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NCERT सार संकलन: प्राचीन धार्मिक आंदोलन, जैन व बौद्ध धर्म

1 min read 121 views 02 Sep 2026 Indian GK ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
कक्षा VI-XII NCERT सार संकलन पर आधारित प्राचीन धार्मिक आंदोलन (जैन धर्म, बौद्ध धर्म, शैव, वैष्णव, इस्लाम, ईसाई व पारसी धर्म) के प्रमुख सिद्धांत, सम्प्रदाय व संगीतियाँ।
Key Points
  • जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी का जन्म 540 ई.पू. में कुण्डग्राम (वैशाली) में हुआ था तथा उन्हें ऋजुपालिका नदी के तट पर ज्ञान प्राप्त हुआ।
  • प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई, जिसके परिणामस्वरुप जैन धर्म श्वेताम्बर एवं दिगम्बर मतों में विभाजित हो गया।
  • गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई.पू. में लुम्बिनी में हुआ था तथा उन्होंने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में पाली भाषा में दिया था।
  • कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर के कुण्डलवन में चतुर्थ बौद्ध संगीति आयोजित हुई, जिसमें बौद्ध धर्म हीनयान और महायान शाखाओं में बंट गया।
  • वामन पुराण में शैव सम्प्रदाय की संख्या चार बताई गई है, जिसमें पाशुपत सम्प्रदाय सबसे प्राचीन है और इसके संस्थापक लकुलीश थे।
  • वैष्णव धर्म के प्रवर्तक वासुदेव कृष्ण थे, जिनका सर्वप्रथम उल्लेख छान्दोग्य उपनिषद् में मिलता है और विष्णु के दस अवतारों का वर्णन मत्स्यपुराण में है।
  • आजीवक सम्प्रदाय के संस्थापक मक्खलि गोशाल थे, जबकि अद्वैत मत का प्रतिपादन शंकराचार्य एवं बादरायण द्वारा किया गया था।

भाग 1: जैन धर्म — सिद्धांत, संगीतियाँ एवं साहित्य

जैन धर्म के संस्थापक 'सम्राट भरत' के पिता ऋषभदेव को माना जाता है। पार्श्वनाथ के अनुयायियों को 'निर्ग्रन्थ' कहा जाता था। महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें एवं अन्तिम तीर्थंकर थे।

1. महावीर स्वामी का जीवन परिचय

  • जन्म एवं माता-पिता — महावीर का जन्म 540 ई.पू. में कुण्डग्राम (वैशाली) में हुआ था। इनके पिता सिद्धार्थ 'ज्ञातृक क्षत्रियों के संघ' के सरदार थे और माता त्रिशला (विदेहदत्ता) लिच्छवी राजा चेटक की बहन थीं।
  • ज्ञान की प्राप्ति — 12 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद महावीर को जृम्भिक ग्राम के समीप ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे सम्पूर्ण ज्ञान (कैवल्य) का बोध हुआ। इसी समय से महावीर 'जिन' (विजेता), 'अर्हत्' (पूज्य) और 'निर्ग्रन्थ' (बंधनहीन) कहलाए।
  • विवाह एवं संतान — महावीर का विवाह कौण्डिन्य गोत्र की कन्या यशोदा के साथ हुआ। इनकी पुत्री का नाम 'अणोज्जा' या 'प्रियदर्शनी' था।
  • उपदेश एवं निर्वाण — इन्होंने अपने उपदेश प्राकृत (अर्धमागधी) भाषा में दिए। महावीर ने अपने शिष्यों को 11 गणधरों में विभाजित किया था। 468 ई.पू. में (72 वर्ष की आयु) राजगृह के समीप पावापुरी नामक स्थान पर मल्लराजा सुसितपाल के राजप्रासाद में इन्हें निर्वाण प्राप्त हुआ।

2. जैन सिद्धांत, संगीतियाँ एवं साहित्य

महावीर ने गृहस्थों के लिए पाँच अणुव्रत बताएं हैं— 1. सत्य वचन, 2. अहिंसा, 3. अस्तेय (चोरी नहीं करना), 4. अपरिग्रह (सांसारिक वस्तुओं का त्याग), तथा 5. ब्रह्मचर्य। पुनर्जन्म के कर्मफल को समाप्त करने के लिए इन्होंने 'त्रिरत्न' का सिद्धांत दिया: सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन एवं सम्यक् चरित्र।

जैन संगीति काल स्थान शासन काल अध्यक्ष परिणाम
प्रथम 300 ई.पू. पाटलिपुत्र चन्द्रगुप्त मौर्य स्थूलभद्र जैन धर्म का श्वेताम्बर एवं दिगम्बर मतों में विभाजन
द्वितीय द्वितीय शताब्दी ई.पू. कलिंग कलिंग राज खारवेल आचार्य संभूति जैन धर्म के प्रधान भाग 12 अंगों का संपादन हुआ
तृतीय प्रथम सदी आंध्र प्रदेश - आचार्य अर्हद्बलि अंगों का संकलन
चतुर्थ चौथी सदी वल्लभी - आचार्य नागार्जुन सूरि धर्मग्रंथों का पुनः विवेचन हेतु किया गया
पंचम पाँचवी सदी वल्लभी - आचार्य देवर्धि क्षमाश्रमण धर्मशास्त्रों को शुद्ध रूप में संकलन हेतु किया गया
  • जैन साहित्य (आगम) — जैन साहित्य को 'आगम' (सिद्धांत) कहा जाता है। इसके अंतर्गत 12 अंग, 12 उपांग, 10 प्रकीर्ण, 6 छेदसूत्र, 4 मूलसूत्र एवं अनुयोग सूत्र आते हैं। जैन तीर्थंकरों की जीवनी भद्रबाहु द्वारा रचित 'कल्पसूत्र' (संस्कृत) में है।
  • प्रमुख सम्प्रदाय — चन्द्रगुप्त मौर्य के काल में मगध में अकाल पड़ने पर भद्रबाहु के नेतृत्व में कुछ जैन भिक्षु कर्नाटक चले गए। लौटकर आने पर मतभेद के कारण जैन धर्म दो सम्प्रदायों में बंट गया— श्वेत वस्त्र धारण करने वाले 'श्वेताम्बर' (स्थूलभद्र के नेतृत्व में) तथा नग्न रहने वाले 'दिगम्बर' (भद्रबाहु के नेतृत्व में)।

भाग 2: बौद्ध धर्म — बुद्ध का जीवन, शिक्षाएं एवं महासभाएं

बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) का जन्म 563 ई.पू. कपिलवस्तु के समीप लुम्बिनी वन में हुआ था। इनके पिता शुद्धोधन शाक्यगण के प्रधान थे तथा माता मायादेवी कोलीय गणराज्य की कन्या थीं।

1. गौतम बुद्ध से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य एवं घटनाएँ

घटना / प्रतीक नाम / विवरण महत्व / विशेषता
महाभिनिष्क्रमण गृह त्याग (घोड़ा प्रतीक) सांसारिक दुखों से व्यथित होकर 29 वर्ष की अवस्था में गृहत्याग किया।
प्रथम गुरु आलार कलाम वैशाली में इनसे सांख्य दर्शन की शिक्षा ग्रहण की।
सम्बोधन (ज्ञान प्राप्ति) पीपल वृक्ष / बोधगया (बोधि प्रतीक) उरुवेला में 6 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख पूर्णिमा की रात निरंजना (फल्गु) नदी के किनारे ज्ञान प्राप्त हुआ।
धर्मचक्रप्रवर्तन सारनाथ (ऋषिपत्तनम) बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया। उपदेशों की मुख्य भाषा 'पाली' थी।
महापरिनिर्वाण कुशीनारा (स्तूप प्रतीक) 483 ई.पू. में 80 वर्ष की आयु में कुशीनारा (देवरिया, उ.प्र.) में चुन्द द्वारा सुकर मौंस खिलाए जाने के बाद बुद्ध की मृत्यु हुई।

2. बौद्ध सिद्धांत एवं बौद्ध महासभाएं

बुद्ध ने चार आर्य सत्यों का उपदेश दिया— 1. दुःख, 2. दुःख समुदाय, 3. दुःख निरोध तथा 4. दुःख निरोधगामी प्रतिपदा। सांसारिक दुखों से मुक्ति हेतु बुद्ध ने 'अष्टांगिक मार्ग' (सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाक्, सम्यक् कर्मान्त, सम्यक् आजीविका, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि) की बात कही।

सभा समय स्थान अध्यक्ष शासनकाल कार्य विशेषता
प्रथम 483 ई.पू. राजगृह महाकश्यप अजातशत्रु सुत्तपिटक तथा विनय पिटक का संग्रहण
द्वितीय 383 ई.पू. वैशाली सर्वकामी कालाशोक बौद्धसंघ स्थविर तथा महासांघिक में बँटा
तृतीय 251 ई.पू. पाटलिपुत्र मोग्गलिपुत्त तिस्स अशोक अभिधम्म पिटक को संकलित कर कथावत्थु को जोड़ा गया
चतुर्थ प्रथम सदी ई. कुण्डलवन (कश्मीर) वसुमित्र (अध्यक्ष) / अश्वघोष (उपाध्यक्ष) कनिष्क विभाषाशास्त्र का संकलन एवं बौद्ध धर्म महायान तथा हीनयान में बँटा

भाग 3: अन्य प्रमुख सम्प्रदाय (शैव, वैष्णव, इस्लाम, ईसाई व पारसी)

प्राचीन काल से ही भारत में विभिन्न धर्मों और मतों का उदय हुआ, जिन्होंने भारतीय दर्शन और संस्कृति को प्रभावित किया।

1. शैव धर्म एवं वैष्णव धर्म

  • शैव धर्म — ऋग्वेद में शिव के लिए 'रुद्र' नामक देवता का उल्लेख है। वामन पुराण में शैव सम्प्रदाय की संख्या चार (पाशुपत, कापालिक, कालामुख और लिंगायत) बताई गई है। पाशुपत सम्प्रदाय सबसे प्राचीन है, जिसके संस्थापक लकुलीश थे। दक्षिण में शैव धर्म का प्रचार 'नयनारों' (संख्या 63) द्वारा किया गया।
  • वैष्णव धर्म — भागवत धर्म के संस्थापक वृष्णि वंशीय यादव कुल के नेता वासुदेव कृष्ण थे। श्रीकृष्ण का उल्लेख सर्वप्रथम छान्दोग्य उपनिषद् में मिलता है। विष्णु के दस अवतारों का उल्लेख 'मत्स्यपुराण' में मिलता है। दक्षिण में इसका प्रचार 'अलवार' संतों (संख्या 12) द्वारा किया गया।

2. इस्लाम, ईसाई एवं पारसी धर्म

  • इस्लाम धर्म — संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब थे। इनका जन्म 570 ई. में मक्का में हुआ था। 610 ई. में मक्का के पास हीरा नामक गुफा में ज्ञान की प्राप्ति हुई। 24 सितम्बर, 622 ई. को पैगम्बर के मक्का से मदीना की यात्रा को हिजरी संवत् के नाम से जाना जाता है। पवित्र ग्रंथ कुरान है।
  • ईसाई धर्म — संस्थापक ईसा मसीह का जन्म जेरुशलम के निकट बैथलेहम नामक स्थान पर हुआ था। इनका प्रमुख ग्रंथ 'बाइबिल' है। ईसा मसीह को 33 ई. में रोमन गवर्नर पोंटियस ने सूली पर चढ़ाया था।
  • पारसी धर्म — पारसी धर्म के पैगम्बर जरथुस्ट्र (ईरानी) थे। इनकी शिक्षाओं का संकलन 'जेन्द अवेस्ता' नामक धार्मिक ग्रंथ में है। ये एक ईश्वर 'अहुर' को मानते हैं।

3. प्रमुख धर्म-मत तथा उनके संस्थापक

क्र.सं. सम्प्रदाय / मत संस्थापक
1 पाशुपत लकुलीश
2 प्रत्यभिज्ञा वसुगुप्त
3 स्पंदशास्त्र कलत ओर सोम्नांद
4 लिंगायत बासव
5 अद्वैत शंकराचार्य एवं बादरायण
6 विशिष्टाद्वैत एवं श्री सम्प्रदाय रामानुजाचार्य
7 ब्रह्म सम्प्रदाय माधवाचार्य
8 सनक सम्प्रदाय निम्बार्काचार्य
9 आजीवक मक्खलि गोशाल
10 नित्यवादी प्रकुध कच्चायन
11 घोर अक्रियवादी संजय वेटठलिपुत्र
12 भौतिकवादी (यादृच्छाया) पूरण कश्यप
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