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मराठा साम्राज्य, विदेशी यात्री व प्रमुख युद्ध

1 min read 131 views 03 Sep 2026 Indian GK ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
कक्षा VI-XII NCERT सार संकलन पर आधारित छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास, अष्टप्रधान मन्त्रिमण्डल, मराठा पेशवा, मध्यकालीन विदेशी यात्री एवं प्रमुख युद्धों की विस्तृत सूची।
Key Points
  • मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 1627 ई. में शिवनेर के दुर्ग में हुआ था तथा उन्होंने रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया.
  • मिर्ज़ा राजा जयसिंह और शिवाजी महाराज के मध्य 23 जून, 1665 ई. को ऐतिहासिक पुरन्दर की सन्धि संपन्न हुई थी.
  • शिवाजी महाराज के मन्त्रिमण्डल को 'अष्टप्रधान' कहा जाता था, जिसमें राज्य के प्रशासन व अर्थव्यवस्था की देखरेख करने वाला प्रधान पद 'पेशवा' का था.
  • मराठा काल में पड़ोसी राज्यों से सुरक्षा के एवज में वसूला जाने वाला कर 'चौथ' और पुश्तैनी अधिकार के रूप में लिया जाने वाला कर 'सरदेशमुखी' कहलाता था.
  • मोरक्को का प्रसिद्ध यात्री इब्नबतूता 1333 ई. में दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत आया था.
  • मुगल काल में सम्राट जहाँगीर के दरबार में व्यापारिक रियायतें प्राप्त करने हेतु आने वाले ब्रिटिश यात्री कैप्टन हॉकिन्स और सर थॉमस रो थे.
  • पानीपत का प्रथम युद्ध 21 अप्रैल, 1526 ई. को बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच हुआ, जिसने भारत में मुगल साम्राज्य की आधारशिला रखी.

भाग 1: मराठा शक्ति का अभ्युदय — छत्रपति शिवाजी महाराज व प्रशासन

मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 20 अप्रैल, 1627 ई. को शिवनेर के दुर्ग में हुआ था। इनके पिता का नाम शाहजी भोंसले तथा माता का नाम जीजाबाई था। इनके गुरु दादाजी कोंडदेव थे, यद्यपि आध्यात्मिक क्षेत्र में इन पर समर्थ गुरु रामदास का प्रभाव था। इन्होंने 1656 ई. में रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया।

1. शिवाजी महाराज का कालक्रम एवं उत्तराधिकारी

  • महत्वपूर्ण घटनाएँ — इन्होंने सर्वप्रथम 1646 ई. में बीजापुर रियासत के तोरण किले पर अधिकार किया। अप्रैल 1663 ई. में इन्होंने मुगल सूबेदार शाइस्ता खाँ के निवास स्थान पर आक्रमण कर उसकी अंगुली काट दी। 1664 एवं 1670 ई. में इन्होंने सूरत में भयंकर लूटपाट की।
  • पुरन्दर की सन्धि (23 जून, 1665 ई.) — यह सन्धि मुगल सेनापति मिर्ज़ा राजा जयसिंह व शिवाजी के बीच हुई, जिसके तहत शिवाजी ने 23 किले मुगलों को देकर मात्र 12 किले अपने अधिकार में रखे। मई 1666 ई. में इन्हें आगरा के जयपुर भवन में कैद किया गया, जहाँ से ये 16 अगस्त, 1666 ई. में भाग निकले।
  • राज्याभिषेक एवं मृत्यु — 5 जून, 1674 ई. को शिवाजी ने रायगढ़ में वाराणसी के प्रसिद्ध विद्वान श्री गंगाभट्ट द्वारा अपना राज्याभिषेक करवाया तथा 'छत्रपति', 'हैन्दव धर्मोद्धारक' एवं 'गौब्राह्मण प्रतिपालक' की उपाधि धारण की। 14 अप्रैल, 1680 ई. को मात्र 53 वर्ष की आयु में इनकी मृत्यु हो गई।
  • उत्तराधिकारी — इनके बाद शम्भा जी (1680-89 ई.) शासक बने, जिनकी हत्या 1689 में औरंगज़ेब ने करवा दी। इसके बाद क्रमशः राजाराम (1689-1700 ई.), शिवाजी II व उनकी संरक्षिका ताराबाई (1700-07 ई.), और शाहू जी (1707-49 ई.) शासक बने। शाहू जी ने खेड़ा के युद्ध (1707 ई.) में ताराबाई को पराजित किया था।

2. शिवाजी के 'अष्टप्रधान' (मन्त्रिमण्डल)

शिवाजी के मन्त्रिमण्डल को 'अष्टप्रधान' कहा जाता था, जिसमें पेशवा का पद सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं सम्मान का होता था:

पद का नाम प्रशासनिक दायित्व / विभाग पद का नाम प्रशासनिक दायित्व / विभाग
पेशवा (प्रधानमन्त्री) राज्य का प्रशासन एवं अर्थव्यवस्था की देख-रेख। चितनिस राजकीय पत्रों को पढ़कर उसकी भाषा-शैली देखना।
सर-ए-नौबत (सेनापति) सैन्य विभाग का प्रधान। सुमन्त विदेशी मन्त्री / विदेश विभाग।
अमात्य (राजस्व मन्त्री) आय-व्यय का लेखा-जोखा रखने वाला अधिकारी। पण्डित राव धार्मिक कार्यों से सम्बन्धित अधिकारी।
वाकयानवीस सूचना मन्त्री, गुप्तचर एवं सन्धि-विग्रह विभाग। न्यायाधीश न्याय विभाग का प्रधान।

3. मराठा प्रशासनिक व सैन्य व्यवस्था

  • कर व्यवस्था (चौथ व सरदेशमुखी) — शिवाजी की कर व्यवस्था मलिक अम्बर की कर-व्यवस्था पर आधारित थी, जिसमें रस्सी के स्थान पर काठी एवं मानक छड़ी का प्रयोग किया जाता था। भूराजस्व प्रारम्भ में कुल उपज का 33% था, जो बाद में बढ़ाकर 40% कर दिया गया।
    • चौथ — यह पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण नहीं करने के एवज में वसूला जाने वाला कर था (कुल आय का 1/4 भाग)। इसका विभाजन 'वावती' (25% छत्रपति हेतु), 'सहोत्रा' (6% पन्त सचिव हेतु) और 'नादगोंडा' (3% छत्रपति के विवेक पर) के रूप में होता था। शेष 66% 'मोकासा' (मराठा घुड़सवारों को) जाता था।
    • सरदेशमुखी — यह कर शिवाजी इसलिए वसूल करते थे क्योंकि वह महाराष्ट्र के पुश्तैनी सरदेशमुख (प्रधान मुखिया) थे (कुल आय का 10% भाग)।
  • सैन्य वर्गीकरण — सेना 3 भागों में बंटी थी: पागा सेना (नियमित घुड़सवार सैनिक), सिलहदार (अस्थायी घुड़सवार सैनिक) और पैदल सेना।

4. मराठा पेशवा काल (1713 ई. — 1818 ई.)

  • बालाजी विश्वनाथ (1713-20 ई.) — शाहू जी ने इन्हें पेशवा बनाया। 1719 ई. में इनके और हुसैन अली (मुगल प्रतिनिधि) के बीच हुई सन्धि को रिचर्ड टेम्पल ने मराठा साम्राज्य का 'मैग्नाकार्टा' कहा है।
  • बाजीराव प्रथम (1720-40 ई.) — दिल्ली पर आक्रमण करने वाला प्रथम पेशवा बाजीराव प्रथम था, जिसने 29 मार्च, 1737 ई. को दिल्ली पर धावा बोला था।
  • बाला जी बाजीराव (1740-61 ई.) — इन्हें 'नाना साहब' के नाम से भी जाना जाता है।
  • पेशवा बाजीराव-II (अन्तिम पेशवा) — अंग्रेजों के सम्मुख आत्मसमर्पण करने के बाद अंग्रेजों ने पेशवा के पद को समाप्त कर इन्हें कानपुर के निकट बिठूर में पेंशन देकर भेज दिया, जहाँ 1853 ई. में इनकी मृत्यु हो गई।

5. प्रमुख आंग्ल-मराठा सन्धियाँ

महत्वपूर्ण सन्धियाँ वर्ष (ई.) सन्धि से सम्बंधित पक्ष / शासक
सूरत की सन्धि 1775 ई. रघुनाथ राव तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी
पुरन्दर की सन्धि 1776 ई. पेशवा माधवराव नारायण राव तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी
सालबाई की सन्धि 1782 ई. माधवराव नारायण राव / बाजीराव द्वितीय तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी
बेसीन की सन्धि 1802 ई. पेशवा बाजीराव द्वितीय तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी
देवगाँव की सन्धि / सुर्जी अर्जुनगाँव की सन्धि 1803 ई. भोंसले तथा कम्पनी / सिन्धिया तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी
राजपुर घाट की सन्धि 1804 ई. होलकर तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी
ग्वालियर की सन्धि / पूना की सन्धि 1817 ई. सिन्धिया तथा कम्पनी / पेशवा बाजीराव द्वितीय तथा कम्पनी
मन्दसौर की सन्धि 1818 ई. होलकर तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी

भाग 2: प्राचीन व मध्यकाल में भारत आने वाले विदेशी यात्री

भारतीय इतिहास के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषण के लिए विदेशी यात्रियों के वृत्तांत अत्यंत प्रामाणिक स्रोत माने जाते हैं:

भ्रमण काल विदेशी यात्री का नाम समकालीन भारतीय शासक / क्षेत्र
1288 से 1293 ई. मार्कोपोलो (इटली) पाण्ड्य राज्य (दक्षिण भारत)
1333 से 1342 ई. इब्नबतूता (मोरक्को) मुहम्मद बिन तुगलक (दिल्ली सल्तनत)
1420 से 1422 ई. निकोलो कोन्टी (इटली) देवराय प्रथम (विजयनगर साम्राज्य)
1442 से 1443 ई. अब्दुर्रज्जाक (ईरान) देवराय द्वितीय (विजयनगर साम्राज्य)
1470 से 1474 ई. अथनासियस निकितिन (रूस) मुहम्मद तृतीय (बहमनी साम्राज्य)
1516 से 1518 ई. एडुआर्डो बारबोसा (पुर्तगाल) कृष्ण देव राय (विजयनगर साम्राज्य)
1520 से 1522 ई. डोमिंगो पायस (पुर्तगाल) कृष्ण देव राय (विजयनगर साम्राज्य)
1567 से 1568 ई. सीज़र फ्रेडरिक (पुर्तगाल) विजयनगर (तालीकोटा युद्ध का प्रत्यक्षदर्शी)
1608 से 1612 ई. कैप्टन हॉकिन्स (अंग्रेज) जहाँगीर (मुगल साम्राज्य)
1615 से 1619 ई. सर थॉमस रो (अंग्रेज) जहाँगीर (मुगल साम्राज्य)
1656 से 1668 ई. बर्नियर (फ्रांसीसी चिकित्सक) शाहजहाँ एवं औरंगज़ेब (मुगल साम्राज्य)
1656 से 1687 ई. मनुची (इटली का यात्री) औरंगज़ेब (मुगल साम्राज्य)

भाग 3: प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के प्रमुख युद्ध: एक दृष्टि में

भारतीय इतिहास की दिशा बदलने वाले प्रमुख युद्धों, उनके कालक्रम और परिणामों की संक्षिप्त वर्णनात्मक तालिका नीचे दी गई है:

युद्ध का नाम वर्ष / काल किनके मध्य लड़ा गया / मुख्य परिणाम
हाइडेस्पीज का युद्ध 326 ई.पू. सिकन्दर ने पंजाब के राजा पुरू (पोरस) को पराजित किया।
कलिंग युद्ध 261 ई.पू. सम्राट अशोक ने कलिंग के राजा को हराया; भीषण नरसंहार से व्यथित होकर बौद्ध धर्म अपनाया।
राबर का युद्ध 712 ई. मोहम्मद-बिन-कासिम ने सिन्ध के राजा दाहिर को पराजित कर मार डाला।
पेशावर का युद्ध 1001 ई. महमूद गजनवी ने हिन्दूशाही राजा जयपाल को पराजित किया।
तराइन का द्वितीय युद्ध 1192 ई. मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित कर भारत में मुस्लिम सत्ता की नींव रखी।
चंदावर का युद्ध 1194 ई. मोहम्मद गोरी ने कन्नौज के राजा जयचन्द को पराजित किया।
पानीपत का प्रथम युद्ध 21 अप्रैल, 1526 ई. बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराकर दिल्ली सल्तनत का अंत किया और मुगल साम्राज्य स्थापित किया।
खानवा का युद्ध 17 मार्च, 1527 ई. बाबर ने मेवाड़ के शासक राणा सांगा को पराजित किया।
चंदेरी का युद्ध / घाघरा का युद्ध 1528 ई. / 1529 ई. बाबर ने मेदिनी राय को हराया / बाबर ने महमूद लोदी के नेतृत्व में अफगानों को हराया।
चौसा का युद्ध / कन्नौज का युद्ध 1539 ई. / 1540 ई. शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को पराजित किया (हुमायूँ को भारत छोड़कर भागना पड़ा)।
सरहिन्द का युद्ध 1555 ई. हुमायूँ ने सिकन्दरशाह सूरी को हराकर पुनः दिल्ली का सिंहासन प्राप्त किया।
पानीपत का द्वितीय युद्ध 5 नवम्बर, 1556 ई. अकबर (बैरम खाँ) ने हेमू (हेमचन्द्र) को पराजित किया।
तालीकोटा का युद्ध 1565 ई. बहमनी महासंघ के मुस्लिम राज्यों ने विजयनगर साम्राज्य को पराजित कर नष्ट कर दिया (बन्नीहट्टी का युद्ध)।
हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून, 1576 ई. मुगल सेनापति मानसिंह और मेवाड़ के महाराणा प्रताप के बीच हुआ (मुगलों की विजय)।
धर्मत का युद्ध / सामूगढ़ का युद्ध 1658 ई. मुगल उत्तराधिकार युद्ध; औरंगज़ेब ने दारा शिकोह की सेना को दोनों युद्धों में पराजित किया।
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