प्रमुख किसान, जन विद्रोह व सामाजिक सुधार संस्थाएँ
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06 Jul 2026
Indian GK
कक्षा VI-XII NCERT सार संकलन पर आधारित नील, पाबना, चम्पारण व बारदोली सत्याग्रह, सन्यासी, संथाल व मुण्डा विद्रोह तथा ब्रह्म समाज, आर्य समाज व रामकृष्ण मिशन के विस्तृत नोट्स।
Table of Contents
Key Points
- 1859 ई. में बंगाल के नदिया जिले से शुरू हुए नील विद्रोह के अत्याचारों का चित्रण दीनबंधु मित्र ने अपने सुप्रसिद्ध नाटक 'नील दर्पण' में किया है.
- महात्मा गांधी द्वारा भारत में किया गया प्रथम सत्याग्रह चम्पारण सत्याग्रह (1917 ई.) था, जो नील किसानों के शोषण की 'तिनकठिया पद्धति' के खिलाफ था.
- 1936 ई. में स्थापित 'अखिल भारतीय किसान सभा' के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी सहजानन्द सरस्वती थे.
- ब्रिटिश शासन के प्रारंभिक दौर में बंगाल और बिहार के क्षेत्र में मंजर शाह और देवी चौधरानी के नेतृत्व में प्रसिद्ध 'सन्यासी विद्रोह' हुआ था.
- छोटानागपुर क्षेत्र में जनजातियों द्वारा किए गए प्रमुख विद्रोहों में कोल विद्रोह (1831-32 ई.) तथा तानाभगत आन्दोलन (1920 ई.) शामिल हैं.
- राजा राममोहन राय ने 1828 ई. में कलकत्ता में 'ब्रह्म समाज' की तथा स्वामी दयानन्द सरस्वती ने 1875 ई. में मुम्बई में 'आर्य समाज' की स्थापना की थी.
- स्वामी विवेकानन्द ने 1896 ई. में बेलूर में अपने गुरु की स्मृति में 'रामकृष्ण मिशन' की आधारशिला रखी थी.
भाग 1: प्रमुख किसान विद्रोह एवं किसान सभाएँ
ब्रिटिश शासन की औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों और जमींदारों के शोषण के खिलाफ भारत के विभिन्न भागों में तीव्र किसान आन्दोलन और विद्रोह हुए।
- नील विद्रोह (1859–60 ई.) — इसकी पहली घटना बंगाल के नदिया जिले में स्थित गोविन्दपुर गाँव में सितम्बर, 1859 ई. में हुई। इस विद्रोह का नेतृत्व दिगम्बर विश्वास एवं विष्णु विश्वास ने किया। 'हिन्दू पैट्रियट' के संपादक हरिश्चंद्र मुखर्जी ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नील विद्रोह के अत्याचारों का खुला चित्रण दीनबंधु मित्र ने अपने प्रसिद्ध नाटक 'नील दर्पण' में किया है।
- पावना विद्रोह (1873–76 ई.) — इसके प्रमुख नेता ईशान चंद्र राय तथा शंभूपाल थे। पावना आन्दोलन का समर्थन बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय तथा आर.सी. दत्त ने किया था। इस विद्रोह का समर्थन ब्रिटिश गवर्नर कैंपबेल ने भी किया था।
- चम्पारण सत्याग्रह (1917 ई.) — यह सत्याग्रह 'तिनकठिया पद्धति' के खिलाफ था, जिसमें किसानों को अपने कृषिजन्य क्षेत्र के 3/20 वें भाग पर नील की खेती करनी अनिवार्य होती थी। चम्पारण सत्याग्रह का नेतृत्व गांधी जी को राजकुमार शुक्ल के द्वारा लखनऊ में सौंपा गया था। यह गांधी जी के द्वारा भारत में किया गया सत्याग्रह का प्रथम प्रयास था। इससे प्रभावित होकर रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया।
- खेड़ा सत्याग्रह (1918 ई.) — गांधी जी के द्वारा किया गया प्रथम सत्याग्रह खेड़ा सत्याग्रह था। इसमें गांधी जी के प्रमुख सहयोगी इन्दुलाल याज्ञनिक एवं वल्लभभाई पटेल थे।
- अवध किसान सभा (1920 ई.) — इसका गठन 17 अक्टूबर, 1920 को बाबा रामचन्द्र के प्रयास से प्रतापगढ़ में किया गया था। प्रतापगढ़ का रूढ़ गाँव इस समय किसान आन्दोलन का प्रमुख केन्द्र था, जहाँ 'नाई-धोबी बन्द' नामक प्रसिद्ध आन्दोलन चलाया गया। इस क्षेत्र में चलाए गए 'एका आन्दोलन' का नेतृत्व मदारी पासी ने किया था।
- मोपला विद्रोह (1921 ई.) — यह विद्रोह केरल के मालाबार क्षेत्र के काश्तकारों का जमींदारों के विरुद्ध विद्रोह था। इसका समर्थन खिलाफत आन्दोलन के नेता शौकत अली, गांधी जी और मौलाना अबुल कलाम आजाद ने किया था।
- बारदोली सत्याग्रह (1928 ई.) — इसका नेतृत्व वल्लभभाई पटेल ने किया था। पटेल को 'सरदार' की उपाधि इसी सत्याग्रह के दौरान बारदोली की महिलाओं ने प्रदान की थी। सरकार द्वारा बारदोली मामलों की जाँच के लिए ब्रूमफील्ड और मैक्सवेल को जाँच आयुक्त नियुक्त किया गया था।
प्रमुख भारतीय किसान सभाएँ
| किसान सभा का नाम | वर्ष | संस्थापक / प्रमुख अध्यक्ष |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश किसान सभा | 1918 ई. | गौरीशंकर मिश्र, इन्द्रनारायण द्विवेदी, मदन मोहन मालवीय |
| आंध्र प्रान्तीय किसान सभा | 1928 ई. | - |
| बिहार किसान सभा | 1929 ई. | स्वामी सहजानन्द सरस्वती |
| उत्कल प्रान्तीय किसान सभा | 20वीं सदी | मालती चौधरी |
| अखिल भारतीय किसान सभा | 1936 ई. | स्वामी सहजानन्द सरस्वती |
भाग 2: प्रमुख नागरिक, जनजातीय एवं सैन्य आन्दोलन
ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर नागरिक, धार्मिक और जनजातीय विद्रोह हुए, जिनका संक्षिप्त विवरण नीचे दी गई तालिका में है:
| आन्दोलन / विद्रोह का नाम | वर्ष (ई.) | प्रमुख नेतृत्वकर्ता | प्रभावित मुख्य क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| सन्यासी विद्रोह | 1770–1800 ई. | मंजर शाह, मूसा शाह, देवी चौधरानी | बंगाल, बिहार |
| पालिगर विद्रोह | 1790 ई. | वी.पी. कट्टाबोम्मन | तमिलनाडु |
| दीवान वेलुथम्पी का विद्रोह | 1805 ई. | दीवान वेलुथम्पी | त्रावणकोर (केरल) |
| पागलपंथी विद्रोह | 1813–33 ई. | करमशाह, टीपू | असम |
| पाइक विद्रोह | 1817 ई. | बख्शी जगबन्धु | उड़ीसा |
| बघेरा विद्रोह | 1818–20 ई. | बघेरा सरदार | ओखा मण्डल |
| कच्छ का विद्रोह | 1819–31 ई. | राजा भारमल | कच्छ |
| वहाबी विद्रोह | 1820–70 ई. | सैय्यद अहमद राय बरेलवी | पटना, हैदराबाद, मद्रास, बंगाल, बम्बई तथा यू.पी. |
| रानी चेनम्मा का विद्रोह | 1824–29 ई. | चेनम्मा | कित्तूर |
| गडकरियों का विद्रोह | 1829–48 ई. | - | कोल्हापुर |
| बारसाल विद्रोह | 1831 ई. | टीटू मीर | बंगाल |
| कोल विद्रोह | 1831–32 ई. | बिन्दराय मानकी | छोटा नागपुर |
| फराजी विद्रोह | 1838–57 ई. | दादू मियाँ (शरीयतउल्ला का पुत्र) | बंगाल |
| संथाल विद्रोह | 1855–56 ई. | सिद्घू, कान्हू | बिहार, झारखंड |
| कूका विद्रोह-I | 1860–70 ई. | भगत जवाहरमल, रामसिंह कूका | पंजाब |
| नाई-धोबी बन्द आन्दोलन | 1919 ई. | बाबा रामचन्द्र | प्रतापगढ़ |
| तानाभगत आन्दोलन | 1920 ई. | जातरा भगत, बलराम भगत | छोटानागपुर |
| रम्पा विद्रोह | 1922–24 ई. | अल्लूरी सीताराम राजू | आंध्र प्रदेश |
| नौसेना विद्रोह | 1946 ई. | - | बम्बई |
भाग 3: सामाजिक-सांस्कृतिक आन्दोलन एवं सुधार संस्थाएँ
19वीं और 20वीं शताब्दी में भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियों, जाति प्रथा और रूढ़िवादिता को दूर करने के लिए अनेक धार्मिक एवं सामाजिक सुधार आन्दोलन चलाए गए:
| सुधार संस्था / आन्दोलन का नाम | संस्थापक / मुख्य प्रवर्तक | स्थापना वर्ष (ई.) |
|---|---|---|
| ब्रह्म समाज | राजा राममोहन राय (कलकत्ता) | 1828 ई. |
| आदि ब्रह्म समाज | देवेन्द्रनाथ टैगोर (कलकत्ता) | 1865 ई. |
| साधारण ब्रह्म समाज | आनन्द मोहन बोस | 1878 ई. |
| प्रार्थना समाज | महादेव गोविन्द रानाडे, आत्माराम पाण्डुरंग (बम्बई) | 1867 ई. |
| आर्य समाज | स्वामी दयानन्द सरस्वती (मुम्बई) | 1875 ई. |
| रामकृष्ण मिशन | स्वामी विवेकानन्द (बेलूर) | 1896 ई. |
| थियोसोफिकल सोसाइटी | मैडम एच.पी. ब्लावत्स्की, कर्नल एच.एस. अल्काँट एवं एनी बेसेन्ट (न्यूयार्क) | 1875 ई. |
| रहनुमाई माजदयासन सभा | नौरोजी फरदोनजी, दादाभाई नौरोजी (मुम्बई) | 1851 ई. |
| देवबंद आन्दोलन | मुहम्मद कासिम ननौतवी, रशीद अहमद गंगोही (उत्तर प्रदेश) | 1867 ई. |
| अहमदिया आन्दोलन | मिर्ज़ा गुलाम अहमद (गुरुदासपुर) | 1889 ई. |
| अलीगढ़ आन्दोलन | सर सैय्यद अहमद खाँ (अलीगढ़) | 1875 ई. |
| विधवा आश्रम | ईश्वरचन्द्र विद्यासागर एवं डी.के. कर्वे | - |
| सर्वेंट्स ऑफ इण्डियन सोसाइटी | गोपाल कृष्ण गोखले | 1915 ई. |
| सोशल सर्विस लीग | श्री नारायण राव मल्हार जोशी | 1911 ई. |
| सत्यशोधक समाज | ज्योतिबा फुले (महाराष्ट्र) | 1873 ई. |
| यंग बंगाल आन्दोलन | हेनरी विवियन डेरेजियो (कलकत्ता) | 19वीं सदी |