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अल नीनो (El Niño) एवं ला नीना (La Niña): प्रशांत महासागरीय धाराएं, प्रभाव एवं तंत्र | UPSC, PSC, SSC, Railway, Banking सम्पूर्ण सार नोट्स

1 min read 253 views 03 Sep 2026 General Science ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
शांत महासागर में उत्पन्न होने वाली अल नीनो और ला नीना परिघटनाओं की वैज्ञानिक कार्यप्रणाली, भारत के मानसून, कृषि, वैश्विक मौसम पर इनके प्रभाव तथा ENSO चक्र का सभी प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु विस्तृत प्रामाणिक नोट्स।
Key Points
  • अल नीनो और ला नीना प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र के तापीय और वायुमंडलीय बदलावों से जुड़ी घटनाएं हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से ENSO चक्र कहा जाता है।
  • अल नीनो के दौरान भूमध्यरेखीय व्यापारिक पवनें कमजोर हो जाती हैं, जिससे पूर्वी प्रशांत महासागर (पेरू तट) का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है।
  • अल नीनो का भारतीय मानसून पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे भारत में कम वर्षा और सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है।
  • ला नीना के दौरान व्यापारिक पवनें अत्यधिक शक्तिशाली हो जाती हैं, जिससे पश्चिमी प्रशांत महासागर में गहरा निम्न वायुदाब बनता है और पेरू तट पर अत्यधिक ठंडे पानी की अपवेलिंग होती है।
  • ला नीना भारतीय मानसून के लिए अत्यधिक सकारात्मक होता है, जिसके प्रभाव से भारत में सामान्य से अधिक वर्षा होती है और सर्दियों में तीव्र ठंड पड़ती है।
  • प्रशांत महासागर में वायुदाब के उतार-चढ़ाव को मापने के लिए ताहिती और डार्विन स्टेशनों के वायुदाब के अंतर (दक्षिणी दोलन सूचकांक - SOI) का उपयोग किया जाता है।

अल नीनो और ला नीना: बुनियादी परिचय

प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र के सतही जल के तापमान (Sea Surface Temperature - SST) और वायुमंडलीय परिस्थितियों में होने वाले आवधिक बदलावों को सामूहिक रूप से ENSO (El Niño-Southern Oscillation - अल नीनो दक्षिणी दोलन) चक्र कहा जाता है। अल नीनो और ला नीना इसी चक्र की दो विपरीत अवस्थाएं हैं। ये दोनों वैश्विक जलवायु पैटर्न को संचालित करने वाले सबसे शक्तिशाली कारक हैं। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोगों (PSC), SSC, रेलवे और बैंकिंग परीक्षाओं के सामान्य ज्ञान और भूगोल खंड में इससे संबंधित वैचारिक प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

सामान्य वर्ष की स्थिति (Normal Year Situation)

अल नीनो और ला नीना को समझने से पहले प्रशांत महासागर की सामान्य स्थिति और वाकर परिसंचरण (Walker Circulation) को समझना आवश्यक है:

  • सामान्य वर्षों में, भूमध्य रेखा पर बहने वाली मजबूत व्यापारिक पवनें (Trade Winds) प्रशांत महासागर के गर्म सतही जल को पूर्व (दक्षिण अमेरिका/पेरू तट) से पश्चिम (इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया) की ओर धकेलती हैं।
  • इसके कारण पश्चिमी प्रशांत महासागर (इंडोनेशिया के पास) का जल गर्म हो जाता है, जहाँ निम्न वायुदाब (Low Pressure) बनता है। यहाँ हवाएं ऊपर उठती हैं और तीव्र वर्षा करती हैं।
  • इसके विपरीत, पूर्वी प्रशांत महासागर (पेरू के तट के पास) का सतही गर्म जल हट जाने से नीचे से ठंडा और पोषक तत्वों से भरपूर पानी ऊपर आता है, जिसे अपवेलिंग (Upwelling) कहते हैं। यहाँ उच्च वायुदाब (High Pressure) बनता है और मौसम शुष्क रहता है। यह ठंडा पानी पेरू के मत्स्य उद्योग के लिए अत्यंत अनुकूल होता है।
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1. अल नीनो (El Niño) — गर्म जलधारा की स्थिति

स्पैनिश भाषा में 'अल नीनो' शब्द का अर्थ 'छोटा बच्चा' या 'बाल ईसा' (Christ Child) होता है, क्योंकि पेरू के मछुआरों ने इस गर्म समुद्री धारा के प्रभाव को सबसे पहले दिसंबर (क्रिसमस) के समय महसूस किया था।

वैज्ञानिक कार्यप्रणाली (Mechanism):

  • अल नीनो वर्ष के दौरान भूमध्यरेखीय व्यापारिक पवनें (Trade Winds) अत्यधिक कमजोर हो जाती हैं।
  • इसके परिणामस्वरूप, पश्चिमी प्रशांत महासागर में संचित गर्म जल का विशाल भंडार वापस पूर्व की ओर (दक्षिण अमेरिका और पेरू के तट की तरफ) बहने लगता है।
  • पेरू के तटीय क्षेत्रों का तापमान सामान्य से $2^\circ\text{C}$ से $5^\circ\text{C}$ तक बढ़ जाता है, जिससे वहां की प्राकृतिक अपवेलिंग (ठंडे पानी का ऊपर आना) रुक जाती है।
  • अब पूर्वी प्रशांत महासागर (पेरू) में निम्न वायुदाब और पश्चिमी प्रशांत महासागर (इंडोनेशिया/ऑस्ट्रेलिया) में उच्च वायुदाब बन जाता है, जिससे वाकर परिसंचरण पूरी तरह उलट या कमजोर हो जाता है।

वैश्विक एवं भारतीय मानसून पर प्रभाव:

  • पेरू और दक्षिण अमेरिका में बाढ़: पेरू और इक्वाडोर के शुष्क क्षेत्रों में अत्यधिक तीव्र वर्षा होती है, जिससे वहां बाढ़ और भूस्खलन की स्थितियां पैदा होती हैं। अपवेलिंग रुकने से मछलियों का भोजन (प्लवक) नष्ट हो जाता है, जिससे मत्स्य उद्योग ठप हो जाता है।
  • इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में सूखा: पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में वर्षा न होने के कारण इंडोनेशिया, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस में गंभीर सूखा पड़ता है और जंगलों में भीषण आग (Bushfires) लगती है।
  • भारतीय मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव (सूखा): अल नीनो का भारतीय मानसून के साथ नकारात्मक संबंध है। इसके कारण भारत की ओर आने वाली मानसूनी पवनें कमजोर हो जाती हैं, जिससे देश में कम वर्षा होती है और सूखे (Drought) की स्थिति उत्पन्न होती है। भारत के कृषि उत्पादन पर इसका सीधा बुरा असर पड़ता है।
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2. ला नीना (La Niña) — ठंडे जलधारा की स्थिति

स्पैनिश भाषा में 'ला नीना' का अर्थ 'छोटी बच्ची' (Little Girl) होता है। यह अल नीनो के पूर्णतः विपरीत होने वाली परिघटना है, जिसे कभी-कभी 'एंटार्कटिक अल नीनो' या 'अल विएहो' (El Viejo) भी कहा जाता है।

वैज्ञानिक कार्यप्रणाली (Mechanism):

  • ला नीना वर्ष के दौरान भूमध्यरेखीय व्यापारिक पवनें सामान्य से अत्यधिक शक्तिशाली व आक्रामक हो जाती हैं।
  • ये पवनें प्रशांत महासागर के गर्म जल को बहुत तीव्र गति से पश्चिम (इंडोनेशिया/एशिया) की ओर धकेलती हैं।
  • इसके कारण पूर्वी प्रशांत महासागर (पेरू तट) पर ठंडे पानी की अपवेलिंग बहुत बढ़ जाती है और वहां का तापमान सामान्य से भी बहुत अधिक ठंडा हो जाता है।
  • पश्चिमी प्रशांत महासागर में सामान्य से बहुत अधिक गहरा निम्न वायुदाब क्षेत्र विकसित हो जाता है।

वैश्विक एवं भारतीय मानसून पर प्रभाव:

  • एशिया और ऑस्ट्रेलिया में भारी वर्षा: इंडोनेशिया, मलेशिया, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया और भारत में सामान्य से बहुत अधिक वर्षा होती है, जिससे कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
  • दक्षिण अमेरिका में सूखा: पेरू और चिली के तटीय क्षेत्रों में अत्यधिक शीतलन (Cooling) के कारण तीव्र सूखा पड़ता है, हालांकि अत्यधिक अपवेलिंग के कारण यह समय मछलियों के उत्पादन के लिए स्वर्ण काल माना जाता है।
  • भारतीय मानसून पर सकारात्मक प्रभाव: ला नीना का भारतीय मानसून के साथ सकारात्मक संबंध है। इसके प्रभाव से भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे देश में भरपूर और सामान्य से अधिक वर्षा होती है। यह स्थिति भारत की खरीफ फसलों और भूजल स्तर के लिए अत्यंत लाभदायक मानी जाती है।
  • शीत ऋतु पर प्रभाव: ला नीना के कारण भारतीय उपमहाद्वीप में सर्दियों के मौसम में सामान्य से अधिक तीव्र ठंड (Severe Winter) पड़ती है।
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अल नीनो और ला नीना में तुलनात्मक अंतर (Quick Summary Table)

सभी एकदिवसीय परीक्षाओं (SSC, Railway, Bank) में त्वरित पुनरीक्षण के लिए यह सारणी अत्यंत उपयोगी है:

विशिष्ट विशेषता अल नीनो (El Niño) ला नीना (La Niña)
शाब्दिक अर्थ छोटा बच्चा (ईसा मसीह) छोटी बच्ची
व्यापारिक पवनों की स्थिति अत्यंत कमजोर (Weak Trade Winds) अत्यधिक शक्तिशाली (Strong Trade Winds)
पूर्वी प्रशांत (पेरू तट) का तापमान असामान्य रूप से गर्म (Warm Anomaly) असामान्य रूप से ठंडा (Cold Anomaly)
पेरू तट पर मौसम का प्रभाव तीव्र वर्षा, बाढ़, मछलियों का ह्रास तीव्र सूखा, अत्यधिक मत्स्य उत्पादन
इंडोनेशिया व ऑस्ट्रेलिया का मौसम गंभीर सूखा, जंगलों में आग (बुशफायर) अत्यधिक भारी वर्षा, बाढ़ की स्थिति
भारतीय मानसून पर प्रभाव नकारात्मक: मानसून में देरी, कम वर्षा, सूखा सकारात्मक: भरपूर वर्षा, बेहतर कृषि, तीव्र ठंड
आवृत्ति (Cycle) हर 3 से 7 वर्ष में एक बार उत्पन्न होता है। सामान्यतः अल नीनो के बाद आता है, परंतु अनिवार्य नहीं।
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ENSO और दक्षिणी दोलन (Southern Oscillation)

अल नीनो एक समुद्री परिघटना है, जबकि **दक्षिणी दोलन (Southern Oscillation)** एक वायुमंडलीय परिघटना है। जब प्रशांत महासागर का पानी गर्म होता है (अल नीनो), तो वायुदाब के पैटर्न में बदलाव आता है।
• वायुदाब के इस अंतर को मापने के लिए वैज्ञानिक **ताहिती (Tahiti - मध्य प्रशांत महासागर)** और **डार्विन (Darwin - उत्तरी ऑस्ट्रेलिया)** के वायुदाब के अंतर की गणना करते हैं, जिसे 'दक्षिणी दोलन सूचकांक' (SOI) कहा जाता है।
• जब SOI का मान ऋणात्मक होता है, तो वह अल नीनो को दर्शाता है और जब धनात्मक होता है, तो वह ला नीना की पुष्टि करता है। इन दोनों के संयुक्त चक्र को ही **ENSO** कहा जाता है।

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