना: जब बंदूक से गोली चलाई जाती है, तो बारूद के विस्फोट से गोली अत्यधिक वेग से आगे की ओर (क्रिया) बढ़ती है। इसके विपरीत, गोली भी बंदूक पर पीछे की ओर उतना ही बल लगाती है, जिससे बंदूक चलाने वाले के कंधे को पीछे की तरफ तीव्र झटका (प्रतिक्रिया) महसूस होता है।
  • नाव से किनारे पर कूदना: जब कोई व्यक्ति नाव से नदी के किनारे पर कूदता है, तो वह अपने पैरों से नाव को पीछे की ओर धकेलता है (क्रिया), जिसके परिणामस्वरूप नाव पीछे हट जाती है और प्रतिक्रिया स्वरूप व्यक्ति आगे किनारे पर पहुँच जाता है।
  • कुएं से पानी खींचते समय रस्सी का टूटना: यदि कुएं से पानी से भरी बाल्टी खींचते समय अचानक रस्सी टूट जाए, तो खींचने वाला व्यक्ति पीछे की ओर गिर जाता है, क्योंकि रस्सी द्वारा लगाया जा रहा खिंचाव बल (क्रिया) समाप्त हो जाता है और प्रतिक्रिया बल व्यक्ति को पीछे गिरा देता है।

बल के प्रकार (Types of Forces)

बल वह बाह्य कारक है जो किसी वस्तु की विराम या गति की अवस्था, आकार या दिशा में परिवर्तन करता है या परिवर्तन करने का प्रयास करता है। कार्यप्रणाली के आधार पर बल को दो मुख्य वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है:

1. संपर्क बल (Contact Forces):

ये वे बल हैं जो केवल तब क्रियाशील होते हैं जब दो या दो से अधिक वस्तुएं भौतिक रूप से एक-दूसरे के सीधे संपर्क में आती हैं:

  • घर्षण बल (Frictional Force): जब कोई वस्तु किसी सतह पर गति करती है या करने का प्रयास करती है, तो दोनों सतहों के मध्य उनकी सापेक्ष गति का विरोध करने वाला एक बल उत्पन्न होता है, जिसे घर्षण कहते हैं। यह सदैव गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है।
  • सामान्य बल (Normal Force): जब कोई वस्तु किसी ठोस सतह पर रखी होती है, तो वह सतह वस्तु के भार के विपरीत लंबवत ऊपर की ओर एक सहारा बल लगाती है।
  • तनाव बल (Tension Force): जब किसी रस्सी, केबल या तार को दोनों सिरों से खींचकर ताना जाता है, तो उसके भीतर लंबाई के अनुदिश उत्पन्न होने वाला खिंचाव बल तनाव कहलाता है।
  • वायु प्रतिरोध (Air Resistance): वायुमंडल में गति करने वाली वस्तुओं (जैसे हवाई जहाज, गिरती बूंदें) पर हवा के कणों द्वारा गति के विपरीत लगाया जाने वाला घर्षण बल।

2. असंपर्क बल (Non-Contact / Field Forces):

ये वे बल हैं जो वस्तुओं के मध्य बिना किसी भौतिक संपर्क के, एक निश्चित दूरी से ही उनके क्षेत्रों (Fields) के माध्यम से कार्य करते हैं:

  • गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force): ब्रह्मांड में किन्हीं भी दो द्रव्यमान युक्त पिंडों के बीच उनके द्रव्यमान के कारण लगने वाला पारस्परिक आकर्षण बल। यह प्रकृति का सबसे क्षीण (Weakest) बल है। पृथ्वी द्वारा वस्तुओं पर लगाया जाने वाला बल गुरुत्व बल कहलाता है।
  • चुंबकीय बल (Magnetic Force): किसी चुंबकीय क्षेत्र में दो चुम्बकों के समान ध्रुवों के बीच प्रतिकर्षण तथा असमान ध्रुवों या चुंबकीय पदार्थों (जैसे लोहा, कोबाल्ट) के बीच लगने वाला आकर्षण बल।
  • स्थिर वैद्युत बल (Electrostatic Force): दो स्थिर बिंदु आवेशों (Charged Particles) के मध्य लगने वाला आकर्षण या प्रतिकर्षण बल, जो कोलाम्ब के नियम से संचालित होता है (जैसे सूखे बालों में कंघी करने पर कागज के टुकड़ों का चिपकना)।

गति नियमों के व्यावहारिक एवं सुरक्षा अनुप्रयोग

  • सीट बेल्ट (Seat Belts) का महत्व: वाहनों में सुरक्षा के लिए सीट बेल्ट का प्रयोग न्यूटन के प्रथम नियम (जड़त्व) के खतरे को कम करने के लिए किया जाता है। तीव्र गति से चलती कार के अचानक रुकने पर हमारा शरीर गतिशील जड़त्व के कारण आगे विंडशील्ड से टकरा सकता है, सीट बेल्ट एक बाह्य बल लगाकर शरीर को सुरक्षित रोक लेती है।
  • वाहनों में एयरबैग (Airbags) तकनीक: आधुनिक कारों में एक्सीडेंट के समय खुलने वाले एयरबैग न्यूटन के द्वितीय नियम पर आधारित हैं। एयरबैग्स यात्री के सिर के टकराने के समय को बढ़ा देते हैं, जिससे संवेग परिवर्तन की दर धीमी हो जाती है और चेहरे व सिर पर लगने वाले बल का परिमाण अत्यंत न्यूनतम हो जाता है।
  • जेट इंजन और होवरक्राफ्ट: विमानों के जेट इंजन वायु को अत्यधिक संपीड़ित करके पीछे छोड़ते हैं (क्रिया) और आगे की ओर थ्रस्ट या प्रणोद प्राप्त करते हैं (प्रतिक्रिया), जो न्यूटन के तृतीय नियम का प्रत्यक्ष अनुप्रयोग है।

भौतिकी समस्याओं के समाधान की प्रामाणिक रणनीति

RPSC मुख्य परीक्षा या संख्यात्मक प्रश्नों (Numericals) को हल करते समय निम्नलिखित वैज्ञानिक चरणों का निष्पादन किया जाना चाहिए:

  1. दत्त सामग्री का विश्लेषण: प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गई ज्ञात राशियों (जैसे द्रव्यमान $m$, प्रारंभिक वेग $u$, समय $t$) को चिन्हों के साथ सूचीबद्ध करें।
  2. अज्ञात राशि की पहचान: ज्ञात करें कि क्या ज्ञात करना है (जैसे बल $F$ या त्वरण $a$)।
  3. मुक्त पिंड आरेख (Free Body Diagram - FBD) निर्माण: दी गई वस्तु को एक बिंदु द्रव्यमान मानकर उस पर लग रहे सभी बलों (जैसे भार $mg$, सामान्य बल $N$, घर्षण $f$) को तीरों द्वारा निरूपित करें।
  4. समीकरण अनुप्रयोग: उपयुक्त सूत्र ($F=ma$ या $p=mv$) का चयन करें और सभी मानों को मानक SI इकाइयों में परिवर्तित कर समीकरण में रखें।
  5. तार्किक जाँच: प्राप्त उत्तर के मात्रक (जैसे बल के लिए न्यूटन) की जाँच करें कि क्या वह भौतिक रूप से तर्कसंगत है।
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