भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, नारे, पत्रिकाएं व समितियाँ
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06 Jul 2026
Indian GK
कक्षा VI-XII NCERT सार संकलन पर आधारित भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन (उदारवादी, उग्रवादी, गाँधी युग), प्रमुख समितियाँ, मुकदमे, स्वाधीनता सेनानी, समाचार-पत्र एवं नारों के विस्तृत नोट्स।
Table of Contents
- भाग 1: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख चरण (1885 ई. — 1947 ई.)
- 1. उदारवादी युग (1885–1905 ई.)
- 2. उग्रवादी युग एवं स्वदेशी आंदोलन (1906 ई. से)
- 3. मुस्लिम लीग, होमरूल लीग एवं क्रांतिकारी घटनाएं
- भाग 2: गाँधी युग एवं जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड (1919 ई. — 1947 ई.)
- 1. महात्मा गाँधी का भारत आगमन एवं प्रारंभिक सत्याग्रह
- 2. रॉलेट एक्ट एवं जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड (1919 ई.)
- 3. खिलाफत, असहयोग एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन
- 4. गोलमेज सम्मेलन, कम्यूनल अवार्ड एवं भारत छोड़ो आंदोलन
- भाग 3: ब्रिटिशकालीन महत्वपूर्ण समितियाँ, मुकदमे एवं स्वाधीनता सेनानी
- 1. प्रमुख प्रशासनिक एवं आर्थिक समितियाँ
- 2. क्रांतिकारियों पर हुए प्रसिद्ध मुकदमे एवं गुप्त समितियां
- भाग 4: ब्रिटिश कालीन प्रमुख समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएं
- भाग 5: राष्ट्रीय आंदोलन सम्बन्धी प्रमुख वचन, नारे एवं पुस्तकें
- 1. स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख वचन एवं नारे
- 2. राष्ट्रीय आंदोलन से सम्बन्धित पुस्तकें एवं उनके लेखक
Key Points
- भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का प्रथम चरण उदारवादी युग (1885-1905 ई.) था, जिसके प्रमुख नेता दादाभाई नौरोजी थे, जिन्होंने धन के निष्कासन का सिद्धांत दिया.
- बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में गणपति उत्सव और 1895 में शिवाजी उत्सव मनाना शुरू किया तथा वे उग्रवादी विचारधारा के प्रमुख नेता थे.
- 1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा किए गए बंगाल विभाजन के विरोध में कलकत्ता के टाउन हॉल से ऐतिहासिक स्वदेशी आंदोलन की घोषणा की गई थी.
- जलियाँवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में हुआ, जिसके विरोध में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी 'नाइट' की उपाधि ब्रिटिश सरकार को लौटा दी थी.
- महात्मा गाँधी ने 12 मार्च, 1930 को साबरमती आश्रम से दाण्डी यात्रा शुरू कर सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रारंभ किया था.
- 1932 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड द्वारा घोषित कम्यूनल अवार्ड के विरोध के बाद महात्मा गाँधी और डॉ. अम्बेडकर के बीच पूना पैक्ट संपन्न हुआ.
- 8 अगस्त, 1942 को मुम्बई के ग्वालियर टैंक मैदान से भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पास हुआ, जहाँ गाँधी जी ने "करो या मरो" का ऐतिहासिक नारा दिया.
- भारत का पहला समाचार-पत्र 1780 ई. में जे. अगस्त हिक्की द्वारा कलकत्ता से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित 'बंगाल गजट' था.
- प्रसिद्ध देशभक्ति गीत 'वंदेमातरम्' के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी हैं, जबकि 'हिन्द स्वराज' पुस्तक की रचना महात्मा गाँधी ने की थी.
भाग 1: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख चरण (1885 ई. — 1947 ई.)
राष्ट्रीय आन्दोलन का विकास तीन चरणों में हुआ— पहला उदारवादी युग (1885–1905 ई.), दूसरा उग्रवादी युग (1906–18 ई.) एवं तीसरा गाँधीवादी युग (1919–47 ई.)।
1. उदारवादी युग (1885–1905 ई.)
- मुख्य विशेषताएँ — इस युग में कांग्रेस पर पूरी तरह से उदारवादियों का प्रभाव रहा, जिसके प्रमुख नेतृत्वकर्ता सुरेन्द्रनाथ बनर्जी, दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, गोपालकृष्ण गोखले, महादेव रानाडे और मदनमोहन मालवीय थे। उदारवादी क्रमिक सुधारों में विश्वास रखते थे और इनकी मांगों का स्वर प्रार्थना का होता था। लाला लाजपत राय ने उदारवादी नेतृत्व को 'अवसरवादी आन्दोलन' तथा उदारवादियों के साधनों को 'राजनैतिक भिक्षावृत्ति' की संज्ञा दी थी।
- महत्वपूर्ण बिंदु — दादाभाई नौरोजी को 'ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इण्डिया' कहा जाता है। 'धन के निष्कासन का सिद्धान्त' (Drain of Wealth) दादाभाई नौरोजी द्वारा ही प्रस्तुत किया गया था। रमेशचन्द्र दत्त ने भारत के आर्थिक इतिहास पर प्रथम पुस्तक 'इकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ इण्डिया' लिखी। उदारवादी कांग्रेसी नेताओं ने 'प्रतिनिधित्व के बिना कर नहीं' का नारा दिया था। उदारवादियों के प्रयास से ही 1892 ई. का एक्ट पारित हुआ।
2. उग्रवादी युग एवं स्वदेशी आंदोलन (1906 ई. से)
- उग्रवादी नेतृत्व — 1906 ई. के बाद भारतीय राजनीति में कांग्रेस के भीतर उग्रवादी (क्रांतिकारी) दल का उदय हुआ, जिसके प्रमुख नेता लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, विपिनचन्द्र पाल (लाल-बाल-पाल) एवं अरविन्द घोष थे। तिलक का प्रसिद्ध वक्तव्य था— "स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।"
- क्रांतिकारी गतिविधियां (शुरुआत) — भारत में क्रांतिकारी गतिविधियों की शुरुआत 1897 ई. में महाराष्ट्र से मानी जाती है। तिलक की प्रेरणा से 'आर्य बान्धव समिति' नामक क्रांतिकारी संस्था स्थापित की गई। तिलक द्वारा 1893 ई. में गणपति त्यौहार तथा 1895 ई. में शिवाजी उत्सव की घोषणा की गई। 1897 ई. में चापेकर बन्धुओं द्वारा पूना में दो प्लेग अधिकारियों रैंड तथा एमहर्स्ट की हत्या कर दी गई। बी.डी. सावरकर द्वारा 1904 ई. में नासिक में स्थापित 'मित्रमेला' नामक संस्था ने ही 'अभिनव भारत समाज' के रूप में प्रसिद्धि पाई। 1905 ई. में श्यामजी कृष्ण वर्मा ने लंदन में 'भारत स्वशासन समिति' (इण्डिया हाउस) का गठन किया। 1909 ई. में मदनलाल ढींगरा ने कर्नल विलियम कर्जन वाइली की गोली मारकर हत्या कर दी।
- बंगाल विभाजन एवं स्वदेशी आंदोलन — लॉर्ड कर्जन ने 19 जुलाई, 1905 को बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा की, जिसके परिणामस्वरूप 7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन की घोषणा की गई। 16 अक्टूबर, 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा प्रभावी हो गई, जिसे पूरे बंगाल में 'राखी दिवस' के रूप में मनाया गया। स्वदेशी आंदोलन के दौरान अश्विनी कुमार दत्त ने 'स्वदेश बान्धव समिति' तथा कृष्ण कुमार मित्रा ने 'एंटी सर्कुलर सोसायटी' की स्थापना की। विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का सुझाव सबसे पहले कृष्ण कुमार मित्र ने अपने पत्र 'संजीवनी' में दिया था। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी स्वदेशी प्रतिज्ञाओं की पद्धति को मंदिर में प्रयोग करने वाले पहले व्यक्ति थे। शांति निकेतन की तर्ज पर 'बंगाल नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके पहले प्राचार्य अरविन्द घोष थे। 15 अगस्त, 1906 को 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद्' की स्थापना की गई। स्वदेशी आंदोलन के अवसर पर रवीन्द्र नाथ ठाकुर ने 'आमार सोनार बांग्ला' नामक गीत लिखा, जो वर्तमान में बांग्लादेश का राष्ट्रीय गीत है। ब्रिटिश सरकार ने छात्रों की भागीदारी समाप्त करने हेतु 'कार्लाइल सर्कुलर' लागू किया था।
3. मुस्लिम लीग, होमरूल लीग एवं क्रांतिकारी घटनाएं
- मुस्लिम लीग (1906 ई.) — सन् 1906 में आगा खाँ एवं सलीमुल्ला खाँ के द्वारा ढाका में मुस्लिम लीग की स्थापना की गई, जिसके प्रथम अध्यक्ष आगा खाँ को बनाया गया। लीग का संविधान 1906 ई. में कराची में बना तथा प्रथम अधिवेशन 1908 ई. में अमृतसर में हुआ।
- सूरत विभाजन व कांग्रेस-लीग समझौता — स्वदेशी आंदोलन के मुद्दों को लेकर 1907 ई. में सूरत में कांग्रेस का विभाजन हो गया। 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार दादाभाई नौरोजी ने 'स्वराज' शब्द का उल्लेख किया था। वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस-लीग समझौता हुआ एवं कांग्रेस का एकीकरण हुआ।
- क्रांतिकारी आन्दोलन — बंगाल में क्रांतिकारी आन्दोलन की शुरुआत भद्रलोक समाज ने की। पी.पी. मित्रा, वारिन्द्र कुमार घोष एवं भूपेन्द्र दत्त के सहयोग से 1902 ई. में मिदनापुर में 'अनुशीलन समिति' का गठन किया गया। प्रफुल्ल चाकी एवं खुदीराम बोस ने किंग्सफोर्ड को मारने के लिए मुजफ्फरपुर में बम फेंका; असफलता के बाद प्रफुल्ल चाकी ने स्वयं को गोली मार ली और खुदीराम बोस को 11 अगस्त, 1908 को फाँसी दे दी गई। भाई परमानन्द, सोहन सिंह भाखना तथा हरनाम सिंह ने लाला हरदयाल के साथ मिलकर 1913 ई. में सैन फ्रांसिस्को में 'गदर पार्टी' की स्थापना की और 'युगान्तर आश्रम' बनाया। वर्ष 1914 में 'कामागाटामारू प्रकरण' घटित हुआ, जो सिंगापुर के बाबा गुरदत्त सिंह द्वारा किराए पर लिए गए जहाज से संबंधित था।
- होमरूल लीग (1916 ई.) — बाल गंगाधर तिलक द्वारा 28 अप्रैल, 1916 को पूना में तथा एनी बेसेन्ट द्वारा सितम्बर, 1916 में अड्यार (मद्रास) में होमरूल लीग की स्थापना की गई। तिलक ने 'मराठा' एवं 'केसरी' पत्रों द्वारा तथा एनी बेसेन्ट ने 'न्यू इण्डिया' एवं 'कॉमनवील' द्वारा इसका प्रचार किया। तिलक के होमरूल लीग में जोसेफ बैपटिस्टा अध्यक्ष तथा एन.सी. केलकर सचिव थे। वेलेंटाइन शिरोल ने तिलक को 'भारतीय अशांति का जनक' कहा था। 20 अगस्त, 1917 को मॉन्टेग्यू घोषणा के बाद होमरूल लीग को समाप्त कर दिया गया।
भाग 2: गाँधी युग एवं जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड (1919 ई. — 1947 ई.)
1. महात्मा गाँधी का भारत आगमन एवं प्रारंभिक सत्याग्रह
- प्रारंभिक जीवन — गाँधी जी 1893 ई. में दक्षिण अफ्रीका गए और वहाँ फिनिक्स सैटलमेंट एवं टॉल्स्टाय फार्म की स्थापना की। इन्होंने 1909 ई. में 'हिन्द स्वराज' पुस्तक की रचना की। सन् 1915 ई. में गाँधी जी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौटे और गोपालकृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरु बनाया। इन्होंने अहमदाबाद के पास साबरमती नदी के तट पर 'सत्याग्रह आश्रम' की स्थापना की।
- प्रारंभिक आन्दोलन — अप्रैल, 1917 में गाँधी जी द्वारा भारत में प्रथम सफल **चम्पारण सत्याग्रह** प्रारंभ किया गया। 1918 में प्रथम वास्तविक किसान सत्याग्रह **'खेड़ा सत्याग्रह'** चलाया गया, जिसमें अहमदाबाद मिल मजदूरों की हड़ताल के समर्थन में गाँधी जी ने पहली बार भूख हड़ताल की थी। इन्होंने अहमदाबाद के मिल मजदूरों व मालिकों के बीच प्लेग बोनस विवाद को सुलझाया। गाँधी जी द्वारा स्थापित 'हरिजन सेवक संघ' के संस्थापक अध्यक्ष घनश्याम दास बिड़ला थे।
2. रॉलेट एक्ट एवं जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड (1919 ई.)
- रॉलेट एक्ट — न्यायाधीश सर सिडनी रॉलेट की रिपोर्ट के आधार पर 17 मार्च, 1919 को केंद्रीय विधान परिषद् में रॉलेट एक्ट पारित किया गया। इस एक्ट के द्वारा अंग्रेज सरकार किसी को भी बिना मुकदमा चलाए जेल में बन्द कर सकती थी, इसलिए इसे **'बिना अपील, बिना वकील तथा बिना दलील'** का कानून कहा गया। इसके विरोध में 6 अप्रैल, 1919 ई. को एक देशव्यापी हड़ताल करवाई गई।
- जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड — 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड वैशाखी के दिन हुआ। डॉ. सतपाल एवं डॉ. सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में हो रही जनसभा पर ब्रिगेडियर जनरल आर. डायर ने बिना किसी चेतावनी के गोली चलवा दी, जिसमें 379 व्यक्ति मारे गए (सरकारी रिपोर्ट के अनुसार) और 1200 घायल हुए। इस हत्याकाण्ड के विरोध में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 'नाइट' (Knight) की उपाधि वापस कर दी। इसकी जाँच के लिए लॉर्ड हंटर की अध्यक्षता में **'हंटर आयोग'** का गठन किया गया, जिसमें तीन भारतीय सदस्य (चिमन लाल सीतलवाड़, शहजादा सुल्तान अहमद एवं जगत नारायण) सहित कुल 8 सदस्य थे। कांग्रेस द्वारा मदनमोहन मालवीय की अध्यक्षता में एक जाँच समिति गठित की गई थी। पंजाब में चमनदीप ने 'डंडा फौज' का गठन किया था।
3. खिलाफत, असहयोग एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन
- खिलाफत व असहयोग आंदोलन (1920 ई.) — 23 नवम्बर, 1919 को दिल्ली में अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी का अधिवेशन हुआ जिसकी अध्यक्षता गाँधी जी ने की। 1 अगस्त, 1920 को गाँधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन की शुरुआत की गई (इसी दिन बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु हुई)। आंदोलन के कारण थे— रॉलेट एक्ट, जलियाँवाला बाग हत्याकांड और हंटर कमेटी की रिपोर्ट। आन्दोलन के आरम्भ में महात्मा गाँधी ने 'कैसर-ए-हिन्द' उपाधि वापस कर दी। 5 फरवरी, 1922 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में **'चौरी-चौरा की घटना'** हुई, जहाँ क्रुद्ध भीड़ ने थाने में आग लगा दी जिससे 21 सिपाहियों की मृत्यु हो गई। इस घटना से क्षुब्ध होकर 12 फरवरी, 1922 को गाँधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन समाप्त कर दिया गया। 13 मार्च, 1922 को गाँधी जी को गिरफ्तार कर 6 वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से 5 फरवरी, 1924 को रिहा कर दिया गया।
- स्वराज पार्टी — मार्च, 1923 में मोतीलाल नेहरू एवं सी.आर. दास के द्वारा इलाहाबाद में 'स्वराज पार्टी' का गठन किया गया। 1923 में नागपुर झंडा सत्याग्रह हुआ। 1924 के बेलगाँव कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता महात्मा गाँधी ने की (यह एकमात्र अधिवेशन था जिसकी अध्यक्षता उन्होंने की)।
- नेहरू रिपोर्ट व साइमन कमीशन — 28 अगस्त, 1928 को मोतीलाल नेहरू के द्वारा 'नेहरू रिपोर्ट' प्रस्तुत की गई, जिसमें डोमिनियन स्टेटस को पहला एवं 'पूर्ण स्वराज्य' को दूसरा लक्ष्य घोषित किया गया। इसके विकल्प में जिन्ना ने मार्च, 1929 में '14 सूत्री मांगपत्र' प्रस्तुत किया। 3 फरवरी, 1928 को साइमन कमीशन मुम्बई पहुँचा, जिसके विरोध के दौरान लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज से मृत्यु हो गई। भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद एवं राजगुरु द्वारा पुलिस अधीक्षक सांडर्स की हत्या (अक्टूबर, 1928) कर दी गई। केंद्रीय विधान मंडल में ट्रेड डिस्प्यूट सेफ्टी बिल पर बहस के दौरान 8 अप्रैल, 1929 को भगत सिंह एवं बटुकेश्वर दत्त के द्वारा बम फेंका गया।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930 ई.) — 1929 के लाहौर अधिवेशन में जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में पूर्ण स्वराज्य की घोषणा की गई तथा 26 जनवरी, 1930 को प्रथम स्वाधीनता दिवस मनाने का निश्चय किया गया। गाँधी जी द्वारा 12 मार्च, 1930 को अपने 78 समर्थकों के साथ साबरमती आश्रम से 385 किमी दूर स्थित दाण्डी के लिए प्रस्थान किया गया तथा 6 अप्रैल, 1930 को दाण्डी पहुँचकर नमक कानून तोड़ा गया। बारदोली आन्दोलन की सफलता के बाद महिलाओं ने वल्लभ भाई पटेल को 'सरदार' की उपाधि प्रदान की।
4. गोलमेज सम्मेलन, कम्यूनल अवार्ड एवं भारत छोड़ो आंदोलन
- गोलमेज सम्मेलन (1931-32 ई.) — 5 मार्च, 1931 को गाँधी-इरविन समझौता हुआ। 23 मार्च, 1931 को लाहौर षड्यंत्र केस के तहत भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी दे दी गई (भगत सिंह को शहीद-ए-आजम कहा जाता है)। प्रथम गोलमेज सम्मेलन (12 नवम्बर, 1530 से 13 जनवरी, 1931) में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया। द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (7 सितम्बर, 1931) में कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गाँधी ने हिस्सा लिया; इसी दौरान विंस्टन चर्चिल ने उन्हें 'देशद्रोही फकीर' कहा था। मदनमोहन मालवीय एवं एनी बेसेन्ट ने स्वयं के खर्च पर इसमें हिस्सा लिया था।
- कम्यूनल अवार्ड व पूना पैक्ट (1932 ई.) — 16 अगस्त, 1932 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड के द्वारा 'साम्प्रदायिक पंचाट' (कम्यूनल अवार्ड) जारी किया गया। इसके विरुद्ध गाँधी जी के आमरण अनशन के बाद 26 सितम्बर, 1932 को महात्मा गाँधी एवं अम्बेदकर के मध्य **'पूना पैक्ट'** समझौता हुआ, जिसके तहत हरिजनों के लिए सुरक्षित सीटों को 75 से बढ़ाकर 148 कर दिया गया और केंद्रीय विधान मंडल में 18% सीटें आरक्षित की गईं। प्रांतीय स्वतंत्र राजवंशों में बंगाल में सूर्य सेन के द्वारा 'इंडियन रिपब्लिकन आर्मी' की स्थापना की गई (इन्हें 12 जनवरी, 1934 को फाँसी दी गई)।
- क्रिप्स मिशन व भारत छोड़ो आंदोलन (1942 ई.) — लॉर्ड वेलिंगटन के समय 1935 का भारत शासन अधिनियम बनाया गया, जिसके द्वारा बर्मा को भारत से अलग कर दिया गया। जवाहर लाल नेहरू ने 1935 के अधिनियम को 'दासत का अधिकार पत्र' कहा। 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में सुभाष चन्द्र बोस ने पट्टाभिसितारमैय्या को हराकर कांग्रेस अध्यक्ष का पद जीता तथा बाद में 3 मई, 1939 को 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की स्थापना की। 8 अगस्त, 1940 को लॉर्ड लिनलितगो द्वारा 'अगस्त प्रस्ताव' प्रस्तुत किया गया। 1942 में क्रिप्स प्रस्ताव को महात्मा गाँधी ने 'उत्तर तिथि चेक' (Post Dated Cheque) कहा। 15 दिसम्बर, 1941 को मोहन सिंह ने मलाया में 'आजाद हिन्द फौज' का गठन किया। 8 अगस्त, 1942 को मुम्बई के ऐतिहासिक ग्वालियर टैंक मैदान में 'भारत छोड़ो प्रस्ताव' को पास किया गया, जहाँ गाँधी जी ने **"करो या मरो"** का नारा दिया। आंदोलन के दौरान जयप्रकाश नारायण ने 'आजाद दस्ते' का गठन किया था। सुभाष चन्द्र बोस ने हिटलर से मुलाकात की थी और हिटलर ने उन्हें 'नेताजी' की उपाधि दी; जर्मनी में सुभाष ने 'फ्री इण्डिया सेन्टर' की स्थापना की तथा 'जय हिन्द' का नारा दिया। कर्नल गुरुदयाल ढिल्लो, प्रेम सहगल एवं मेजर शाहनवाज खाँ पर लाल किले में राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया। 25 जून, 1945 को शिमला सम्मेलन आयोजित हुआ।
- कैबिनेट मिशन व स्वतंत्रता (1946-47 ई.) — 24 मार्च, 1946 को 'कैबिनेट मिशन' भारत आया, जिसके सदस्यों में सर स्टैफर्ड क्रिप्स, ए.वी. अलेक्जेंडर तथा पैथिक लारेंस शामिल थे। 20 फरवरी, 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली द्वारा जून 1948 से पहले अंग्रेजों द्वारा भारत छोड़ने की ऐतिहासिक घोषणा की गई। लॉर्ड माउन्टबेटन योजना के आधार पर ही 4 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश संसद में 'भारतीय स्वतंत्रता विधेयक' प्रस्तुत किया गया, जिसे 18 जुलाई, 1947 को स्वीकृति मिली। 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतन्त्र हुआ; स्वतंत्रता के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लीमेन्ट एटली एवं कांग्रेस के अध्यक्ष जेबी कृपलानी थे। सरदार वल्लभभाई पटेल को 'भारत का बिस्मार्क' कहा जाता है।
भाग 3: ब्रिटिशकालीन महत्वपूर्ण समितियाँ, मुकदमे एवं स्वाधीनता सेनानी
1. प्रमुख प्रशासनिक एवं आर्थिक समितियाँ
| आयोग / समिति का नाम | अध्यक्ष | स्थापना वर्ष | समकालीन वायसराय | समिति का मुख्य उद्देश्य / कार्य |
|---|---|---|---|---|
| इनाम आयोग | इनाम | 1852 ई. | लॉर्ड डलहौजी | भूस्वामियों की उपाधियों की जाँच करने के लिए। |
| स्ट्रेची आयोग | रिचर्ड स्ट्रेची | 1880 ई. | लॉर्ड लिटन | अकाल पीड़ितों को राहत दिलाने के लिए गठित प्रथम अकाल आयोग। |
| हंटर आयोग | विलियम हंटर | 1882 ई. | लॉर्ड रिपन | शिक्षा की प्रगति के पुनरावलोकन के लिए। |
| हरशेल समिति | हरशेल | 1893 ई. | लॉर्ड लैंसडाउन | टंकसाल सम्बन्धी सुझाव देने के लिए। |
| लायल आयोग / मैकडोनाल्ड आयोग | जेम्स लायल / सर एंटोनी मैकडोनाल्ड | 1898 ई. / 1901 ई. | लॉर्ड एल्गिन / लॉर्ड कर्जन | 1880 के दुर्भिक्ष (अकाल) आयोग की रिपोर्ट का अध्ययन कर सुझाव देने के लिए। |
| मॉक्रीफ आयोग / फ्रेजर आयोग | सर एंटोनी स्कॉट मॉक्रीफ / सर डब्ल्यू. फ्रेजर | 1901 ई. / 1902 ई. | लॉर्ड कर्जन | सिंचाई व्यय की योजना बनाने / पुलिस कार्य पद्धति की जाँच करना। |
| रैले आयोग / सैडलर आयोग | थॉमस रैले / माइकल सैडलर | 1902 ई. / 1917 ई. | लॉर्ड कर्जन / लॉर्ड चेम्सफोर्ड | विश्वविद्यालय से सम्बन्धित / कलकत्ता विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली व दोषों की जाँच। |
| शाही आयोग / स्कीन समिति | लॉर्ड ली / एंड्रयू स्कीन | 1923 ई. / 1925 ई. | लॉर्ड रीडिंग | भारतीय नागरिक सेवा से सम्बन्धित दोषों को दूर करने / भारतीय सेना के भारतीकरण सम्बन्धी। |
| बटलर समिति / व्हिटले आयोग | हरकोर्ट बटलर / जे.एच. व्हिटले | 1927 ई. / 1928 ई. | लॉर्ड इरविन | ब्रिटिश परमसत्ता और देशी राज्यों के बीच संबंध स्थापित करना / श्रमिकों की स्थिति का अध्ययन। |
| लिंडसे आयोग / सप्रू समिति | ए.डी. लिंडसे / तेज बहादुर सप्रू | 1929 ई. / 1934 ई. | लॉर्ड इरविन / लॉर्ड वेलिंगटन | मिशनरी शिक्षा के विकास के लिए / संयुक्त राज्य में बेरोजगारी के कारणों की जाँच के लिए। |
2. क्रांतिकारियों पर हुए प्रसिद्ध मुकदमे एवं गुप्त समितियां
| मुकदमे / गुप्त समिति का नाम | वर्ष (ई.) | प्रमुख संगठनकर्ता / अभियुक्त | मुख्य ऐतिहासिक विवरण / विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| अलीपुर षड्यंत्र केस | 1908 ई. | अरविन्द घोष सहित कई व्यक्ति | मणिकतल्ला में बम बनाने के कारखाने के केस में अरविंद घोष सहित कई व्यक्तियों पर चलाया गया मुकदमा। |
| नासिक षड्यंत्र केस | 1909–10 ई. | विनायक सावरकर व अन्य | विनायक सावरकर को निर्वासन की सजा तथा अन्य 26 को कारावास। |
| हावड़ा षड्यंत्र / ढाका षड्यंत्र | 1910 ई. | जतिन मुखर्जी / पुलिनदास | जतिन मुखर्जी मुख्य अभियुक्त थे / पुलिनदास को 7 वर्ष की सजा हुई। |
| दिल्ली षड्यंत्र केस | 1915 ई. | मास्टर अमीर चन्द, अवध बिहारी बोस, बाल मुकुन्द | वायसराय पर बम फेंकने के आरोप में मास्टर अमीर चन्द, अवध बिहारी बोस एवं बाल मुकुन्द को फाँसी। |
| बनारस षड्यंत्र / काकोरी षड्यंत्र | 1915-16 / 1925 | शचीन्द्र नाथ सान्याल / रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ | शचीन्द्र नाथ सान्याल को आजीवन काला पानी / बिस्मिल एवं अशफाक उल्ला खाँ को फाँसी की सजा। |
| लाहौर षड्यंत्र केस | 1929–30 ई. | भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव | सांडर्स की हत्या के आरोप में भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव सहित 19 लोगों को फाँसी। |
| अनुशीलन समिति (ढाका / कलकत्ता) | 1902 / 1907 | पुलिन बिहारी दास / बारीन्द्र कुमार घोष, भूपेन्द्र दत्त | बंगाल की प्रथम क्रांतिकारी संस्था थी; पूरे भारत की यह प्रथम समिति थी। |
| हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) | 1924 ई. | चन्द्रशेखर आजाद, शचीन्द्र सान्याल, रामप्रसाद बिस्मिल | इसका मुख्य उद्देश्य अंग्रेज अफसरों में भय व्याप्त करना था। इसकी स्थापना कानपुर में हुई थी। |
| हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) | 1928 ई. | चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह व अन्य | इसकी स्थापना फिरोजशाह कोटला मैदान (दिल्ली) में अखिल भारतीय स्तर पर की गई थी। |
भाग 4: ब्रिटिश कालीन प्रमुख समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएं
भारतीय राष्ट्रीय चेतना के विकास और ब्रिटिश शासन की नीतियों को उजागर करने में तत्कालीन समाचार-पत्रों की सूची नीचे दी गई है:
| प्रकाशन वर्ष | पत्र / पत्रिका का नाम | संस्थापक / संपादक का नाम | प्रकाशन का स्थान | भाषा |
|---|---|---|---|---|
| 1780 ई. | बंगाल गजट | जे. अगस्त हिक्की | कलकत्ता | अंग्रेजी (भारत का प्रथम समाचार पत्र) |
| 1816 ई. | बंगाल गजट | गंगा किशोर भट्टाचार्य | कलकत्ता | बंगाली |
| 1818 ई. | समाचार दर्पण / दिग्दर्शन | मार्शमैन | कलकत्ता | बांग्ला |
| 1821 ई. | संवाद कौमुदी | राजा राममोहन राय | कलकत्ता | बांग्ला |
| 1822 ई. | मिरात-उल अखबार | राजा राममोहन राय | कलकत्ता | फारसी |
| 1826 ई. | उदन्त मार्तण्ड | जुगल किशोर शुक्ला | कलकत्ता | हिन्दी (प्रथम हिन्दी समाचार पत्र) |
| 1830 ई. | बंगदूत | द्वारिकानाथ टैगोर, प्रसन्न टैगोर | कलकत्ता | बांग्ला |
| 1851 ई. | रास्त गोफ्तार | दादाभाई नौरोजी | बम्बई | गुजराती |
| 1853 ई. | हिन्दू पेट्रियॉट | गिरीश चन्द्र घोष, हरिश्चन्द्र मुखर्जी | कलकत्ता | अंग्रेजी |
| 1859 ई. | सोमप्रकाश | द्वारका नाथ विद्याभूषण | कलकत्ता | बांग्ला |
| 1861 ई. | इण्डियन मिरर | देवेन्द्रनाथ टैगोर, मनमोहन घोष | कलकत्ता | अंग्रेजी |
| 1862 ई. | इन्दु प्रकाश | जस्टिस रानाडे | बम्बई | मराठी |
| 1868 ई. | कविवचन सुधा / अमृत बाजार पत्रिका | भारतेन्दु हरिश्चन्द्र / मोतीलाल घोष, शिशिर घोष | वाराणसी / कलकत्ता | हिन्दी / बांग्ला अंग्रेजी |
| 1881 ई. | मराठा / केसरी | बाल गंगाधर तिलक | बम्बई | अंग्रेजी / मराठी |
| 1906 ई. | युगान्तर | भूपेन्द्र दत्त, बारीन्द्र घोष | कलकत्ता | बंगाली |
| 1912 ई. | अल हिलाल | अबुल कलाम आजाद | कलकत्ता | उर्दू |
| 1914 ई. | कॉमनवील / न्यू इण्डिया | एनी बेसेन्ट | बम्बई | अंग्रेजी |
| 1919 ई. | इण्डिपेंडेन्ट / नवजीवन / यंग इण्डिया | मोतीलाल नेहरू / महात्मा गाँधी / महात्मा गाँधी | इलाहाबाद / अहमदाबाद / अहमदाबाद | अंग्रेजी / गुजराती / अंग्रेजी |
| 1922 / 1933 | हिन्दुस्तान टाइम्स / हरिजन | के.एम. पणिक्कर / महात्मा गाँधी | बम्बई / पुणे | अंग्रेजी / हिन्दी |
भाग 5: राष्ट्रीय आंदोलन सम्बन्धी प्रमुख वचन, नारे एवं पुस्तकें
1. स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख वचन एवं नारे
- "स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।" — बाल गंगाधर तिलक
- "सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।" — रामप्रसाद बिस्मिल
- "सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा।" — इकबाल
- "जय हिन्द।" / "दिल्ली चलो।" / "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।" — सुभाषचन्द्र बोस
- "हे राम।" / "करो या मरो।" — महात्मा गाँधी
- "जन-गण-मन-अधिनायक जय हे।" — रवीन्द्रनाथ टैगोर
- "हू लिव्स इफ इण्डिया डाइज।" / "आराम हराम है।" — जवाहरलाल नेहरू
- "इंकलाब जिन्दाबाद।" — भगत सिंह तथा भाव में मोहम्मद इकबाल
- "भारतवर्ष को तलवार के बल पर जीता गया था और तलवार के बल पर ही इसकी रक्षा की जाएगी।" — लॉर्ड एल्गिन II
2. राष्ट्रीय आंदोलन से सम्बन्धित पुस्तकें एवं उनके लेखक
| पुस्तक का नाम | लेखक / रचनाकार | पुस्तक का नाम | लेखक / रचनाकार |
|---|---|---|---|
| वंदेमातरम् / भवानी मंदिर | अरविन्द घोष / बारिन्द्र घोष | प्रॉब्लम ऑफ द ईस्ट | लॉर्ड कर्जन |
| न्यू लैम्प्स फॉर ओल्ड | अरविन्द घोष | नील दर्पण | दीनबंधु मित्र |
| हिन्द स्वराज | महात्मा गाँधी | इण्डिया विन्स फ्रीडम | अबुल कलाम आजाद |
| गोरा / घरे-बाहरे | रवीन्द्रनाथ टैगोर | इण्डिया अनरेस्ट | वेलेंटाइन शिरोल |
| भारत एक खोज (Discovery of India) | जवाहरलाल नेहरू | आनंद मठ / दुर्गेशनंदिनी | बंकिन चन्द्र चटर्जी |
| एसेज इन इण्डियन इकोनॉमिक्स | महादेव गोविन्द रानाडे | इण्डियन स्ट्रगल | सुभाष चन्द्र बोस |
| राइज ऑफ द मराठा पावर | महादेव गोविन्द रानाडे | इण्डियन मुसलमान्स | हंटर |
| आर्कटिक होम ऑफ दि वेदाज / गीता रहस्य | बाल गंगाधर तिलक | फिलोसोफी ऑफ द बॉम्ब | भगवतीचरण वोहरा |
| पावर्टी एण्ड अनब्रिटिश रूल इन इण्डिया | दादाभाई नौरोजी | व्हाई सोशलिज्म | जयप्रकाश नारायण |