My Cart
Your Cart 0

    Your cart is empty.

  • Total (Amount) ₹0.00
Topics
मानव शरीर के प्रमुख अंग तंत्र (पाचन... विटामिन्स एवं खनिज: रासायनिक नाम, स... मानव रोग एवं उनके उत्तरदायी कारक (व... आनुवंशिकी (Genetics), DNA एवं RNA स... Title: पादप आकारिकी (Plant Morpholo... न्यूटन के गति के नियम (Newton's Law... प्रकाश की प्रकृति, परावर्तन, अपवर्त... ध्वनी का सिद्धांत: तरंग गति, डॉपलर... आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic... प्रमुख रासायनिक यौगिकों के व्यापारि... दैनिक जीवन में रसायन: अम्ल, क्षार,... भारत के मिसाइल सिस्टम एवं रक्षा प्र... इसरो (ISRO) के अंतरिक्ष मिशन एवं अं... भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम एवं... अंतर्राष्ट्रीय रक्षा समझौते, प्रमुख... ओजोन परत क्षरण: कारण, प्रभाव और मॉन... जलवायु परिवर्तन (Climate Change): प... अल नीनो (El Niño) एवं ला नीना (La N...

ध्वनी का सिद्धांत: तरंग गति, डॉपलर प्रभाव, पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic) और गूंज (Echo)

1 min read 184 views 03 Sep 2026 General Science ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ध्वनि के सिद्धांत, तरंग गति, डॉपलर प्रभाव, अल्ट्रासोनिक तरंगों और गूंज की संपूर्ण अध्ययन सामग्री।
Key Points
  • ध्वनि एक यांत्रिक अनुदैर्ध्य तरंग है जिसके लिए माध्यम की आवश्यकता होती है
  • डॉपलर प्रभाव में स्रोत और श्रोता की आपेक्षिक गति से आवृत्ति में परिवर्तन होता है
  • 20,000 Hz से अधिक आवृत्ति वाली तरंगों को पराश्रव्य तरंगें कहते हैं जिनका उपयोग चिकित्सा और उद्योग में होता है
  • गूंज सुनने के लिए परावर्तक सतह कम से कम 17 मीटर दूर होनी चाहिए
  • ध्वनि की चाल तापमान, माध्यम के घनत्व और प्रकृति पर निर्भर करती है

ध्वनि का परिचय

ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है जो माध्यम के कणों के कंपन से उत्पन्न होती है। यह अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal Wave) है जिसमें माध्यम के कण तरंग की दिशा में ही कंपन करते हैं। ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।

तरंग गति (Wave Motion)

तरंग की परिभाषा

तरंग ऊर्जा के स्थानांतरण का एक माध्यम है जिसमें माध्यम के कण अपनी संतुलन स्थिति के चारों ओर कंपन करते हैं। तरंग में पदार्थ का स्थानांतरण नहीं होता, केवल ऊर्जा का स्थानांतरण होता है।

तरंग के प्रकार

  • यांत्रिक तरंगें: जिनके लिए माध्यम की आवश्यकता होती है (जैसे ध्वनि तरंग)
  • विद्युत चुम्बकीय तरंगें: जिनके लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती (जैसे प्रकाश तरंग)

तरंग के मुख्य गुण

गुणपरिभाषासूत्र
आवृत्ति (f)प्रति सेकंड पूर्ण कंपनों की संख्याf = 1/T
तरंग दैर्घ्य (λ)दो क्रमागत समान बिंदुओं के बीच की दूरीλ = v/f
वेग (v)तरंग के संचरण की गतिv = fλ
आयाम (A)संतुलन स्थिति से अधिकतम विस्थापन-

ध्वनि की चाल

ध्वनि की चाल निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है:

  • तापमान: तापमान बढ़ने से ध्वनि की चाल बढ़ती है
  • माध्यम का घनत्व: घनत्व बढ़ने से चाल घटती है
  • माध्यम की प्रकृति: ठोस > द्रव > गैस में चाल

विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल:

माध्यमचाल (m/s)
वायु (20°C)343
जल1500
लोहा5100
एल्यूमीनियम6400

डॉपलर प्रभाव (Doppler Effect)

परिभाषा

जब ध्वनि स्रोत और श्रोता के बीच आपेक्षिक गति होती है, तो श्रोता को सुनाई देने वाली आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से भिन्न होती है। इस घटना को डॉपलर प्रभाव कहते हैं।

डॉपलर प्रभाव के नियम

  • स्रोत और श्रोता एक-दूसरे की ओर आ रहे हों तो आवृत्ति बढ़ती है
  • स्रोत और श्रोता एक-दूसरे से दूर जा रहे हों तो आवृत्ति घटती है

डॉपलर प्रभाव का सूत्र

f' = f × (v ± vo)/(v ± vs)

जहाँ:

  • f' = श्रोता को सुनाई देने वाली आवृत्ति
  • f = वास्तविक आवृत्ति
  • v = ध्वनि की चाल
  • vo = श्रोता का वेग
  • vs = स्रोत का वेग

डॉपलर प्रभाव के अनुप्रयोग

  • रडार तकनीक में गति मापना
  • खगोलीय पिंडों की गति का अध्ययन
  • मेडिकल अल्ट्रासाउंड
  • ट्रैफिक स्पीड गन

पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic Waves)

परिभाषा

20,000 Hz से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को पराश्रव्य तरंगें कहते हैं। ये मानव कान की श्रव्यता सीमा से बाहर होती हैं।

पराश्रव्य तरंगों के गुण

  • उच्च आवृत्ति और कम तरंग दैर्घ्य
  • अधिक ऊर्जा वाहक
  • सीधी रेखा में चलती हैं
  • परावर्तन और अपवर्तन दिखाती हैं
  • द्रवों और ठोसों में बेहतर संचरण

पराश्रव्य तरंगों का उत्पादन

  • मैग्नेटोस्ट्रिक्टिव जनरेटर: लौह छड़ के चुम्बकीकरण से
  • पीजोइलेक्ट्रिक जनरेटर: क्वार्ट्ज क्रिस्टल का उपयोग
  • गैल्टन की सीटी: उच्च दाब वाली हवा से

पराश्रव्य तरंगों के अनुप्रयोग

क्षेत्रउपयोग
चिकित्साअल्ट्रासाउंड स्कैनिंग, किडनी स्टोन तोड़ना
उद्योगसफाई, वेल्डिंग, धातु की दरारें खोजना
नेवीगेशनसोनार सिस्टम, समुद्री गहराई मापना
रसायनइमल्सीफिकेशन, केमिकल रिएक्शन तेज करना

गूंज (Echo)

परिभाषा

जब ध्वनि तरंग किसी अवरोधक सतह से टकराकर वापस लौटती है, तो मूल ध्वनि के कुछ समय बाद सुनाई देने वाली ध्वनि को गूंज कहते हैं।

गूंज सुनने की शर्तें

  • परावर्तक सतह की दूरी कम से कम 17 मीटर होनी चाहिए
  • मूल ध्वनि और गूंज के बीच कम से कम 0.1 सेकंड का अंतर होना चाहिए
  • परावर्तक सतह कठोर होनी चाहिए

गूंज का सूत्र

दूरी (d) = (v × t)/2

जहाँ:

  • v = ध्वनि की चाल
  • t = मूल ध्वनि और गूंज के बीच का समय अंतर

गूंज के अनुप्रयोग

  • सोनार: समुद्री गहराई मापना और पानी के अंदर की वस्तुओं का पता लगाना
  • रडार: हवाई जहाज और अन्य वस्तुओं की स्थिति का पता लगाना
  • चिकित्सा: अल्ट्रासाउंड इमेजिंग
  • भवन निर्माण: दीवार की मोटाई और दरारों का पता लगाना

ध्वनि प्रदूषण और नियंत्रण

ध्वनि प्रदूषण के स्रोत

  • वाहनों का शोर
  • औद्योगिक मशीनें
  • निर्माण कार्य
  • लाउडस्पीकर
  • हवाई जहाज

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव

  • सुनने की क्षमता में कमी
  • तनाव और चिड़चिड़ाहट
  • नींद में बाधा
  • हृदय रोग का खतरा
  • एकाग्रता में कमी

नियंत्रण के उपाय

  • ध्वनि अवरोधक का उपयोग
  • वाहनों का नियमित रखरखाव
  • शोर सीमा का कानूनी नियंत्रण
  • वृक्षारोपण
  • साउंड प्रूफिंग
Share: WhatsApp Telegram
Finished reading? Take a test
Rajasthan Vidyut Vibhag JEn — Electrical
Asli exam pattern par mock tests, Hindi aur English dono me — har sawal ka detailed solution ke saath. The first test is free.
₹499 ₹149
Free test dein →
सभी विषयों के नोट्स

कोई भी टॉपिक सीधे यहाँ से खोलें

Rajasthan GK 45
Indian GK 38
General Science 18

Practise this topic

You have read the notes — now check whether it stayed.

Biology-I 119 practice questions Botany 59 practice questions Chemistry-I 120 practice questions Physics — Light and Sound 60 practice questions Physics-I 109 practice questions
ExamWise App