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विटामिन्स एवं खनिज: रासायनिक नाम, स्रोत और उनकी कमी से होने वाले रोग

1 min read 163 views 03 Sep 2026 General Science ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विटामिन्स और खनिजों के रासायनिक नाम, प्राकृतिक स्रोत और उनकी कमी से होने वाले रोगों का विस्तृत अध्ययन।
Key Points
  • विटामिन्स दो प्रकार के होते हैं: वसा में घुलनशील (A, D, E, K) और जल में घुलनशील (B कॉम्प्लेक्स, C)
  • विटामिन A (रेटिनॉल) की कमी से रतौंधी और विटामिन C (एस्कॉर्बिक एसिड) की कमी से स्कर्वी होता है
  • आयरन की कमी से एनीमिया और आयोडीन की कमी से गलगंड (गॉइटर) होता है
  • कैल्शियम हड्डियों और दांतों के लिए आवश्यक है, इसकी कमी से ऑस्टियोपोरोसिस होता है
  • भारत में प्रमुख पोषणीय समस्याएं आयरन, विटामिन A और आयोडीन की कमी से जुड़ी हैं

विटामिन्स (Vitamins)

विटामिन्स जटिल कार्बनिक यौगिक हैं जो हमारे शरीर के सामान्य जैव-रासायनिक कार्यों, वृद्धि एवं प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। यद्यपि शरीर को इनकी सूक्ष्म मात्रा में आवश्यकता होती है, परंतु इनकी कमी से गंभीर उपापचयी (Metabolic) विकार उत्पन्न हो जाते हैं। विटामिन्स को उनकी घुलनशीलता के आधार पर दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है: जल में घुलनशील (Water Soluble) और वसा में घुलनशील (Fat Soluble)।

वसा में घुलनशील विटामिन्स (Fat Soluble Vitamins)

ये विटामिन वसा तथा कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होते हैं और शरीर के यकृत (Liver) तथा वसीय ऊतकों (Adipose Tissues) में संचित हो सकते हैं। अत्यधिक मात्रा में लेने पर ये शरीर में विषाक्तता (Hypervitaminosis) भी उत्पन्न कर सकते हैं।

विटामिन रासायनिक नाम मुख्य स्रोत कमी से होने वाले रोग एवं लक्षण
विटामिन A रेटिनॉल (Retinol) गाजर, पालक, पपीता, दूध, मक्खन, अंडे की जर्दी, मछली का तेल (कॉर्ड लीवर ऑयल) रतौंधी (Night Blindness): मंद प्रकाश में दिखाई न देना।
जेरोफ्थैल्मिया (Xerophthalmia): कॉर्निया का शुष्क व धुंधला हो जाना।
विटामिन D कैल्सिफेरॉल (Calciferol) सूर्य का प्रकाश (त्वचा में स्वतः संश्लेषण), मछली का तेल, अंडे, दूध व डेयरी उत्पाद रिकेट्स (Rickets): बच्चों में हड्डियों का कमजोर व टेढ़ा होना।
ऑस्टियोमलेशिया: वयस्कों में अस्थि घनत्व कम होना व रीढ़ में दर्द।
विटामिन E टोकोफेरॉल (Tocopherol) वनस्पति तेल (गेहूं के अंकुर का तेल), हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम, सूरजमुखी के बीज प्रजनन क्षमता में कमी: जनन ग्रंथियों की कार्यशीलता का घटना।
मांसपेशियों की कमजोरी व लाल रक्त कणिकाओं (RBC) का टूटना।
विटामिन K फिलोक्विनोन (Phylloquinone) हरी पत्तेदार सब्जियां, पत्तागोभी, पालक, ब्रोकली, यकृत रक्त का थक्का न बनना (Hypoprothrombinemia): चोट लगने पर अत्यधिक रक्तस्राव होना।

जल में घुलनशील विटामिन्स (Water Soluble Vitamins)

ये विटामिन जल में घुलनशील होते हैं और शरीर में संचित नहीं किए जा सकते, क्योंकि ये मूत्र के माध्यम से उत्सर्जित हो जाते हैं। इन्हें प्रतिदिन आहार के रूप में लेना आवश्यक होता है।

विटामिन रासायनिक नाम मुख्य स्रोत कमी से होने वाले रोग एवं प्रभाव
विटामिन B1 थायमिन (Thiamine) बिना पॉलिश किए हुए अनाज, दालें, खमीर (Yeast), मांस, मछली, मूंगफली बेरी-बेरी (Beri-Beri): हृदय पेशियों का कमजोर होना व न्यूराइटिस (तंत्रिका शोथ)।
विटामिन B2 राइबोफ्लेविन (Riboflavin) दूध, अंडे, हरी सब्जियां, यकृत, खमीर अरिबोफ्लेविनोसिस: होंठों के कोनों का फटना (Cheilosis), जीभ में सूजन (Glossitis)।
विटामिन B3 नियासिन / निकोटिनिक एसिड (Niacin) मांस, मछली, मूंगफली, खमीर, साबुत अनाज पेलाग्रा (Pellagra): 3-D रोग (Dermatitis — त्वचा रोग, Diarrhea — अतिसार, Dementia — मानसिक अवसाद)।
विटामिन B6 पाइरिडोक्सिन (Pyridoxine) अनाज, मांस, सब्जियां, केला, यकृत माइक्रोसाइटिक एनीमिया (रक्तअल्पता), न्यूराइटिस व केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में ऐंठन।
विटामिन B12 साइनोकोबालामिन (Cyanocobalamin) मांस, मछली, दूध, अंडे, यकृत (नोट: यह वनस्पतियों में नहीं पाया जाता) पर्निशियस एनीमिया (Pernicious Anemia): हीमोग्लोबिन व परिपक्व RBC की भारी कमी, तंत्रिका तंत्र में विकार। इसमें कोबाल्ट धातु पाई जाती है।
विटामिन C एस्कॉर्बिक एसिड (Ascorbic Acid) नींबू, संतरा, आंवला (सर्वोत्तम स्रोत), टमाटर, हरी मिर्च, खट्टे फल स्कर्वी (Scurvy): मसूड़ों से खून आना, आंतरिक रक्तस्राव, घाव भरने में अत्यधिक समय लगना।

खनिज पदार्थ (Minerals)

खनिज पदार्थ अकार्बनिक तत्व हैं जो शरीर के समुचित विकास, ऊतकों के निर्माण, एंजाइम सक्रियता और परासरणी दाब (Osmotic Pressure) के नियंत्रण के लिए अनिवार्य हैं। इन्हें शरीर में आवश्यक मात्रा के आधार पर दीर्घ मात्रिक (Macro Minerals) और लघु मात्रिक (Micro Minerals/Trace Elements) में विभाजित किया जाता है।

मुख्य खनिज पदार्थ

खनिज तत्व मुख्य स्रोत मुख्य जैविक कार्य कमी से होने वाले रोग व प्रभाव
कैल्शियम (Ca) दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, रागी, छोटी मछलियाँ हड्डियों और दांतों का सुदृढ़ीकरण, रक्त का थक्का जमाना (Blood Clotting), तंत्रिका संचरण ऑस्टियोपोरोसिस (वयस्कों में), टेटनी (Tetany), दांतों का कमजोर होना।
आयरन (Fe) हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक), मांस, अंडे, दालें, गुड़, सेब लाल रक्त कणिकाओं में हीमोग्लोबिन का निर्माण, ऑक्सीजन का परिवहन एनीमिया (रक्तअल्पता): रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी, थकान, शारीरिक कमजोरी।
फास्फोरस (P) दूध, मांस, मछली, अनाज, नट्स कैल्शियम के साथ मिलकर हड्डियों और दांतों का निर्माण, ATP के रूप में ऊर्जा उत्पादन हड्डियों की कमजोरी व भंगुरता, मांसपेशियों में तीव्र दर्द।
आयोडीन (I) आयोडीन युक्त समुद्री नमक, समुद्री मछली, समुद्री सलाद (सी-वीड) थायरॉइड ग्रंथि द्वारा थायरोक्सिन हार्मोन का संश्लेषण गलगंड / घेंघा रोग (Goiter): थायरॉइड ग्रंथि का फूलना, बच्चों में जड़मानवता (Mental retardation)।
जिंक (Zn) मांस, दालें, नट्स, कद्दू के बीज, साबुत अनाज इम्यून सिस्टम का सुदृढ़ीकरण, घाव भरना, इंसुलिन हार्मोन की सक्रियता घाव भरने में अत्यधिक देरी, त्वचा विकार, रोग प्रतिरोधक क्षमता का घटना।
मैग्नीशियम (Mg) हरी पत्तेदार सब्जियां (क्लोरोफिल का घटक), नट्स, साबुत अनाज 300 से अधिक एंजाइमों की क्रियाशीलता, न्यूरो-मस्कुलर फंक्शन (तंत्रिका-पेशीय कार्य) मांसपेशियों में ऐंठन (Cramps), तंत्रिका तंत्र की अत्यधिक संवेदनशीलता, अनियमित दिल की धड़कन।

विशिष्ट खनिज और उनके महत्वपूर्ण कार्य

  • सोडियम (Sodium - Na): कोशिका बाह्य तरल में मुख्य धनायन। यह शरीर में द्रव व परासरणी संतुलन बनाए रखने तथा तंत्रिका आवेगों के संचरण में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
  • पोटैशियम (Potassium - K): कोशिका आंतरिक तरल का मुख्य धनायन। यह मांसपेशियों के संकुचन, तंत्रिका आवेग संचरण और हृदय की नियमित धड़कन (Heart Rhythm) को नियंत्रित करता है।
  • सल्फर (Sulfur - S): मिथियोनिन और सिस्टीन जैसे महत्वपूर्ण अमीनो अम्लों का घटक है जो प्रोटीन संश्लेषण और बालों/नाखूनों के स्वास्थ्य के लिए सहायक है।
  • मैंगनीज (Manganese - Mn): यूरिया निर्माण, उपास्थि व हड्डियों के विकास तथा एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम प्रणालियों में सह-कारक (Co-factor) के रूप में कार्य करता है।
  • कॉपर (Copper - Cu): लोहे (Iron) के अवशोषण, हीमोग्लोबिन संश्लेषण और इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला में अत्यंत सहायक होता है।

कमी के रोगों की विस्तृत जानकारी (Deficiency Diseases)

प्रमुख कमी जन्य रोग एवं उनके लक्षण

  • रतौंधी (Night Blindness): विटामिन A की कमी से शलाका कोशिकाओं (Rod Cells) में रोडोप्सिन रंजक का निर्माण बाधित होता है, जिससे मंद प्रकाश या रात्रि में दिखाई नहीं देता।
  • स्कर्वी (Scurvy): विटामिन C की कमी से कोलाजन प्रोटीन का संश्लेषण रुक जाता है, जिससे मसूड़ों से निरंतर रक्तस्राव होता है तथा रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं।
  • रिकेट्स (Rickets): विटामिन D या कैल्शियम की कमी से बच्चों की लंबी अस्थियां (जैसे फीमर व टिबिया) भार सहन न कर पाने के कारण मुड़ जाती हैं, जिसे 'बो-लेग्स' भी कहते हैं।
  • बेरी-बेरी (Beri-Beri): थायमिन की कमी से होने वाला रोग है। शुष्क बेरी-बेरी तंत्रिका तंत्र को (पैरेलिसिस) तथा आर्द्र बेरी-बेरी हृदय परिसंचरण तंत्र को प्रभावित करता है।
  • पेलाग्रा (Pellagra): विटामिन B3 की दीर्घकालिक कमी से होता है। इसे '4-D सिंड्रोम' भी कहा जाता है, जिसमें त्वचा पर गंभीर पपड़ीदार सूजन आ जाती है।
  • एनीमिया (Anemia): शरीर में आयरन, विटामिन B6 या विटामिन B12 की कमी से लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण कम हो जाता है, जिससे ऊतकों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति घटने से तीव्र थकान होती है।

भारतीय संदर्भ में पोषण संबंधी चुनौतियां

भारत में वर्तमान परिदृश्य (वर्ष 2026 की नवीनतम स्वास्थ्य रिपोर्टों व राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार) में पोषण संबंधी प्रमुख चुनौतियां निम्नलिखित हैं:

  • सूक्ष्म पोषक तत्वों की भुखमरी (Hidden Hunger): पेट भरने के बावजूद भोजन में आवश्यक विटामिन्स और खनिजों की भारी कमी होना।
  • एनीमिया का उच्च प्रसार: आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया भारत में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो विशेषकर किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों में सर्वाधिक देखा जाता है।
  • विटामिन A की कमी: ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों के बच्चों में इसके कारण अंधापन और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता की समस्या बनी हुई है।
  • आयोडीन अल्पता विकार: तटीय क्षेत्रों को छोड़कर देश के पहाड़ी और मैदानी भागों की मृदा व जल में आयोडीन की कमी के कारण घेंघा और बच्चों में मंदबुद्धिता की समस्या देखी जाती है।
  • कैल्शियम और विटामिन D की कमी: शहरीकरण और धूप के कम संपर्क के कारण शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस की दर बढ़ी है।

रोकथाम एवं सुधारात्मक उपाय

  1. संतुलित एवं विविधीकृत आहार: भोजन में केवल अनाज पर निर्भर न रहकर हरी सब्जियों, दालों, फलों और दुग्ध उत्पादों को अनिवार्य रूप से शामिल करना।
  2. खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification): सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से फोर्टिफाइड चावल (आयरन व विटामिन युक्त) और आयोडीन/लोहा युक्त दोहरे फोर्टिफाइड नमक का वितरण।
  3. आयोडीन युक्त नमक का सार्वभौमिक उपयोग: भोजन में केवल प्रामाणिक आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग सुनिश्चित करना।
  4. लक्षित पूरक आहार योजनाएं: गर्भवती महिलाओं को आयरन-फॉलिक एसिड की गोलियां तथा बच्चों को विटामिन A की उच्च खुराक की खुराकें समय पर देना।
  5. नियमित स्वास्थ्य जांच एवं पोषण शिक्षा: सामुदायिक स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से कुपोषण के लक्षणों की शीघ्र पहचान व जागरूकता अभियान चलाना।
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