My Cart
Your Cart 0

    Your cart is empty.

  • Total (Amount) ₹0.00
Topics
भारत की अपवाह प्रणाली: नदियाँ एवं प... भारत की जलवायु, मानसून एवं मिट्टिया... भारत की कृषि, फसलें, परियोजनाएँ एवं... भारतीय संविधान का विकास और निर्माण... भारतीय नागरिकता (Citizenship) - निय... मौलिक अधिकार एवं मूल कर्तव्य - संपू... राज्य के नीति-निदेशक तत्व व महत्वपू... संघीय कार्यपालिका: राष्ट्रपति एवं उ... प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद एवं संघीय... संघीय संसद: लोकसभा संरचना, कार्य एव... राज्य कार्यपालिका: राज्यपाल व राज्य... भारतीय न्यायपालिका: सर्वोच्च न्याया... प्रमुख संवैधानिक व संविधानेत्तर संस... केंद्र-राज्य संबंध: विधायी शक्तियाँ... पंचायती राज एवं स्थानीय स्वशासन राजभाषा, आपात उपबंध व राष्ट्रीय प्र... प्रमुख संविधान संशोधन - प्रक्रिया व... भारतीय राजव्यवस्था विविध - वरीयता क... भारतीय उपमहाद्वीप - स्थिति, विस्तार... प्रायद्वीपीय भारत: पर्वत श्रेणियाँ,... इतिहास के स्रोत: विदेशी यात्रियों क... प्राचीन सभ्यताएँ: प्रागैतिहासिक काल... NCERT सार संकलन: सिन्धु सभ्यता, वैद... NCERT सार संकलन: प्राचीन धार्मिक आं... महाजनपद काल, मगध उत्कर्ष व मौर्य सा... मौर्योत्तर काल, संगम युग एवं गुप्त... NCERT सार संकलन: गुप्तोत्तर काल, वर... NCERT सार संकलन: मध्यकालीन राजवंश,... दिल्ली सल्तनत, राजवंश, प्रशासन व स्... विजयनगर व बहमनी साम्राज्य, प्रशासन... प्रान्तीय राजवंश, सूफी व भक्ति आन्द... मुगल साम्राज्य, प्रशासन, साहित्य व... मराठा साम्राज्य, विदेशी यात्री व प्... उत्तरकालीन मुगल, यूरोपीय आगमन व ब्र... प्रमुख किसान, जन विद्रोह व सामाजिक... 1857 की क्रांति, ब्रिटिश गवर्नर जनर... भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, नारे, पत्... भारतीय कला एवं संस्कृति, नृत्य, वाद...

मुगल साम्राज्य, प्रशासन, साहित्य व वास्तुकला

1 min read 133 views 03 Sep 2026 Indian GK ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
कक्षा VI-XII NCERT सार संकलन पर आधारित सम्पूर्ण मुगल साम्राज्य (बाबर से औरंगज़ेब), शेरशाह सूरी, मनसबदारी प्रथा, टोडरमल की दहशाला व्यवस्था, मुगल स्थापत्य एवं साहित्य के विस्तृत नोट्स।
Key Points
  • मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध (1526 ई.) में इब्राहिम लोदी के विरुद्ध पहली बार तुलुगमा युद्ध नीति का प्रयोग किया था.
  • शेरशाह सूरी ने चाँदी का रुपया (178 ग्रेन) और तांबे का दाम (380 ग्रेन) नामक नवीन सिक्के जारी किए तथा भूमि माप हेतु सिकन्दरी गज का प्रयोग किया.
  • सम्राट अकबर ने 1564 ई. में जजिया कर समाप्त किया तथा इसके वित्त मन्त्री राजा टोडरमल ने भू-राजस्व की प्रसिद्ध 'दहशाला प्रणाली' लागू की.
  • जहाँगीर के शासनकाल को मुगल चित्रकला का स्वर्णयुग कहा जाता है तथा नूरजहाँ द्वारा निर्मित एत्मादुद्दौला के मकबरे में पहली बार पित्रादुरा (जड़ाऊ नक्काशी) का प्रयोग हुआ.
  • शाहजहाँ के शासनकाल को स्थापत्य कला का स्वर्णयुग माना जाता है, जिसके काल में ताजमहल, दिल्ली का लालकिला और जामा मस्जिद का निर्माण हुआ.
  • औरंगज़ेब आलमगीर को 'जिन्दा पीर' भी कहा जाता था, जिसने 1679 ई. में जजिया कर को पुनः लागू किया तथा सिक्खों के 9वें गुरु तेगबहादुर की हत्या करवा दी थी.

भाग 1: मुगल शासक एवं प्रमुख ऐतिहासिक घटनाक्रम

मुगल वंश का संस्थापक बाबर पितृवंश की ओर से तैमूर का 5वां वंशज तथा मातृवंश की ओर से चंगेज खाँ का 14वां वंशज था। मुगलों की राजकीय भाषा फारसी थी।

1. बाबर, हुमायूँ एवं शेरशाह सूरी

  • बाबर (1526-30 ई.) — इसका जन्म 14 फरवरी, 1483 ई. को फरगना में हुआ था। इसने 1507 ई. में 'पादशाह' की उपाधि धारण की। पानीपत के प्रथम युद्ध में इसने पहली बार 'तुलुगमा युद्ध नीति' एवं तोपखाने का प्रयोग किया (उस्ताद अली एवं मुस्तफा इसके प्रमुख निशानेबाज थे)। खानवा के युद्ध (1527 ई.) में राणा सांगा को पराजित कर 'गाजी' की उपाधि ली, जिसका वर्णन श्यामल दास की कृति 'वीर विनोद' में है। इसने तुर्की भाषा में अपनी आत्मकथा 'तुजुके बाबरी' (बाबरनामा) लिखी, जिसका फारसी अनुवाद अब्दुल रहीम खानखाना ने किया।
  • हुमायूँ (1530-56 ई.) — इसने 1533 ई. में दिल्ली में 'दीनपनाह' नामक नया भवन बनाया। चौसा का युद्ध (1539 ई.) तथा बिलग्राम/कन्नौज का युद्ध (1540 ई.) में यह शेर खाँ (शेरशाह) से पराजित हुआ और सिंध चला गया। सरहिन्द के युद्ध (1555 ई.) में सिकन्दर शाह को पराजित कर पुनः दिल्ली की गद्दी पर बैठा। 1 जनवरी, 1556 ई. को दीनपनाह भवन में स्थित पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर इसकी मृत्यु हुई। इसकी पत्नी हाजी बेगम ने दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा बनवाया (मुख्य वास्तुकार मीरक मिर्ज़ा गियास थे)।
  • शेरशाह सूरी (1540-45 ई.) — इसका असली नाम 'फरीद' था। इसके पिता हसन खाँ सासाराम (बिहार) के जमींदार थे। 1545 ई. में कालिंजर किले को जीतने के अभियान में उक्का नामक आग्नेयास्त्र चलाते समय इसकी मृत्यु हो गई। सासाराम में झील के बीच ऊँचे टीले पर इसका मकबरा स्थित है। इसने भूमि माप के लिए 'सिकन्दरी गज' (39 अंगुल या 32 इंच) एवं 'सन की डंडी' का प्रयोग किया तथा 'राय' (लगभग 1/3 भाग लगान) पद्धति और 'कबूलियत एवं पट्टा प्रथा' की शुरुआत की। इसने 178 ग्रेन का चाँदी का रुपया एवं 380 ग्रेन का तांबे का दाम नामक सिक्का चलाया तथा ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road) की मरम्मत करवाई। इसके काल में मलिक मोहम्मद जायसी ने 'पद्मावत' की रचना की।

2. अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ एवं औरंगज़ेब

  • अकबर (1556-1605 ई.) — इसका जन्म 1542 ई. में अमरकोट में हुआ था। बैरम खाँ (1556-60 ई.) इसका संरक्षक था। पानीपत के द्वितीय युद्ध (5 नवम्बर, 1556 ई.) में इसने हेमु को पराजित किया। 1556-60 ई. तक के इसके शासन पर महाम अनगा व हरम दल का प्रभाव रहने के कारण इतिहासकारों ने इसे 'पेटिकोट शासन' कहा। इसने 1562 में दास प्रथा का अंत, 1563 में तीर्थयात्रा कर समाप्त, 1564 में जजिया कर समाप्त तथा 1582 में 'दीन-ए-इलाही' की घोषणा की। इसने 'अनुवाद विभाग' की स्थापना की (रामायण व महाभारत का फारसी अनुवाद 'रज्मनामा' नाम से किया गया)। अबुल फजल ने अकबरनामा ग्रंथ की रचना की, जिसका तीसरा खण्ड 'आईन-ए-अकबर' है।
  • जहाँगीर (1605-27 ई.) — इसके बचपन का नाम सलीम था। इसने आगरा के किले में न्याय की प्रसिद्ध 'न्याय की जंजीर' (70 गज लम्बी, 60 घंटियों वाली) लगवाई। सिक्खों के 5वें गुरु अर्जुनदेव को जहाँगीर ने फाँसी दिलवाई थी। इसके काल को 'चित्रकला का स्वर्णकाल' कहा जाता है; इसने आगरा में आगा रज़ा के नेतृत्व में एक चित्रशाला की स्थापना करवाई। इसके दरबार में नादिर-अल-अस्त्र (उस्ताद मन्सूर) और नादिर-उद-जर्मा (अबुल हसन) प्रमुख चित्रकार थे। 1626 ई. में नूरजहाँ ने पूर्णतः सफेद संगमरमर से निर्मित 'एत्मादुद्दौला का मकबरा' बनवाया, जिसमें सर्वप्रथम 'पित्रादुरा' (जड़ाऊ शैली) का प्रयोग हुआ।
  • शाहजहाँ (1627-58 ई.) — इसके काल को 'स्थापत्य कला का स्वर्णयुग' कहा जाता है। इसने दिल्ली का लालकिला, दीवाने आम, दीवाने खास, जामा मस्जिद, आगरा की मोती मस्जिद तथा ताजमहल का निर्माण करवाया। ताजमहल का मुख्य स्थापत्य कलाकार उस्ताद अहमद लाहौरी था। इसके पुत्रों में दाराशिकोह सर्वाधिक विद्वान था, जिसने भगवद्गीता, उपनिषद् और रामायण का फारसी अनुवाद करवाया। शाहजहाँ ने सिजदा एवं पायबोस प्रथा को समाप्त किया था।
  • औरंगज़ेब आलमगीर (1658-1707 ई.) — इसे 'जिन्दा पीर' भी कहा जाता था। इसने 1679 ई. में जजिया कर को फिर से लागू किया। इसके काल में हिन्दू मनसबदारों की संख्या सर्वाधिक (लगभग 337) थी। इसने सिक्खों के 9वें गुरु तेगबहादुर की हत्या 1675 ई. में करवा दी थी। इसके समय पुरन्दर की सन्धि (22 जून, 1665 ई.) जयसिंह और शिवाजी के बीच हुई। इसने औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में 'बीबी का मकबरा' (1679 ई.) बनवाया।

3. अकबर के नवरत्न

सम्राट अकबर के दरबार की शोभा बढ़ाने वाले 9 रत्नों की सूची इस प्रकार है:

क्र.सं. नवरत्न का नाम मुख्य विशेषता / प्रशासनिक भूमिका
1 बीरबल बचपन का नाम महेशदास था, इन्हें कविराज एवं राजा की उपाधि प्राप्त थी। न्याय विभाग के सर्वोच्च अधिकारी थे।
2 अबुल फजल 'आईन-ए-अकबरी' एवं 'अकबरनामा' के रचयिता तथा दीन-ए-इलाही धर्म के मुख्य पुरोहित थे।
3 तानसेन महान संगीतकार, बचपन का नाम रामतनु पाण्डुरंग था। ग्वालियर में जन्म हुआ। मुख्य कृतियाँ: मियाँ की तोड़ी, मियाँ की मल्हार।
4 अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना बैरम खाँ के पुत्र थे, जिन्होंने बाबरनामा का फारसी में अनुवाद किया।
5 मान सिंह आमेर के राजा भारमल के पौत्र, जिन्होंने हल्दीघाटी युद्ध (1576 ई.) में मुगल सेना का नेतृत्व किया था।
6 टोडरमल अकबर के वित्त मन्त्री, जिन्होंने भू-राजस्व की प्रसिद्ध 'दहशाला' या 'टोडरमल बन्दोबस्त' व्यवस्था लागू की।
7 फैजी अकबर के राजकवि तथा अबुल फजल के बड़े भाई, इन्होंने गणित की पुस्तक 'लीलावती' का फारसी अनुवाद किया।
8 हकीम हुकाम अकबर के शाही रसोईघर के प्रबन्धक/रसोइया थे।
9 मुल्ला दो प्याजा अपनी बुद्धिमानी, हाजिरजवाबी और वाकपटुता के लिए प्रसिद्ध परामर्शदाता थे।

भाग 2: मुगलकालीन प्रशासनिक, सामाजिक व भू-राजस्व व्यवस्था

1. केन्द्रीय एवं प्रान्तीय शासन व्यवस्था

अकबर के शासन में केन्द्रीय प्रशासन मुख्य रूप से 4 मन्त्रियों द्वारा संचालित होता था— वजीर (साम्राज्य का प्रधानमन्त्री), दीवान (वित्त एवं राजस्व का सर्वोच्च अधिकारी), मीर बख्शी (सैन्य विभाग का प्रमुख अधिकारी जो 'सरखत' पत्र पर हस्ताक्षर करता था), तथा सदर-उस-सुदूर (धार्मिक मामलों का परामर्शदाता)।

  • प्रान्तीय प्रशासन — मुगल साम्राज्य प्रांतों में बंटा था जिन्हें 'सूबा' कहा जाता था। सूबे का मुख्य अधिकारी 'सिपहसालार/सूबेदार' होता था। सूबा जिलों में विभाजित था, जहाँ 'फौजदार' मुख्य अधिकारी होता था। जिले परगनों में विभाजित थे, जहाँ मुख्य सैन्य अधिकारी 'शिकदार' तथा वित्त अधिकारी 'आमिला' होता था। प्रशासन की सबसे छोटी इकाई 'ग्राम' थी, जिसका प्रधान 'मुकद्दम' या 'चौधरी' कहलाता था। साधारण पुलिस कर्मियों को 'चाट' या 'भाट' कहा जाता था।
  • मनसबदारी व्यवस्था — यह व्यवस्था मंगोल नेता चंगेज खाँ की 'दशमलव प्रणाली' पर आधारित थी। 10 से 500 तक मनसब प्राप्त करने वाले 'मनसबदार', 500 से 2500 तक 'अमीर' एवं 2500 से ऊपर वाले 'अमीर-ए-आजम' कहलाते थे। जहाँगीर ने इसमें 'दो-अस्पा एवं सिंह-अस्पा' की व्यवस्था शुरू की।
  • भू-राजस्व प्रणालियाँ — अकबर ने 1560 ई. में 'टोडरमल की जब्ती प्रणाली' (करोड़ी व्यवस्था) शुरू की। 1570-71 ई. में खालसा भूमि पर 'दहशाला प्रणाली' प्रचलित की गई। औरंगज़ेब ने अपने शासनकाल में 'नस्क प्रणाली' को अपनाया और भू-राजस्व की राशि को उपज का आधा (1/2) कर दिया।

2. उत्पादकता के आधार पर भूमि का वर्गीकरण

भूमि का प्रकार कृषि उत्पादन / मुख्य विशेषता
पोलज भूमि सबसे अधिक उपजाऊ भूमि, जहाँ प्रतिवर्ष नियमित रूप से खेती होती थी।
परती भूमि उर्वरता प्राप्त करने के लिए एक या दो फसल के बाद खाली छोड़ी जाने वाली भूमि।
चाचर भूमि एक फसल लेने के बाद पुनः उपजाऊ बनने के लिए 3-4 वर्षों के लिए खाली छोड़ी जाने वाली भूमि।
बंजर भूमि प्रायः सर्वथा अनुपजाऊ भूमि, जिसे कृषि योग्य नहीं माना जाता था।

भाग 3: मुगलकालीन स्थापत्य कला एवं वास्तुकला

मुगल काल में वास्तुकला ने अभूतपूर्व ऊंचाइयों को छुआ। प्रमुख निर्माण कार्यों की सूची नीचे दी गई है:

निर्माण कार्य / इमारत का नाम अवस्थिति / स्थान निर्माणकर्ता शासक / व्यक्ति
काबुलीबाग मस्जिद पानीपत बाबर
बाबरी मस्जिद अयोध्या बाबर का सेनापति मीर बाकी
दीनपनाह नगर / पुराना किला दिल्ली हुमायूँ / शेरशाह सूरी
आगरा का किला / लालकिला (दिल्ली) आगरा / दिल्ली अकबर / शाहजहाँ
फतेहपुर सीकरी महल / बुलंद दरवाजा फतेहपुर सीकरी अकबर (बुलंद दरवाजा गुजरात विजय के उपलक्ष्य में निर्मित)
पंचमहल / जोधाबाई का महल / इबादतखाना फतेहपुर सीकरी अकबर (इबादतखाना 1578 ई. में धर्म-संसद में बदला गया)
एत्मादुद्दौला का मकबरा आगरा नूरजहाँ (पूर्णतः सफेद संगमरमर एवं पित्रादुरा शैली का प्रथम उपयोग)
ताजमहल / मोती मस्जिद आगरा शाहजहाँ
बीबी का मकबरा (द्वितीय ताजमहल) औरंगाबाद (महाराष्ट्र) औरंगज़ेब

भाग 4: मुगलकालीन साहित्य एवं प्रमुख अनुवाद कार्य

मुगल काल में संस्कृत, फारसी, तुर्की और हिन्दी भाषाओं के ग्रंथों की बड़े पैमाने पर रचना व अनुवाद हुआ:

साहित्य / ग्रंथ का नाम मूल भाषा / स्वरूप लेखक / अनुवादक का नाम
तुजुके-ए-बाबरी (बाबरनामा) तुर्की भाषा (आत्मकथा) बाबर
हुमायूँनामा फारसी भाषा गुलबदन बेगम (बाबर की पुत्री)
अकबरनामा / आईन-ए-अकबरी फारसी भाषा अबुल फजल
मुंतखब-उल-तवारीख फारसी भाषा (अकबर की नीतियों का विरोधी) अब्दुल कादिर बदायूँनी
महाभारत (फारसी अनुवाद: रज्मनामा) अनुवादित फारसी नकीब खाँ, बदायूँनी, अबुल फजल, फैजी
लीलावती (गणित ग्रंथ का अनुवाद) अनुवादित फारसी फैजी
रामचरितमानस (1574 ई. में रचना) हिन्दी (अवधी) गोस्वामी तुलसीदास (अकबर के समकालीन)
सूरसागर हिन्दी (ब्रजभाषा) महाकवि सूरदास
मासिरे आलमगीरी (मुगल राज्य का गजेटियर) फारसी भाषा मुहम्मद साकी मुस्तैद खाँ
Share: WhatsApp Telegram
Finished reading? Take a test
Rajasthan Vidyut Vibhag JEn — Electrical
Asli exam pattern par mock tests, Hindi aur English dono me — har sawal ka detailed solution ke saath. The first test is free.
₹499 ₹149
Free test dein →
सभी विषयों के नोट्स

कोई भी टॉपिक सीधे यहाँ से खोलें

Rajasthan GK 45
Indian GK 38
General Science 18

Practise this topic

You have read the notes — now check whether it stayed.

Agriculture & Industries 30 practice questions Art & Culture 30 practice questions Economy 30 practice questions Famous Personalities 30 practice questions Geography 30 practice questions History 30 practice questions
ExamWise App