चट्टानें, स्थलरूप, विश्व के पर्वत, पठार, मैदान व झीलें
Table of Contents
- भाग 1: चट्टान (Rocks) — वर्गीकरण एवं परिवर्तित रूप
- 1. आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks)
- 2. अवसादी / तलछटी / परतदार चट्टानें (Sedimentary Rocks)
- 3. कायान्तरित या परिवर्तित चट्टानें (Metamorphic Rocks)
- चट्टानों के परिवर्तित रूप की तालिका
- भाग 2: धरातल पर परिवर्तन लाने वाले बल व उत्पन्न स्थलरूप
- भाग 3: पर्वत (Mountains) — वर्गीकरण एवं विश्व की प्रमुख श्रेणियाँ
- 1. निर्माण विधि के अनुसार पर्वतों के प्रकार
- 2. विश्व की प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ
- 3. विश्व के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर
- भाग 4: पठार, मैदान एवं उनके प्रमुख प्रकार
- 1. पठार (Plateaus) — वर्गीकरण व अवस्थिति
- विश्व के प्रमुख पठार व अवस्थिति की तालिका
- 2. मैदान (Plains) — वर्गीकरण व उदाहरण
- भाग 5: विश्व की प्रमुख झीलें (Lakes) एवं अंतरीप (Capes)
- 1. झीलों की भौगोलिक विशेषताएँ
- क्षेत्रफल के आधार पर विश्व की प्रमुख झीलें
- 2. विश्व के प्रमुख अंतरीप (Capes)
Key Points
- रासायनिक संरचना के आधार पर आग्नेय चट्टानों को अम्लीय (जैसे ग्रेनाइट) और क्षारीय (जैसे बेसाल्ट) दो वर्गों में विभाजित किया जाता है.
- अवसादी चट्टानें धरातल के सर्वाधिक 75% भाग को ढके हुए हैं, परन्तु भू-पटल के निर्माण में इनका कुल योगदान केवल 5% ही है.
- नदी (बहते जल) द्वारा निर्मित अपरदनात्मक स्थलरूपों में V व I आकार की घाटियाँ (गॉर्ज) तथा निक्षेपित स्थलरूपों में डेल्टा व जलोढ़ पंख प्रमुख हैं.
- विश्व की सबसे लंबी वलित पर्वत शृंखला दक्षिण अमेरिका की एण्डीज है, जिसकी लम्बाई लगभग 7,000 किमी. है.
- एशिया का माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है, जिस पर पहली बार 29 मई, 1953 को चढ़ाई की गई थी.
- तिब्बत और बोलिविया के पठार अंतरपर्वतीय पठारों के उदाहरण हैं, जबकि पामीर के पठार को 'दुनिया की छत' कहा जाता है.
- विश्व की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील सुपीरियर (कनाडा-अमेरिका) है तथा सबसे गहरी झील साइबेरिया की बैकाल झील है.
- तुर्की की लेक वॉन विश्व की सबसे खारी झील है, जिसकी लवणता 338‰ अंकित की गई है.
भाग 1: चट्टान (Rocks) — वर्गीकरण एवं परिवर्तित रूप
खनिज पदार्थों से युक्त कठोर निक्षेपों (Deposits) से बने पिण्ड जो पृथ्वी के धरातल की रचना करते हैं, चट्टान कहलाते हैं. चट्टान निर्माणकारी खनिज वर्गों में सिलिकेट (फेल्सपार, अभ्रक आदि) सर्वप्रथम है तथा ऑक्साइड (क्वार्ट्ज, हेमेटाइट, मैग्नेटाइट आदि) और कार्बोनेट (कैल्साइट, डोलोमाइट आदि) का स्थान क्रमशः उसके बाद आता है.
1. आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks)
जो पदार्थ पृथ्वी के गर्त से बाहर निकलकर, ठण्डे होकर ठोस हो जाते हैं उन्हें आग्नेय चट्टानें कहते हैं. ये रवेदार, चमकदार, परतरहित होती हैं. इसके प्रमुख उदाहरण— ग्रेनाइट, बेसाल्ट, गैब्रो, आब्सीडियन, डायोराइट, डोलोराइट, एण्डेसाइट, पेरिडोटाइट, फेल्साइट, पिचस्टोन, प्यूमिस, परलाइट आदि हैं.
- मध्यवर्ती आग्नेय चट्टानों के विभिन्न रूप:
- बैथोलिथ (Batholith) — ये प्रायः गुम्बद के आकार के होते हैं, जिनके आकार तीव्र ढाल वाले एवं आधार तल अधिक गहराई में होता है. ये ग्रेनाइट चट्टानों के रूप में विश्व के अधिकांश पर्वतों के कोर (Core) के रूप में मौजूद हैं.
- लैकोलिथ (Lacolith) & फैकोलिथ (Phacolith) — पृथ्वी के धरातल के निकट परतदार चट्टानों के बीच गुम्बदाकार संरचना में मैग्मा के जमने से लैकोलिथ बनता है. जब मैग्मा का निक्षेप तरंगों के रूप में होता है (मोड़ों की अपनति एवं अभिनति में) तो इसे फैकोलिथ कहा जाता है.
- लोपोलिथ (Lopolith), सिल (Sill) & डाइक (Dyke) — जब लावा का जमाव धरातल के नीचे अवतल आकार वाले छिछले बेसिन में होता है तो तश्तरीनुमा संरचना 'लोपोलिथ' कहलाती है. जब लावा का जमाव चट्टानों की दो परतों के बीच क्षैतिज रूप से (परतों के समानांतर) होता है तो उसे सिल कहते हैं. सिल के विपरीत जब मैग्मा का जमाव परतों के लम्बवत् होता है तो उसे डाइक कहते हैं.
- रासायनिक संरचना की दृष्टि से वर्गीकरण:
- अम्लीय चट्टानें (Acid Rocks) — इनमें सिलिका की मात्रा अधिक होती है। इनका रंग हल्का होता है व ये अपेक्षाकृत हल्की होती हैं, जैसे— ग्रेनाइट.
- क्षारीय चट्टानें (Basic Rocks) — इनमें सिलिका की मात्रा कम व फेरो-मैग्नीशियम की प्रधानता होती है. लोहे की अधिकता के कारण इनका रंग गहरा व घनत्व अधिक होता है, जैसे— गैब्रो, बेसाल्ट, रायोलाइट आदि. पूर्व की चट्टानों के ऊपर स्थित बेसाल्ट चट्टान टोपी (Caps) के समान दिखाई पड़ती हैं, इस स्थलाकृति को 'मेसा' (Mesa) कहा जाता है. अत्यंत छोटी आकार वाली मेसा को 'बुट या बुटे' (Butte) कहा जाता है.
2. अवसादी / तलछटी / परतदार चट्टानें (Sedimentary Rocks)
ये वे चट्टानें हैं जिनका निर्माण विखण्डित ठोस पदार्थों, जीव-जन्तुओं एवं पेड़-पौधों के जमाव से होता है. धरातल का 75% भाग अवसादी चट्टानें घेरे हुए हैं, परन्तु भू-पटल के निर्माण में इनका योगदान केवल 5% ही है (शेष 95% भाग आग्नेय एवं रूपान्तरित चट्टानों से निर्मित है). इनमें जीवाश्म (Fossils) और जोड़ (Joints) पाए जाते हैं तथा ये परतदार होती हैं.
- उत्पत्ति एवं संघटन के आधार पर तीन मुख्य वर्ग:
- यान्त्रिक क्रियाओं द्वारा निर्मित — (a) पवन द्वारा निर्मित जैसे— लोएस. (b) हिमानी द्वारा निर्मित जैसे— बोल्डर, क्ले. (c) जल द्वारा निर्मित जैसे— बलुआ पत्थर (Sandstone), गोलाश्म, चीका-मिट्टी (Clay), शेल (Shale) आदि.
- जैविक तत्वों द्वारा निर्मित — (a) जीव-जन्तुओं द्वारा निर्मित जैसे— चूना-पत्थर (Limestone), खड़िया (Chalk). (b) पेड़-पौधों द्वारा निर्मित जैसे— पीट (Peat), कोयला, लिग्नाइट.
- रासायनिक तत्वों द्वारा निर्मित — डोलोमाइट (Dolomite), सेंधा नमक (Rock Salt), जिप्सम, चूना पत्थर आदि.
3. कायान्तरित या परिवर्तित चट्टानें (Metamorphic Rocks)
पृथ्वी के अन्दर उपस्थित ताप तथा दबाव के कारण आग्नेय और अवसादी चट्टानें बहुत समय बाद कायान्तरित चट्टानों में बदल जाती हैं. इनमें रेखाएँ बन जाती हैं और चमक तथा कठोरता आ जाती है.
चट्टानों के परिवर्तित रूप की तालिका
| मूल आग्नेय चट्टान | रूपान्तरित रूप | मूल परतदार (अवसादी) चट्टान | रूपान्तरित रूप | रूपान्तरित चट्टान | पुनः रूपांतरित रूप |
|---|---|---|---|---|---|
| ग्रेनाइट | नीस | बलुआ पत्थर | क्वार्ट्जाइट | स्लेट | शिस्ट |
| बेसाल्ट | शिस्ट | चूना पत्थर | संगमरमर | शिस्ट | फायलाइंट |
| गैब्रो | सर्पेन्टाइन | शेल | स्लेट | फायलाइंट | शिस्ट |
| बिटुमिनस कोयला | ग्रेफाइट | कोयला | ग्रेफाइट, हीरा | - | - |
भाग 2: धरातल पर परिवर्तन लाने वाले बल व उत्पन्न स्थलरूप
पृथ्वी के धरातल पर विभिन्न गतिशील शक्तियों द्वारा अपरदनात्मक (Erosional) और निक्षेपित (Depositional) स्थलरूपों का निर्माण होता है:
| गतिशील शक्तियाँ | उत्पन्न स्थलरूप (अपरदनात्मक) | उत्पन्न स्थलरूप (निक्षेपित) |
|---|---|---|
| 1. बहता हुआ जल (नदी) | V आकार की घाटी, I आकार की घाटी (गॉर्ज/कैनियन), जल प्रपात एवं क्षिप्रिका, नदी विसर्प या मिआंडर, संरचनात्मक सोपान, नदी वेदिका तथा सम्प्राय मैदान. | जलोढ़ पंख, जलोढ़ शंकु, बालुका पुलिन, बालुका तट, प्राकृतिक तटबन्ध या प्राकृतिक बांध, बाढ़ का मैदान एवं डेल्टा. |
| 2. हिमानी / हिमनद | U आकार की घाटी, लटकती या निलम्बित घाटी, सर्क या हिमगहवर, सर्क झील या टार्न, एरेट या तीक्ष्ण कटक, हॉर्न या गिरिश्रृंग, नुनाटक, श्रृंग पुच्छ, भेड़पीठ शैल या रौशमुटोने, हिमोढ सोपान एवं फियोर्ड या फिजोर्ड. | हिमोढ़ या मोरेन, ड्रमलिन, एस्कर, केम, केम वेदिका, कैटिल एवं हिमानी धौत मैदान. |
| 3. पवन (Wind) | अपवाहन बेसिन या वात गर्त, इन्सेलबर्ग, छत्रक शिला या मशरूम रॉक, भूस्तम्भ या डिमाइसेल्स, ज्यूजेन, यार्डंग, ड्राइवकान्टर, जालक या जालीदार शिला एवं पुल तथा खिड़की. | बालुका स्तूप, बरखान, रेतमुक्त कारिडोर या गासी, लोएस, मरु-पेनीप्लेन, उत्खात भूमि, प्लाया, बजाडा या बहाड़ा एवं पेडीमेण्ड. |
| 4. सागरीय जल | तटीय क्लिफ, खांच या दांत, तटीय कन्दरा, प्राकृतिक चिमनी या वात छिद्र, निवेशिका या जियो, प्राकृतिक मेहराब, चिमनी शैल या स्केरी, लघु निवेशिका, तरंग घर्षित वेदी, स्टैक एवं शीर्षस्थल. | पुलिन या बीच, कस्प पुलिन, रोधिका, रोध, अपतट रोधिका, तटीय रोधिका, स्पिट, हुक, लूप, संयोजक रोधिका, छल्लेदार रोधिका, टोम्बोलो, रोधी द्वीप, ज्वारीय प्रवेश द्वार, पंखयुक्त शीर्षयुक्त एवं समुद्रोन्मुखी तटीय प्रसार. |
| 5. भूमिगत जल | घोल रन्ध्र, विलयन रन्ध्र, डोलाइन, पोल्जे या पोलिए, उवाला, लेपीज या शिखरिका, कन्दराएं, प्राकृतिक पुल, धंसती निवेशिका, अन्धी घाटी एवं कार्सट या घोल घाटी. | स्टैलैक्टाइट, गति क्रिया, अपरधपण, स्टैलैग्माइट एवं कन्दरा-स्तम्भ. |
भाग 3: पर्वत (Mountains) — वर्गीकरण एवं विश्व की प्रमुख श्रेणियाँ
पर्वत धरातल के ऊपर उठे ऐसे भागों के रूप में होते हैं, जिनका डाल तीव्र होता है और शिखर भाग संकुचित क्षेत्र वाला होता है. इसके विपरीत पठारों का शिखर भाग चौरस तथा सपाट होता है.
- पर्वत श्रेणी (Mountain Series) & पर्वत श्रृंखला (Mountain Chain) — एक ही प्रकार और एक ही आयु के पहाड़ों एवं पहाड़ियों का ऐसा क्रम जिसमें कई शिखर, कटक, घाटियाँ आदि सम्मिलित हों, 'पर्वत श्रेणी' (जैसे हिमालय) कहलाता है. विभिन्न युगों में निर्मित लम्बे एवं संकरे पर्वतों का समानांतर विस्तार 'पर्वत श्रृंखला' (जैसे अप्लेशियन, रॉकीज) कहलाता है.
- पर्वत समूह & कॉर्डिलेरा (Cordillera) — विभिन्न पर्वत श्रेणियों के संयुक्त विस्तार को पर्वत समूह कहते हैं. कॉर्डिलेरा शब्द का प्रयोग मुख्यतः पश्चिमी उत्तरी अमेरिका में रॉकीज, कास्केड, सिएरा नेवाडा और तटीय श्रेणी के संयुक्त रूप के लिए किया जाता है.
1. निर्माण विधि के अनुसार पर्वतों के प्रकार
- मोड़दार या वलित पर्वत (Folded Mountain) — भू-सन्नति की परतदार चट्टानों में पार्श्वीय सम्पीडन बल के द्वारा इनका निर्माण होता है. इनमें जीवों के जीवाश्म पाए जाते हैं. उदाहरण: एशिया के हिमालय, अराकान, सुलेमान, हिन्दुकुश, जैग्रॉस, एलब्रुज, पोंटिक, टॉरस; यूरोप के आल्प्स, डिनाँरिक, एपीनाइन, पेरिनीज; अफ्रीका के एटलस; उत्तरी अमेरिका के रॉकीज तथा दक्षिणी अमेरिका के एण्डीज पर्वत. एण्डीज की लम्बाई विश्व में सबसे अधिक (लगभग 7,000 किमी.) है.
- नवीन अथवा युवा वलित पर्वत: हिमालय, एण्डीज, रॉकीज, आल्प्स आदि.
- प्राचीन पर्वत (Old Mountains): पेनाइन्स (यूरोप), अप्लेशियन्स (अमेरिका) तथा अरावली पर्वत शृंखला (भारत).
- भ्रंशोत्थ पर्वत (Block Mountain) — दो भ्रंश तलों के सहारे जब कोई भू-खंड ऊपर उठ जाता है तो ब्लॉक पर्वत का निर्माण होता है. उदाहरण: भारत में नीलगिरि, जर्मनी में हॉर्ज एवं ब्लैक फॉरेस्ट, फ्रांस में वॉस्जेज, पाकिस्तान का साल्ट रेंज, कैलिफ़ोर्निया का सिएरा नेवाडा (विश्व का सर्वाधिक विस्तृत ब्लॉक पर्वत).
- ज्वालामुखी पर्वत (Volcanic Mountain) & अवशिष्ट पर्वत (Relicit Mountain) — ज्वालामुखी उद्गार के फलस्वरुप निकले पदार्थों के जमाव से इनका निर्माण होता है. उदाहरण: चिली का एकांकागुआ (7,021 मी. - मृत ज्वालामुखी), इक्वाडोर का कोटोपैक्सी (5,897 मी. - सबसे ऊँचा सक्रिय ज्वालामुखी), अफ्रीका का किलिमन्जारो. जब पठार, पर्वत या उच्च मैदान अपरदित होकर अवशिष्ट पर्वतों का रूप धारण कर लेते हैं तो उन्हें अवशिष्ट पर्वत कहते हैं. उदाहरण: भारत में अरावली, सतपुड़ा, विन्ध्यन, पूर्वी घाट, पश्चिमी घाट. भारत का पश्चिमी घाट वास्तव में पर्वत श्रेणी नहीं है, यह एक भ्रंश कगार है.
2. विश्व की प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ
| क्र.सं. | पर्वत श्रेणी | भौगोलिक स्थिति | सर्वोच्च शिखर |
|---|---|---|---|
| 1 | कार्डिलेरा डि लॉस एण्डीज | दक्षिणी अमेरिका | एकांकागुआ |
| 2 | रॉकी पर्वत श्रेणी | उत्तरी अमेरिका | माउंट एल्बर्ट |
| 3 | हिमालय-काराकोरम-हिन्दुकुश | दक्षिणी-मध्य एशिया | माउंट एवरेस्ट |
| 4 | ग्रेट डिवाइडिंग रेंज | पूर्वी ऑस्ट्रेलिया | कोस्युस्को |
| 5 | ट्रांस अंटार्कटिका पर्वत | अंटार्कटिका | माउंट विन्सन मैसिफ (माउंट विन्सन मसीफ) |
| 6 | यूराल पर्वत श्रेणी | मध्य रूस | गोरा नैरोदनाया |
| 7 | अटलांटिक / पश्चिमी घाट | उत्तरी पश्चिमी अफ्रीका / पश्चिमी भारत | जेबेल टाउबकल / अनाईमुडी |
| 8 | जैग्रॉस पर्वत श्रेणी / काकेशस | ईरान / जॉर्जिया | जार्ड कुह / एल्ब्रुर्ज |
3. विश्व के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर
| नाम | महाद्वीप | देश | पर्वत श्रेणी | ऊंचाई (मीटर) | प्रथम चढ़ाई का वर्ष |
|---|---|---|---|---|---|
| माउंट एवरेस्ट | एशिया | नेपाल-तिब्बत | हिमालय | 8,848 मी. | 29 मई, 1953 |
| K-2 (गॉडविन ऑस्टिन) | एशिया | भारत (POK क्षेत्र) | काराकोरम | 8,611 मी. | 31 जुलाई, 1954 |
| कंचनजंगा | एशिया | नेपाल-भारत | हिमालय | 8,586 मी. | 25 मई, 1955 |
| लहोत्से (Lhotse) | एशिया | नेपाल-तिब्बत | हिमालय | 8,516 मी. | 18 मई, 1956 |
| मकालु / धौलागिरि | एशिया | नेपाल-तिब्बत / नेपाल | हिमालय | 8,463 मी. / 8,167 मी. | 15 मई, 1955 / 13 मई, 1960 |
भाग 4: पठार, मैदान एवं उनके प्रमुख प्रकार
1. पठार (Plateaus) — वर्गीकरण व अवस्थिति
ऐसी उच्च भूमि को पठार कहा जाता है, जिसका शिखर वाला भाग काफी विस्तृत एवं सपाट हो. दुनिया की छत (Roof of the World) पामीर के पठार को कहा जाता है.
- उत्पत्ति के आधार पर वर्गीकरण:
- अंतरपर्वतीय पठार — ये चारों तरफ से पर्वतों से घिरे होते हैं, जैसे— तिब्बत का पठार, बोलीविया का पठार, पेरू का पठार, कोलम्बिया का पठार, मैक्सिको का पठार, ईरान का पठार आदि.
- महाद्वीपीय पठार — ये काफी विस्तृत एवं अति प्राचीन पठार हैं, जैसे— बाल्टिक पठार, दक्षिण भारत का पठार, अरब का पठार, अफ्रीकी पठार, ब्राजील का पठार आदि.
- पर्वतपदीय पठार & ज्वालामुखी पठार — ये पठार पर्वत से सटी हुई लम्बी उच्च भूमि के रूप में मैदान या समुद्र तक फैले होते हैं, जैसे— पैटागोनिया का पठार, उत्तरी अमेरिका का पीडमांट पठार. दरारी उद्भेदन के लावा जमाव से निर्मित पठार ज्वालामुखी पठार कहलाते हैं, जैसे— दक्कन का पठार, कोलम्बिया का पठार.
विश्व के प्रमुख पठार व अवस्थिति की तालिका
| क्र.सं. | पठार का नाम | अवस्थिति / देश | क्र.सं. | पठार का नाम | अवस्थिति / देश |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | एशिया माइनर / अनातोलिया | तुर्की | 2 | मेसेटा पठार | स्पेन |
| 3 | चिआपास पठार | मैक्सिको | 4 | कोलैरेडो / ग्रेट बेसिन / अलास्का | अमेरिका |
| 5 | लॉरेंशिया पठार | कनाडा | 6 | माटोग्रासो / ब्राजील पठार | ब्राजील |
| 7 | तकला मकान पठार | चीन | 8 | तिब्बत का पठार | तिब्बत |
| 9 | मंगोलियाई पठार | मंगोलिया/चीन | 10 | छोटा नागपुर / दक्कन / मेघालय | भारत |
2. मैदान (Plains) — वर्गीकरण व उदाहरण
ये पृथ्वी के धरातल पर द्वितीय क्रम के सर्वाधिक स्पष्ट एवं सरल उच्चावच तथा अपेक्षाकृत समतल व निम्न भूभाग हैं. ढाल मंद होने के कारण नदियों का प्रवाह यहाँ विसर्पित होता है. मैदानों के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
| मैदान का प्रकार | विश्व के प्रमुख उदाहरण |
|---|---|
| कार्सट मैदान (Karst Plain) | सर्बिया एवं मोंटेनेग्रो. |
| हिम अपरदित मैदान (Glacial Plains) | कनाडा, फिनलैंड, स्वीडन. |
| जलोढ़ मैदान (Alluvial Plain) | सिन्धु-गंगा का मैदान, मिसिसिपी का मैदान, नील का मैदान, डेन्यूब का मैदान, ह्वांगहो और यांगटीसी-क्यांग का मैदान आदि. |
| बजट्ट मृतिका मैदान (Till Plain) / लोएस का मैदान | न्यू इंग्लैंड प्रदेश / उत्तरी चीन. |
| तटीय मैदान (Coastal Plain) | कोरोमण्डल तट (भारत), फ्लोरिडा का मैदान (सं.रा. अमेरिका). |
| सम्प्राय मैदान (Peni Plain) / झीलों के मैदान | मध्य रूस का मैदान, पेरिस बेसिन / नीदरलैंड का मैदान. |
भाग 5: विश्व की प्रमुख झीलें (Lakes) एवं अंतरीप (Capes)
1. झीलों की भौगोलिक विशेषताएँ
- मीठे व खारे पानी की झीलें — उत्तरी अमेरिका की सुपीरियर झील विश्व की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है. तुर्की की लेक वॉन विश्व की सर्वाधिक खारे पानी की झील है, जिसकी लवणता 338‰ है. इसके बाद मृत सागर (243‰) का स्थान आता है. कैस्पियन सागर क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व की सबसे बड़ी खारे पानी की झील (यूरेशिया क्षेत्र) है. साइबेरिया की बैकाल झील विश्व की सबसे गहरी झील (औसत गहराई 4,700 फीट) है.
- भारतीय झीलें & अन्य — भारत के पश्चिमी तट पर स्थित लैगून झीलों को स्थानीय रूप से 'कयाल' (Kayal) कहा जाता है, जिसमें केरल की वेम्बनाद झील सबसे बड़ी है. भारत में ओडिशा राज्य की चिल्का झील लैगून या अवरोधक झील का सर्वोत्तम उदाहरण है. कृष्ण व गोदावरी नदियों के बीच कोलेरू झील का निर्माण हुआ है. विश्व की सबसे बड़ी क्रेटर या काल्डेरा झील इंडोनेशिया की तोबा झील है. अफ्रीका की विक्टोरिया झील केन्या, तंजानिया एवं युगांडा की सीमा बनाती है.
क्षेत्रफल के आधार पर विश्व की प्रमुख झीलें
| क्र.सं. | झील का नाम | भौगोलिक स्थिति | क्षेत्रफल (वर्ग किमी.) | मुख्य विवरण / विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| 1 | कैस्पियन सागर | कजाकिस्तान, रूस, तुर्कमेनिस्तान, अजरबैजान व ईरान | 3,71,000 | विश्व की सबसे बड़ी खारे जल की झील. |
| 2 | सुपीरियर | कनाडा व अमेरिका | 82,414 | विश्व की सबसे बड़ी मीठे जल की झील. |
| 3 | विक्टोरिया | युगांडा, केन्या व तंजानिया | 69,485 | अफ्रीका की सबसे बड़ी झील. |
| 4 | ह्यूरन / मिशीगन | कनाडा व अमेरिका / अमेरिका | 59,600 / 58,000 | उत्तरी अमेरिका की प्रमुख झीलें. |
| 5 | टंगानिका / बैकाल | बुरूंडी, तंजानिया, जाम्बिया / रूस | 32,893 / 31,500 | विश्व की सबसे लम्बी झील / विश्व की सर्वाधिक गहरी झील. |
| 6 | ग्रेट बियर / ग्रेट स्लेव | कनाडा | 31,080 / 28,930 | कनाडा की प्रमुख झीलें. |
| 7 | टिटिकाका | पेरू व बोलिविया | 8,135 | विश्व की सबसे ऊंची नौकायन झील. |
| 8 | ग्रेट साल्ट | अमेरिका | 4,662 | विश्व की तीसरी सर्वाधिक खारे जल की झील. |
2. विश्व के प्रमुख अंतरीप (Capes)
समुद्र में प्रक्षिप्त स्थल खंड का संकरा भाग जो जलमार्गों के निर्धारण में सहायक होता है, अंतरीप कहलाता है:
| क्र.सं. | अंतरीप का नाम | देश | महासागर / सागर | सटीक अवस्थिति |
|---|---|---|---|---|
| 1 | अंगुलहास केप | दक्षिण अफ्रीका | हिन्द महासागर | दक्षिण हिन्द महासागर. |
| 2 | ब्लॉन्की केप | संयुक्त राज्य अमेरिका | प्रशान्त महासागर | ऑरेगन, प्रशान्त महासागर. |
| 3 | केप केनरेवल | संयुक्त राज्य अमेरिका | अटलांटिक महासागर | अटलांटिक महासागर तट. |
| 4 | केनकन केप | मेक्सिको | अटलांटिक महासागर | मैक्सिको की खाड़ी. |
| 5 | गुड होप केप | दक्षिण अफ्रीका | दक्षिण अटलांटिक | केपटाउन के दक्षिण में हिन्द महासागर. |
| 6 | कन्याकुमारी | भारत | तमिलनाडु | हिन्द महासागर. |
| 7 | नॉर्थ केप | न्यूजीलैंड | दक्षिण प्रशान्त महासागर | प्रशान्त महासागर. |