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राजस्थान की झीलें व सिंचाई के साधन - सम्पूर्ण जानकारी

1 min read 157 views 02 Sep 2026 Rajasthan GK ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
राजस्थान की मीठे पानी की झीलें — जयसमंद, पिछोला, राजसमंद, पुष्कर, आनासागर — व खारे पानी की झीलें — सांभर, डीडवाना, पंचपद्रा — तथा सिंचाई के साधन — नहरें, तालाब, कुएँ — की सम्पूर्ण जानकारी RPSC, RAS, RSMSSB, Patwar, SI, REET 2026 हेतु।
Key Points
  • जयसमंद झील — राजस्थान की मीठे पानी की सबसे बड़ी कृत्रिम झील — निर्माण 1685-91 — 7 टापू हैं
  • पुष्कर झील — राजस्थान की मीठे पानी की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील — ज्वालामुखी निर्मित
  • राजसमंद झील — राजप्रशस्ति (संसार की सबसे बड़ी प्रशस्ति) — एकमात्र झील जिसके नाम पर जिला
  • सांभर झील — राजस्थान की सबसे बड़ी खारे पानी की झील — 240 वर्ग किमी.
  • पंचपद्रा झील — 98% सोडियम क्लोराइड — बालोतरा जिला
  • गंग नहर — 1927 में श्रीगंगासिंह द्वारा — सतलुज नदी से — 15 लाख हेक्टेयर सिंचाई

राजस्थान की झीलें — परिचय

राजस्थान की झीलों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है:

  • मीठे पानी की झीलें
  • खारे पानी की झीलें

मीठे पानी की झीलें

राजस्थान में अरावली के पूर्वी भाग में स्थित झीलें मीठे पानी की झीलें हैं — इन्हें ताजे पानी की झील भी कहा जाता है। राज्य में सर्वाधिक मीठे पानी की झीलें उदयपुर जिले में स्थित हैं।

केन्द्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय झील संरक्षण कार्यक्रम में राजस्थान की पाँच झीलों क्रमशः अजमेर की आना सागर, पुष्कर की पुष्कर सरोवर, उदयपुर की पिछोला और फतेहसागर तथा माउंट आबू की नक्की झील को सम्मिलित किया गया है।

जयसमंद झील (देवर झील)

  • जयसमंद झील का निर्माण मेवाड़ के राणा जयसिंह द्वारा गोमती नदी पर बाँध बनाकर 1685-1691 में करवाया गया था
  • यह झील लगभग 15 किमी. लम्बी व 8 किमी. चौड़ी है
  • यह झील उदयपुर शहर से 50 किमी. दक्षिण-पूर्व में स्थित है
  • यह झील राजस्थान की मीठे पानी की सबसे बड़ी व भारत की दूसरी (प्रथम गोविन्द सागर झील-भाखड़ा बांध, हिमाचल प्रदेश) बड़ी कृत्रिम झील है
  • इस झील में गोमती, झावरी तथा बागर नदी का जल आकर गिरता है — इस झील में कुल सात टापू हैं जिनमें भील व मीणा रहते हैं — सबसे बड़ा टापू बाबा का भागड़ा और सबसे छोटा टापू प्यारी है
  • श्यामपुरा नहर व भाट नहर इस झील से सिंचाई के लिए निकाली गई प्रमुख नहरें हैं
  • इसके निकट कलात्मक छतरियाँ तथा निकट की पहाड़ी पर रूठी रानी का महल स्थित है

पिछोला झील

  • पिछोला झील का निर्माण 14वीं सदी में राणा लाखा के समय उदयपुर जिले के एक पिच्छू बंजारे ने पिछोला गाँव के निकट करवाया था
  • इस झील में जलपूर्ति सीसाराम व बुझड़ा नदियों द्वारा होता है तथा यह लिंग नहर के द्वारा फतेहसागर झील से जुड़ी है
  • इस झील में स्थित दो टापुओं पर जगमंदिर (लेक पैलेस) व जगनिवास (लेक गार्डन पैलेस) महल बने हुए हैं — वर्तमान में इन महलों को पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है
  • इतिहासकार फर्यूसन द्वारा इन्हें राजस्थान के विंडसर महलों की संज्ञा दी गई थी
  • जगमंदिर महल का निर्माण महाराणा कर्णसिंह ने सन् 1620 में शुरू करवाया था तथा जगत सिंह ने 1651 ई. में इसे पूर्ण करवाया था
  • जगमंदिर महल में ही 1857 ई. में राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महाराणा स्वरूप ने नीमच की छावनी से भागकर आए 40 अंग्रेजों को शरण देकर क्रांतिकारियों से बचाया था
  • जगनिवास महल का निर्माण 1746 ई. में महाराणा जगत सिंह द्वितीय द्वारा करवाया गया था — इस झील के किनारे पर 'गलकी नटणी का चबूतरा' बना हुआ है
  • 'राजमहल/सिटी पैलेस' जिसका निर्माण महाराणा जयसिंह ने करवाया था वह भी इसी झील के किनारे स्थित है

राजसमंद झील

  • राजसमंद झील का निर्माण मेवाड़ के राजा महाराणा राजसिंह के द्वारा 1662 ई. में काँकरोली के पास करवाया गया था
  • यह झील 6.5 किमी. लम्बी तथा 3 किमी. चौड़ी है — यह झील उदयपुर से 64 किमी. दूर काँकरोली स्टेशन के निकट स्थित है
  • यह राजस्थान की एकमात्र झील है जिसके नाम पर जिले का नाम रखा गया है — यह राजस्थान की दूसरी बड़ी कृत्रिम झील है
  • राजसमंद झील के उत्तरी भाग में झील के किनारों के चारों ओर 9 सीढ़ियाँ होने के कारण इसे 'नौ चौकी' की पाल के नाम से जाना जाता है
  • 9 चौकी की पाल पर 25 काले संगमरमर की चट्टानों पर मेवाड़ का पूरा इतिहास संस्कृत में उल्कीर्ण है — इसे राजप्रशस्ति कहते हैं जो संसार की सबसे बड़ी प्रशस्ति है
  • राजप्रशस्ति अमरकाव्य वंशावली नामक पुस्तक पर आधारित है जिसके लेखक रणछोड़ भट्ट तैलंग हैं
  • इसके किनारे पर द्वारकाधीश मंदिर और घेवर माता की छतरी स्थित है

फतेहसागर झील

  • उदयपुर में स्थित इस झील का निर्माण 1678 में महाराणा जयसिंह ने धूरे के तालाब के साथ करवाया था — यह पिछोला झील से 1.5 किमी. दूर स्थित है
  • फतेहसागर झील देवाली नामक गाँव के पास स्थित है इस कारण इस झील को देवाली तालाब के नाम से भी जाना जाता है
  • इसका पुनर्निर्माण महाराणा फतेह सिंह ने 1888 में करवाया था
  • इस झील में एक टापू है जिस पर नेहरू उद्यान विकसित किया गया है
  • इस झील में सन् 1975 में देश की पहली सौर वेधशाला स्थापित की गई है जिसके द्वारा सूर्य की क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है
  • इसी झील से उदयपुर शहर को पेयजल की आपूर्ति की जाती है
  • इस झील के किनारे पर चेतक पर सवार महाराणा प्रताप की काँस्य प्रतिमा स्थापित है

आनासागर झील

  • आनासागर झील का निर्माण पृथ्वीराज चौहान के पितामह आनाजी/अर्णोराज द्वारा 1137 ई. में करवाया गया था
  • आनासागर झील अजमेर जिले के नाग पहाड़ व तारागढ़ के बीच 13 किमी. की परिधि में स्थित है
  • इस झील का निर्माण लूणी नदी पर किया गया था तथा बांडी नदी भी इसमें आकर गिरती है — इसी झील से अजमेर नगर को पेयजल उपलब्ध होता है
  • जब यह झील भर जाती है तो इसका पानी अजमेर नगर में ही स्थित एक अन्य झील 'पाई सागर' में छोड़ दिया जाता है
  • मुगल शासक जहाँगीर ने इसके किनारे एक उद्यान 'दौलतबाग' बनवाया जिसे अब सुभाष उद्यान कहा जाता है
  • कलाप्रेमी शाहजहाँ ने 1637 में इसके किनारे संगमरमर की 'बारहदरी' का निर्माण करवाया जिसमें संगमरमर के दरवाजे हैं

पुष्कर झील

  • पुष्कर झील राजस्थान के अजमेर नगर से 11 किमी. दूर पुष्कर कस्बे में स्थित अर्ध-वृत्त आकार का पवित्र जल निकाय है
  • यह झील तीन ओर पहाड़ियों से स्थित है — इसमें वर्ष भर जल रहता है
  • यह राजस्थान की मीठे पानी की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है
  • भौगोलिक मान्यताओं के अनुसार इसे ज्वालामुखी निर्मित झील माना जाता है
  • पुष्कर ऊँट मेला "पुष्कर कैमल फेयर" एशिया का सबसे बड़ा ऊँट मेला है जो कार्तिक मास की एकादशी को शुरू होता है तथा कार्तिक पूर्णिमा के दिन समाप्त होता है
  • मान्यता है कि इस झील में डुबकी लगाने से लेचा के सारे रोग दूर हो जाती हैं और लेचा साफ सुथरी हो जाती है
  • झील के आसपास लगभग 500 हिन्दू मंदिर स्थित हैं तथा इसमें बावन स्नान घाट हैं — इन घाटों में वराह, ब्रह्म व गाय घाट महत्वपूर्ण हैं
  • इस झील के किनारे मैडम मैरी के द्वारा महिला घाट का निर्माण करवाया गया था — यहाँ महात्मा गांधी की अस्थियाँ विसर्जित की गई थीं — इसीलिए वर्तमान में उसे गांधीघाट के नाम से जाना जाता है
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस झील का निर्माण भगवान ब्रह्मा जी ने किया था — इस कारण झील के निकट ब्रह्माजी का सबसे प्राचीन व प्रसिद्ध मंदिर है जिसे वर्ष 2006 में राष्ट्रीय स्मारक के रूप में घोषित किया गया

नक्की झील

  • नक्की झील सिरोही जिले के पहाड़ी इलाके माउंट आबू का एक सुंदर पर्यटन स्थल है
  • यह झील राजस्थान की मीठे पानी की झीलों में सबसे ऊँची है तथा मीठे पानी की झील है जो सर्दियों में अक्सर जम जाती है
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हिन्दू देवताओं ने अपने नाखूनों से खोदकर इस झील का निर्माण किया था — इसीलिए इसे नक्की (नख या नाखून) झील के नाम से जाना जाता है
  • प्राकृतिक सीदर्यों की नैसर्गिक आनंद देने वाली यह झील चारों ओर से पर्वत शृंखलाओं से घिरी है
  • झील के किनारे एक सुंदर बगीचा है, जहाँ शाम के समय घूमने और नौकायन के लिए पर्यटक आते हैं
  • इस झील के पास पहाड़ी में हाथी गुफा स्थित है
  • झील के किनारे की पहाड़ियों के बीच रामकुंड के नीचे सोलहवीं शताब्दी का रघुनाथ जी का मंदिर स्थित है

उदयसागर झील

  • उदयसागर झील का निर्माण महाराणा उदयसिंह ने 1559-1565 के बीच करवाया था
  • यह झील उदयपुर से 6 किमी. पूर्व की ओर स्थित है — यह सर्पिल आकार की बेहद सुंदर झील है

फॉयसागर झील

  • फॉयसागर झील अजमेर में स्थित है
  • इस झील का निर्माण 1891-92 में अंग्रेज इंजीनियर फॉय के निर्देशन में बाढ़ राहत परियोजना के तहत करवाया गया था
  • पानी की आवक अधिक हो जाने पर इस झील का पानी आनासागर में जाता है

कायलान झील

  • यह झील जोधपुर शहर से 11 किमी. दूर जैसलमेर रोड पर स्थित है
  • इसे वर्तमान स्वरूप महाराजा प्रताप सिंह के द्वारा प्रदान किया गया था
  • दो पहाड़ियों के मध्य स्थित यह झील जोधपुर की सबसे सुंदर झील है
  • वर्तमान में इस झील में राजीव गाँधी नहर का पानी आता है
  • इस झील के किनारे देश का प्रथम मरु उद्यान माचिया सफारी पार्क का निर्माण किया गया है

सिलीसेढ़ झील

  • अलवर जिले में स्थित इस झील का निर्माण 1845 में महाराजा विनय सिंह द्वारा करवाया गया था
  • यह झील दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-8 पर अलवर से 12 किमी. दूर स्थित है
  • महाराजा विनय सिंह ने इस झील के किनारे अपनी रानी शीला हेतु एक शाही महल बनवाया था जो वर्तमान में लेक पैलेस होटल के नाम से जाना जाता है — यह होटल अब राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है
  • सिलीसेढ़ झील को राजस्थान का नंदनकानन भी कहते हैं
  • दिसम्बर 2015 में राजस्थान पर्यटन विभाग ने सिलीसेढ़ झील में पॉन्टून व्यवस्था लागू की है जिसमें नावों के ऊपर लकड़ी के घर या महल बनाये जायेंगे अर्थात् तैरते हुए महल बनाये जायेंगे

कोलायत झील

  • यह बीकानेर में स्थित एक प्राकृतिक झील है — इसे शुष्क मरुस्थल का सुंदर मरु उद्यान कहा जा सकता है
  • इस झील पर कपिलमुनि का आश्रम है — यहाँ कार्तिक माह की पूर्णिमा को प्रसिद्ध मेला लगता है

सरदार समंद झील

  • जोधपुर की यह झील भी राजस्थान की मीठे पानी की झीलों में सम्मिलित झील है
  • सरदार समंद झील का निर्माण सन् 1933 में महाराज उम्मेद सिंह ने करवाया था
  • झील के किनारे पर स्थित सरदार समंद झील महल, महाराजा उम्मेद सिंह का घर महल था जो अब एक हेरिटेज होटल में परिवर्तित हो गया है

मोती झील

  • मोती झील भरतपुर जिले में स्थित है — यह भरतपुर की जीवनरेखा कहलाती है
  • इसका निर्माण रूपारेल नदी का पानी रोककर करवाया गया था
  • इस झील में गंभीर तथा बाणगंगा नदियों का पानी समाहित होता है
  • इस झील में स्थित नील हरित शैवाल से N₂ युक्त खाद प्राप्त होती है

गडसीसर झील

  • गडसीसर झील जैसलमेर जिले में स्थित वर्षा के पानी की झील है
  • इसका निर्माण 14वीं सदी में राजा महवाल गडसी द्वारा करवाया गया था
  • यह झील उस समय पानी का प्रधान स्रोत थी

खारे पानी की झीलें

सांभर झील

  • यह राजस्थान की खारे पानी की सबसे बड़ी झील है — यह जयपुर जिले में स्थित है
  • यह झील 240 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैली हुई है — लम्बाई 32 किमी. तथा चौड़ाई 3 किमी. से 12 किमी. तक बनाया जाता है
  • इस झील में प्रति वर्ग किमी क्षेत्र में 60000 टन नमक होने का अनुमान है

लूणकरणसर झील

  • लूणकरणसर झील बीकानेर जिले में स्थित खारे पानी की झील है
  • इस झील के पानी में लवणीयता की कमी है — यही कारण है कि इस झील से नमक का उत्पादन बहुत कम होता है

डीडवाना झील

  • डीडवाना झील राजस्थान के नवनिर्मित डीडवाना-कुचामन जिले में स्थित है
  • इस झील की लम्बाई 4 किमी. है — इस झील से साल भर नमक तैयार किया जाता है — यहाँ का नमक उत्तम किस्म का नहीं होता, इस कारण इसका उपयोग खाने में कम और चमड़ा तथा रंगाई उद्योग में ज्यादा किया जाता है

पंचपद्रा झील

  • पंचपद्रा झील नवनिर्मित बालोतरा जिले में पंचपद्रा नगर के निकट स्थित है
  • यह झील लगभग 25 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैली हुई है
  • इस झील के खारे पानी में 98% तक सोडियम क्लोराइड की मात्रा पाई जाती है
  • यह झील वर्षा के जल पर निर्भर नहीं है बल्कि इसे नियतवाही जल स्रोतों से खारे जल की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति होती रहती है

राजस्थान की खारे पानी की कुछ अन्य झीलों में फलौदी, रेवासा, डेगाना, तालछापर और कावोद आदि प्रमुख हैं।

सिंचाई के साधन

राजस्थान सिंचित क्षेत्र की दृष्टि से एक पिछड़ा राज्य है। यहाँ की कृषि योग्य भूमि की पूर्ण रूप से सिंचाई नहीं हो पाती है। राजस्थान में सिंचाई मुख्य रूप से नहरों, ट्यूबवेल, खुले कुओं एवं तालाबों और अन्य स्रोतों से होती है। कुल सिंचित क्षेत्र 95,47,292 हेक्टेयर है।

कुएँ एवं नलकूप

  • कुएँ एवं नलकूप राजस्थान में सिंचाई के सबसे प्रमुख साधन हैं
  • राज्य के कुल सिंचित क्षेत्र के 73.28 प्रतिशत भाग की सिंचाई कुएँ एवं नलकूप द्वारा होती है
  • राज्य के पूर्वी भाग में मुख्य रूप से खेतों की सिंचाई कुओं एवं नलकूपों के माध्यम से होती है — यहाँ जल स्तर 40 फीट की गहराई पर प्राप्त हो जाता है
  • राज्य के अलवर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर, टोंक, सिरोही, जालौर, भरतपुर, जयपुर जिलों में सिंचाई के प्रमुख साधन कुएँ एवं नलकूप हैं

तालाब

  • राजस्थान में उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, बूँदी, पाली, डूंगरपुर, टोंक, कोटा, बाँसवाड़ा जिलों में तालाबों के माध्यम से कृषि भूमि की बड़े स्तर पर सिंचाई होती है
  • राजस्थान में लगभग 450 तालाब हैं जो ज्यादातर राज्य के दक्षिणी और पूर्वी भाग में पाये जाते हैं
  • राज्य में तालाबों से सर्वाधिक सिंचित क्षेत्र भीलवाड़ा जिले में है
  • राज्य के कुल सिंचित क्षेत्र का 0.42% भाग तालाबों द्वारा सिंचित है

नहरें

  • नहरें राजस्थान में सिंचाई का दूसरा महत्वपूर्ण साधन है
  • यहाँ के कुल सिंचित क्षेत्र के लगभग 24.34% भाग की सिंचाई नहरों द्वारा होती है
  • राज्य की बूँदी, भरतपुर, कोटा, जैसलमेर, बीकानेर एवं श्रीगंगानगर के ज्यादातर कृषि भूमि की सिंचाई नहरों के माध्यम से होती है
  • राज्य की लगभग 25 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई नहरों के माध्यम से होती है

राजस्थान की प्रमुख नहरें

गंग नहर

  • गंग नहर फिरोजपुर के समीप हुसैनीवाला से सतलुज नदी से निकाली गई है — इसकी लम्बाई 137 किमी. है
  • इस नहर का निर्माण 1927 ई. में बीकानेर के तत्कालीन महाराजा श्रीगंगा सिंह ने कराया था
  • यह नहर पंजाब राज्य में से बहने के बाद खकरवा (गंगानगर) के पास बीकानेर मंडल में प्रवेश करती है — यह शिवपुर, गंगानगर, जोरावपुर, पद्मपुर, रायसिंह नगर और सरसपर के निकट अनूपगढ़ तक जाती है
  • सन् 1984 ई. में 80 किमी. लम्बे एक लिंक चैनल का निर्माण कराया गया है — इस चैनल को 'गंग नहर लिंक चैनल' कहा जाता है
  • राजस्थान में इस नहर के द्वारा 15 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है
  • राजस्थान में इस नहर की मुख्य शाखाओं तथा उपशाखाओं की कुल लम्बाई लगभग 1280 किमी. है

गुड़गाँव नहर

  • गुड़गाँव नहर यमुना नदी से ओखला के निकट से निकाली गई है
  • इस नहर का निर्माण हरियाणा एवं राजस्थान के संयुक्त प्रयास से हुआ है
  • इस नहर की कुल लम्बाई 58 किमी. है
  • इस नहर से राजस्थान को वर्तमान समय में 500 क्यूसेक पानी प्राप्त होता है
  • यह नहर डीग जिले के कामां तहसील में जुरेरा गाँव के पास राजस्थान में प्रवेश करती है
  • गुड़गाँव नहर के द्वारा राजस्थान के 28.20 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है

भरतपुर नहर

  • भरतपुर नहर के द्वारा राजस्थान के पूर्वी भाग के लगभग 8500 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है
  • इस नहर की कुल लम्बाई 28 किमी. है लेकिन शाखाओं एवं उपशाखाओं सहित कुल लम्बाई 64 किमी. है
  • यह नहर पश्चिमी यमुना नदी से निकलने वाली आगरा नहर से 111 किमी. के पत्थर (Mile-stone) के पास से निकाली गई है
  • भरतपुर नहर का निर्माण 1906 में भरतपुर के तत्कालीन नरेश के प्रयास से हुआ था
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