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प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद एवं संघीय संसद

1 min read 120 views 02 Sep 2026 Indian GK ExamWise शैक्षणिक टीम द्वारा जाँचा गया
भारतीय संविधान में वर्णित प्रधानमंत्री व मंत्रिपरिषद (अनुच्छेद 74-75), उप-प्रधानमंत्री पद का इतिहास, मंत्रिपरिषद व मंत्रिमंडल में अंतर तथा संघीय संसद (राज्यसभा व लोकसभा) की संरचना एवं शक्तियों का संपूर्ण प्रामाणिक कवरेज।
Key Points
  • संविधान के अनुच्छेद 74 के तहत मंत्रिपरिषद तथा अनुच्छेद 75 के तहत प्रधानमंत्री की नियुक्ति का प्रावधान है.
  • 91वें संविधान संशोधन (2003) के तहत मंत्रिपरिषद का आकार लोकसभा की कुल सदस्य संख्या का अधिकतम 15% निश्चित किया गया है.
  • भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल थे तथा अब तक कुल 8 व्यक्ति इस पद पर रह चुके हैं.
  • 'मन्त्रिमण्डल' (Cabinet) शब्द को 44वें संविधान संशोधन, 1978 द्वारा अनुच्छेद-352 में जोड़ा गया था.
  • राज्यसभा (अनुच्छेद 80) एक स्थायी उच्च सदन है, जिसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है.
  • संसद सदस्यों को दीवानी मामलों में सत्र के 40 दिन पूर्व और 40 दिन बाद तक गिरफ्तारी से छूट प्राप्त है.
  • भारत के प्रधानमंत्री नीति आयोग के पदेन अध्यक्ष होते हैं तथा देश के वार्षिक बजट निर्धारण में उनकी मुख्य भूमिका होती है.

1. प्रधानमंत्री (The Prime Minister)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 में मंत्रिपरिषद के प्रधान के रूप में प्रधानमंत्री का उल्लेख किया गया है. संविधान द्वारा भारत में संसदीय शासन प्रणाली की स्थापना की गई है तथा कार्यपालिका की सर्वोच्च शक्ति राष्ट्रपति में निहित की गई है, परंतु वास्तविक सत्ताधारी के तौर पर उसकी समस्त शक्तियों का प्रयोग प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है. वह सत्ताधारी दल का नेता तथा सरकार का प्रमुख होता है.

नियुक्ति (Appointment)

  • अनुच्छेद 75 — इसके तहत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है.
  • संवैधानिक परंपरा — सामान्य परिस्थितियों में राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया जाता है, परंतु लोकसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त न होने की स्थिति में राष्ट्रपति द्वारा स्वविवेक का प्रयोग किया जाता है.

शक्तियाँ एवं कार्य

  • मंत्रियों की नियुक्ति व पदच्युति — प्रधानमंत्री द्वारा मंत्रियों की नियुक्ति एवं पदच्युति की अनुशंसा राष्ट्रपति को की जाती है. उसके द्वारा मंत्रियों के बीच मंत्रालयों का आवंटन तथा पुनः परिवर्तन किया जाता है.
  • नीति निर्धारण — लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता होने के कारण वह लोकसभा में शासन की प्रमुख नीतियों एवं कार्यों की घोषणा करता है. शासकीय विधेयकों को प्रधानमंत्री की सलाह के अनुसार ही तैयार किया जाता है.
  • मंत्रिपरिषद का संचालन — प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है तथा उसके निर्णयों को प्रभावित करता है.
  • राष्ट्रपति व संसद के बीच कड़ी (अनुच्छेद 78) — इसके अनुसार वह प्रशासन तथा विधान सम्बन्धी सभी निर्णयों की सूचना राष्ट्रपति को देता है. महत्वपूर्ण पदाधिकारियों (जैसे- महान्यायवादी, कैग, निर्वाचन आयुक्त, यूपीएससी अध्यक्ष आदि) की नियुक्तियों के सम्बन्ध में वह राष्ट्रपति को सलाह देता है.
  • अन्य भूमिकाएँ — देश की वित्त व्यवस्था एवं वार्षिक बजट निर्धारित करने में प्रधानमंत्री की अहम भूमिका होती है. वह नीति आयोग का पदेन अध्यक्ष होता है. 'भारत रत्न', 'पद्मविभूषण', 'पद्मभूषण' एवं 'पद्मश्री' आदि उपाधियों की स्वीकृति भी वास्तविक तौर पर प्रधानमंत्री द्वारा ही की जाती है.

प्रधानमंत्री: महत्वपूर्ण स्मरणीय तथ्य

  • प्रथम प्रधानमंत्री — जवाहर लाल नेहरू (1947–64), जिनका कार्यकाल सबसे लम्बा रहा.
  • प्रथम महिला प्रधानमंत्री — श्रीमती इन्दिरा गाँधी (1966–77).
  • प्रथम गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री — श्री मोरारजी देसाई (1977–79). ये प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देने वाले भी प्रथम व्यक्ति थे.
  • लोकसभा का सामना न करने वाले — चौधरी चरण सिंह (1979–80).
  • अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाए गए प्रथम प्रधानमंत्री — विश्वनाथ प्रताप सिंह (1989–90).
  • सबसे कम कार्यकाल — अटल बिहारी वाजपेयी (1996), मात्र 13 दिन का कार्यकाल.
  • विशिष्ट तथ्य — भारत के तीन प्रधानमंत्रियों (जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री एवं श्रीमती इन्दिरा गाँधी) की मृत्यु उनकी पदावधि के दौरान हुई थी. लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु 11 जनवरी, 1966 को भारत से बाहर (ताशकंद में) हुई थी. गुलजारी लाल नंदा दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने थे.
  • 91वां संविधान संशोधन (2003) — इसके द्वारा अनुच्छेद-75 में उपबंध (1क) जोड़कर यह प्रावधान किया गया कि मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा के कुल सदस्य संख्या की 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी.

2. उप-प्रधानमंत्री (The Deputy Prime Minister)

भारतीय संविधान में उप-प्रधानमंत्री पद का कोई मूल प्रावधान नहीं है. किंतु समय-समय पर राजनीतिक कारणों से सत्तारूढ़ दल द्वारा संवैधानिक प्रावधानों से हटकर इस पद पर नियुक्तियां की गई हैं; इस प्रकार यह विशुद्ध रूप से एक राजनीतिक पद है.

  • संवैधानिक स्थिति — संवैधानिक दृष्टि से उप-प्रधानमंत्री और मंत्रिमण्डल के अन्य मंत्रियों की स्थिति में कोई अंतर नहीं होता है. वह व्यावहारिक दृष्टि से प्रधानमंत्री के बाद दूसरे स्थान पर होता है और उसे मंत्रिमण्डल के वरिष्ठतम मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है. उसे कोई विशेष अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं.
  • ऐतिहासिक तथ्य — अब तक कुल 8 व्यक्तियों को उप-प्रधानमंत्री नियुक्त किया जा चुका है. सर्वप्रथम पंडित जवाहर लाल नेहरू के मंत्रिमण्डल काल में सरदार वल्लभभाई पटेल को उप-प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया गया था (1947 से 1950). 1979 में मोरारजी देसाई ने दो उप-प्रधानमंत्री — चौधरी चरण सिंह (वरिष्ठ) और जगजीवन राम (कनिष्ठ) को नियुक्त किया था. चौधरी देवी लाल को दो बार उप-प्रधानमंत्री बनाया गया था. अंतिम उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी (2002–2004) थे.

3. मंत्रिपरिषद एवं मन्त्रिमण्डल (Council of Ministers & Cabinet)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-74 के तहत राष्ट्रपति को उसके दायित्वों के निर्वाह में सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का प्रावधान किया गया है. संवैधानिक रूप से देश की समस्त शक्तियां राष्ट्रपति के हाथों में समाहित हैं, किंतु उसकी समस्त शक्तियों का उपयोग मंत्रिपरिषद/प्रधानमंत्री के नेतृत्व में संचालित होता है.

मंत्रिपरिषद व मन्त्रिमण्डल में मुख्य अंतर

विशिष्ट बिंदु मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) मन्त्रिमण्डल (Cabinet)
संरचना इसमें तीन स्तर के सदस्य होते हैं — (i) कैबिनेट स्तर के मंत्री, (ii) राज्य स्तर के मंत्री, (iii) उपमंत्री. इसमें केवल कैबिनेट स्तर के मंत्री ही शामिल होते हैं. यह मंत्रिपरिषद का एक भाग होता है.
संवैधानिक स्थिति यह एक व्यापक संवैधानिक निकाय है, जिसका वर्णन मूल संविधान के अनुच्छेद-74 व 75 में किया गया है. मूल संविधान में यह शब्द नहीं था. 44वें संविधान संशोधन, 1978 द्वारा इसे अनुच्छेद-352 में शामिल किया गया.
आकार यह एक बड़ा निकाय है, जिसमें 50 से 70 मंत्री तक शामिल हो सकते हैं. यह आकार में छोटा निकाय है, जिसमें सामान्यतः 15-20 मंत्री होते हैं.
शक्तियाँ व कार्य सैद्धान्तिक रूप से मंत्रिपरिषद को समस्त शक्तियां प्राप्त हैं, परंतु इसके कार्यों का निर्धारण मन्त्रिमण्डल करता है. व्यावहारिक रूप से मन्त्रिमण्डल ही मंत्रिपरिषद की शक्तियों का प्रयोग करता है और नीतियों का क्रियान्वयन करवाता है.

मंत्रियों के प्रकार एवं कार्यप्रणाली

  • कैबिनेट मंत्री — ये भारत के प्रशासन की सर्वोच्च इकाई होते हैं, जो अपने विभागों (मंत्रालयों) के अध्यक्ष होते हैं. आपातकाल लागू करने के लिए राष्ट्रपति को भेजी जाने वाली लिखित अनुशंसा पर कैबिनेट मंत्रियों के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है.
  • राज्य मंत्री — इनकी दो श्रेणियां होती हैं — (1) स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री, (2) वे राज्य मंत्री जिन्हें स्वतंत्र प्रभार नहीं दिया गया है और वे कैबिनेट मंत्रियों के अधीन कार्य करते हैं. इन्हें कैबिनेट की बैठकों में भाग लेने का अधिकार नहीं होता.
  • उपमंत्री — ये कनिष्ठ (Junior) मंत्री होते हैं, जो किसी कैबिनेट मंत्री अथवा स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री के अधीन प्रशासनिक कार्यों में सहायता करते हैं.
  • सामूहिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75(3)) — मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है. इसका तात्पर्य है कि यदि सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को सामूहिक रूप से त्यागपत्र देना पड़ता है.

4. संघीय संसद (The Union Parliament) — राज्यसभा

भारत की केन्द्रीय व्यवस्थापिका को संसद के नाम से संबोधित किया जाता है. भारतीय संसद का गठन राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा से मिलकर होता है.

राज्यसभा (Council of States) — उच्च सदन

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 80 संसद के उच्च सदन के रूप में राज्यसभा का उल्लेख करता है. यह एक स्थायी सदन है, जो कभी भंग नहीं होता.

  • सदस्य संख्या — राज्यसभा में सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 हो सकती है, जबकि वर्तमान संख्या 245 है.
  • मनोनयन — राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्यों का मनोनयन किया जाता है, जो कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा या सहकारिता के क्षेत्रों में विशिष्ट स्थान रखते हों.
  • कार्यकाल — राज्यसभा के सदस्यों का गठन 6 वर्ष के लिए होता है. प्रत्येक 2 वर्ष पश्चात् इसके 1/3 सदस्य अवकाश ग्रहण करते हैं और उनके स्थान पर नए सदस्य स्थान ग्रहण करते हैं.
  • अनिवार्य योग्यताएँ — वह भारत का नागरिक हो, उसकी आयु 30 वर्ष से कम न हो, वह भारत या राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो तथा पागल या दिवालिया न हो.
  • पदाधिकारी — भारत का उपराष्ट्रपति, राज्यसभा का पदेन सभापति होता है. राज्यसभा के सदस्यों में से ही एक उपसभापति का निर्वाचन किया जाता है.

संसद सदस्यों के विशेषाधिकार व नियम

  • भाषण की स्वतंत्रता — सदन द्वारा निर्मित नियमों के अंतर्गत सदस्यों को सदन में भाषण की पूर्ण स्वतंत्रता है. उनके द्वारा सदन में व्यक्त किसी भी विचार के विरुद्ध न्यायालय में कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती.
  • गिरफ्तारी से छूट — सदस्यों को दीवानी मामलों में, सदन की बैठक के 40 दिन पूर्व व 40 दिन बाद बंदी नहीं बनाया जा सकता. यह सुविधा आपराधिक मामलों या निवारक निरोध (Preventive Detention) अधिनियम के तहत उपलब्ध नहीं है.
  • सदन के सत्र — भारतीय संसदीय व्यवस्था में संसद के तीन सत्र होते हैं, परंतु दो सत्रों के बीच 6 माह से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए:
    1. बजट सत्र — फरवरी से मई तक चलता है (सबसे लंबा सत्र).
    2. मानसून सत्र — जुलाई से अगस्त माह तक होता है.
    3. शीतकालीन सत्र — नवंबर से दिसंबर तक चलता है (सबसे कम समय का सत्र).

महत्वपूर्ण पदाधिकारियों के मासिक वेतन की तालिका (वर्ष 2026 के अनुसार)

क्र.सं. पदाधिकारी मासिक वेतन (₹ में)
1 राष्ट्रपति 5,00000
2 उप-राष्ट्रपति (राज्यसभा सभापति के रूप में) 4,00000
3 प्रधानमंत्री 1,60,000
4 लोकसभा अध्यक्ष 1,25,000
5 राज्यपाल 3,50,000
6 सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (CJI) 2,80,000
7 सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीश 2,50,000
8 उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश 2,50,000
9 उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीश 2,25,000
10 नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) / मुख्य चुनाव आयुक्त / महान्यायवादी 2,50,000
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